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Meerut News: मौत के बाद करते हैं तर्पण... जीवित पर किया त्याग
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मेरठ। श्राद्ध पक्ष में बेटे वृद्ध आश्रम, मंदिर, तीर्थस्थल पर जाकर मृत माता-पिता की आत्मा की शांति के लिए दान पुण्य और तर्पण करते हैं। वहीं, जिले में कुछ ऐसे करोड़पति बेटे भी हैं, जिन्होंने अपने जीवित माता-पिता को उनके ही घर से निकाल दिया। इनमें कुछ ऐसे हैं, जो अपने पिता के कारोबार से ही करोड़पति बने हैं। क्योंकि उन्हें वृद्ध आश्रम तक पहुंचाने वाली उनकी वह संतान हैं, जिनके लिए उन्होंने जीवन भर कड़ी मेहनत की।
अपने बेटों की खुशी के लिए अपनी खुशियों को त्याग दिया। शहर के पांच वृद्ध आश्रम में 160 बुजुर्ग महिला और पुरुष रह रहे हैं। इनकी आयु 70 वर्ष से 85 वर्ष के बीच है। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जिन्हें बेटे के विवाह और बंटवारा करने के बाद अपनों ने बेगाना कर दिया। वृद्ध आश्रम में रहने वाले इन बुजुर्गों से उनके बेटे का जिक्र किया जाता है, तो उनके आंसू छलक जाते हैं।
केस वन :
वृद्ध आश्रम में आबूलेन का करोड़पति व्यापारी
आबूलेन के 85 वर्षीय करोड़पति व्यापारी अब वृद्ध अवस्था में गंगानगर स्थित वृद्ध आश्रम में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। दोनों बेटों में कोई भी उनको अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है। 30 साल पूर्व ये दो बड़ी कंपनियों के डीलर थे। व्यापारी के दो बेटे हैं और दोनों ही समृद्ध हैं। इसके बाद भी दोनों में से कोई भी बेटा बुजुर्ग को अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है।
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केस दो :
ताऊ को घर से बाहर निकाला
गुप्ता कॉलोनी निवासी बुजुर्ग की कोई संतान नहीं थी। वह प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थे। वह घर में अपने भतीजों के साथ रह रहे थे। चंद्रलोक कॉलोनी स्थित वृद्ध आश्रम के केयरटेकर ने बताया कि राधेश्याम को घर में भोजन भी नहीं मिल रहा था। ऐसे में पड़ोसियों के शिकायत करने पर राधेश्याम को वृद्ध आश्रम लाया गया। केयरटेकर ने बताया कि राधेश्याम का भतीजा बड़ी कंपनी में कार्यरत है।
केस तीन
जमींदार को बेटों ने घर से निकाला
खतौली निवासी बुजुर्ग को उसके बच्चों ने 70 साल की आयु में घर से निकाल दिया। अब वह चंद्रलोक कॉलोनी स्थित वृद्ध आश्रम में रह रहे हैं। केयरटेकर ने बताया कि वृद्ध का दोष सिर्फ इतना था कि जायदाद के बंटवारे में एक बेटे को लगता है कि उसे कम दिया और दूसरे को लगता है उसे उसका पूरा हिस्सा नहीं मिला। छह महीने से वह वृद्ध आश्रम में रह रहे हैं।
केस चार : बेटे निकाल लेते थे पेंशन, भोजन तक नहीं देते थे
एमईएस से सेवानिवृत्त अधिकारी 90 वर्षीय बुजुर्ग गंगानगर स्थित आश्रम में रह रहे हैं। वृद्ध आश्रम से मिली जानकारी के अनुसार उनके बेटे बुजुर्ग की सारी पेंशन निकाल लेते थे और बुजुर्ग को भोजन भी नहीं दे रहे थे। बेटी और दामाद ने पिता की हालत को देखते हुए उन्हें वृद्ध आश्रम में पहुंचाया। बेटी अब पिता के विभिन्न खर्चों का ध्यान रख रही है।
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अपने बेटों की खुशी के लिए अपनी खुशियों को त्याग दिया। शहर के पांच वृद्ध आश्रम में 160 बुजुर्ग महिला और पुरुष रह रहे हैं। इनकी आयु 70 वर्ष से 85 वर्ष के बीच है। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जिन्हें बेटे के विवाह और बंटवारा करने के बाद अपनों ने बेगाना कर दिया। वृद्ध आश्रम में रहने वाले इन बुजुर्गों से उनके बेटे का जिक्र किया जाता है, तो उनके आंसू छलक जाते हैं।
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वृद्ध आश्रम में आबूलेन का करोड़पति व्यापारी
आबूलेन के 85 वर्षीय करोड़पति व्यापारी अब वृद्ध अवस्था में गंगानगर स्थित वृद्ध आश्रम में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। दोनों बेटों में कोई भी उनको अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है। 30 साल पूर्व ये दो बड़ी कंपनियों के डीलर थे। व्यापारी के दो बेटे हैं और दोनों ही समृद्ध हैं। इसके बाद भी दोनों में से कोई भी बेटा बुजुर्ग को अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है।
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केस दो :
ताऊ को घर से बाहर निकाला
गुप्ता कॉलोनी निवासी बुजुर्ग की कोई संतान नहीं थी। वह प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थे। वह घर में अपने भतीजों के साथ रह रहे थे। चंद्रलोक कॉलोनी स्थित वृद्ध आश्रम के केयरटेकर ने बताया कि राधेश्याम को घर में भोजन भी नहीं मिल रहा था। ऐसे में पड़ोसियों के शिकायत करने पर राधेश्याम को वृद्ध आश्रम लाया गया। केयरटेकर ने बताया कि राधेश्याम का भतीजा बड़ी कंपनी में कार्यरत है।
केस तीन
जमींदार को बेटों ने घर से निकाला
खतौली निवासी बुजुर्ग को उसके बच्चों ने 70 साल की आयु में घर से निकाल दिया। अब वह चंद्रलोक कॉलोनी स्थित वृद्ध आश्रम में रह रहे हैं। केयरटेकर ने बताया कि वृद्ध का दोष सिर्फ इतना था कि जायदाद के बंटवारे में एक बेटे को लगता है कि उसे कम दिया और दूसरे को लगता है उसे उसका पूरा हिस्सा नहीं मिला। छह महीने से वह वृद्ध आश्रम में रह रहे हैं।
केस चार : बेटे निकाल लेते थे पेंशन, भोजन तक नहीं देते थे
एमईएस से सेवानिवृत्त अधिकारी 90 वर्षीय बुजुर्ग गंगानगर स्थित आश्रम में रह रहे हैं। वृद्ध आश्रम से मिली जानकारी के अनुसार उनके बेटे बुजुर्ग की सारी पेंशन निकाल लेते थे और बुजुर्ग को भोजन भी नहीं दे रहे थे। बेटी और दामाद ने पिता की हालत को देखते हुए उन्हें वृद्ध आश्रम में पहुंचाया। बेटी अब पिता के विभिन्न खर्चों का ध्यान रख रही है।