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Meerut News: स्वाइन फ्लू का बढ़ रहा प्रकोप, अभी 21 मरीज सक्रिय
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वायरल और टाइफाइड भी कर रहे सेहत पर वार, बढ़ रही मरीजों की कतार
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बदलते मौसम का सीधा असर सेहत पर पड़ रहा है। वायरल फीवर और टाइफाइड का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। मेडिकल और जिला अस्पताल में मरीजों की दूर तक कतारें लग रही हैं। चिकित्सकों के मुताबिक हर चौथा मरीज बुखार, खांसी व टाइफाइड से पीड़ित है। वहीं स्वाइन फ्लू को लेकर भी स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट है। मेडिकल में 20 बेड का अलग से वार्ड बनाया गया है। अभी जिले में मलेरिया के 21 सक्रिय मरीज हैं।
नोडल अधिकारी डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि इन सभी में तेज बुखार के लक्षण मिले हैं। इनमें से कई मरीज बीपी, शुगर समेत अन्य बीमारियों की भी चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। इन रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत नहीं होती, जिस कारण वायरस इन्हें सामान्य मरीजों की अपेक्षा जल्दी चपेट में ले लेता है। शुगर और बीपी के मरीजों को मानसून या सर्दियों की शुरुआत में हर साल इन्फ्लुएंजा वैक्सीन (फ्लू वैक्सीन) जरूर लगवानी चाहिए। अपने ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को लगातार मॉनिटर करते रहें।
लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक मौसमी वायरल संक्रमण है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। मेडिकल व जिला अस्पताल के साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर वार्ड की व्यवस्था की गई है। टेमी फ्लू दवा भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि मेडिकल में अलग से वार्ड बनाया हुआ है।
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर एमके बंसल ने बताया कि सामान्य लक्षणों में खांसी, नाक बहना, तेज बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द शामिल हैं। सांस लेने में कठिनाई, पेरिफेरल ऑक्सीजन सैचुरेशन (एसपीओ-2) में गिरावट या भ्रम की स्थिति होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए बार-बार हाथ धोना और मास्क पहनना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने या उसके कपड़ों के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है। घर लौटने पर कपड़े बदलना भी बचाव का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बदलते मौसम का सीधा असर सेहत पर पड़ रहा है। वायरल फीवर और टाइफाइड का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। मेडिकल और जिला अस्पताल में मरीजों की दूर तक कतारें लग रही हैं। चिकित्सकों के मुताबिक हर चौथा मरीज बुखार, खांसी व टाइफाइड से पीड़ित है। वहीं स्वाइन फ्लू को लेकर भी स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट है। मेडिकल में 20 बेड का अलग से वार्ड बनाया गया है। अभी जिले में मलेरिया के 21 सक्रिय मरीज हैं।
नोडल अधिकारी डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि इन सभी में तेज बुखार के लक्षण मिले हैं। इनमें से कई मरीज बीपी, शुगर समेत अन्य बीमारियों की भी चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। इन रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत नहीं होती, जिस कारण वायरस इन्हें सामान्य मरीजों की अपेक्षा जल्दी चपेट में ले लेता है। शुगर और बीपी के मरीजों को मानसून या सर्दियों की शुरुआत में हर साल इन्फ्लुएंजा वैक्सीन (फ्लू वैक्सीन) जरूर लगवानी चाहिए। अपने ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को लगातार मॉनिटर करते रहें।
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लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक मौसमी वायरल संक्रमण है, जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। मेडिकल व जिला अस्पताल के साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर वार्ड की व्यवस्था की गई है। टेमी फ्लू दवा भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि मेडिकल में अलग से वार्ड बनाया हुआ है।
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर एमके बंसल ने बताया कि सामान्य लक्षणों में खांसी, नाक बहना, तेज बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द शामिल हैं। सांस लेने में कठिनाई, पेरिफेरल ऑक्सीजन सैचुरेशन (एसपीओ-2) में गिरावट या भ्रम की स्थिति होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए बार-बार हाथ धोना और मास्क पहनना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने या उसके कपड़ों के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है। घर लौटने पर कपड़े बदलना भी बचाव का एक महत्वपूर्ण तरीका है।