मेरठ के व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्र में बेशकीमती जमीन पर कब्जा, सरकारी भूमि पर बना है यह नामी शोरूम
- बेगमपुल रोड पर वाह होंडा और तान्या सहित नजूल भूमि में कई अन्य निर्माण
- जेरे एहतमाम साहब बहादुर कलक्टर के नाम है खसरा नंबर 377, 379 में बने निर्माण की जमीन
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बावजूद अवैध कब्जेदार अपने रसूख के कारण पूरे मामले पर पर्दा डालने में कामयाब हो रहे हैं। अब नया मामला बेगमपुल रोड पर स्थित तान्या ऑटोमोबाइल और वाह होंडा शो रूम सहित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सामने आया है। ये सभी निर्माण सरकारी जमीन में हुए हैं।
राजस्व विभाग के रिकार्ड में खेवट संख्या 445 के खसरा नंबर 377 और 379 की जमीन बेगमपुल रोड पर है। खतौनी में यह जमीन ‘जेरे एहतमाम साहब बहादुर कलक्टर मेरठ’ के नाम दर्ज है। मतलब साफ है कि इस जमीन का स्वामित्व सरकार का है।
इस जमीन का क्षेत्रफल लगभग 17700 वर्ग मीटर है। प्रशासनिक लापरवाही और राजस्व विभाग से इस जमीन पर कब्जा होता गया। अब यहां पर दो बड़े ऑटोमोबाइल शोरूम के साथ ही कई बड़े निर्माण हो चुके हैं। जिनमें भवन किराए पर लेकर बैंक भी संचालित हैं।
बेशकीमती है जमीन
यह जमीन शहर की सबसे कीमती जमीन में से एक है। यहां पर सर्किल रेट लगभग एक लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है। जिसके आधार पर इस जमीन की कीमत 177 करोड़ के आसपास बैठती है। जमीन पर कई लोगों ने कब्जे कर लिये हैं।
बिना जांच के मानचित्र स्वीकृत
सरकारी जमीन पर कब्जे को कहीं न कहीं एमडीए भी बढ़ावा दे रहा है। जमीन के स्वामित्व की गहनता से जांच न कराते हुए मानचित्र स्वीकृत किये जा रहे हैं। जिससे सरकार को अरबों रुपये की क्षति पहुंचाई जा रही है।
एमडीए के पास पहुंची होटल दोआब की फाइल
कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम ने होटल दोआब के मामले में एमडीए को निर्देश दिए हैं। इस संबंध में होटल की फाइल एमडीए कार्यालय में सोमवार को पहुंच गई। जोनल अधिकारी का कहना है कि मंगलवार को फाइल देखने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, कमिश्नर ने इस मामले में एमडीए सचिव को प्र्रेषित किया है।
इसमें होटल मालिक या अपीलकर्ता के शमन आवेदन, मानचित्र के विषय में प्राधिकरण स्तर पर मिलीं कमियों के बारे में बताया जाएगा। वहीं, इसे ठीक करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। एमडीए को तीन सप्ताह में जो भी कार्रवाई करनी है उसकी रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी।
बता दें कि सितंबर 2019 में डीएम अनिल ढींगरा के निर्देश पर ज्ञानेंद्र चौधरी और सचिन चौधरी के होटल दोआब विलास पर शिकंजा कसा गया। इसका निर्माण क्लब के नक्शे पर किया गया। लेकिन इसे होटल का डिजाइन देकर कमरों का निर्माण कर लिया गया।
होटल में किए गए अवैध निर्माण पर एमडीए ने 20 अगस्त और तीन सितंबर को भी नोटिस देकर जवाब मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया था। इसके बाद होटल मालिक हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कमिश्नर कोर्ट में अपील करने के लिए कहा था।
ठंडे बस्ते में है मृत्युंजय अस्पताल की जांच
इसी जमीन के पास खसरा नंबर 373 भी सरकारी जमीन है। जिसके एक हिस्से में मृत्युंजय अस्पताल बना है। अमर उजाला ने जब इसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की तो जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी वित्त को इसकी जांच सौंपी थी। लेकिन अभी तक भी जांच पूरी नहीं हुई है। एमडीए से इस अस्पताल की पत्रावली ही गायब है।