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स्वाइन फ्लू का हमला, एक मरीज में पुष्टि
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मेरठ।
स्वाइन फ्लू का हमला शुरू हो गया है। सदर क्षेत्र निवासी 62 वर्षीय बुजुुर्ग कारोबारी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। उन्हें गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह इस साल का पहला केस है।
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि वृद्ध 14 जनवरी को रुड़की गए थे। वहां बारिश में भीगने के बाद से उनकी तबियत खराब थी। 17 जनवरी को चिकित्सक ने उन्हें स्वाइन फ्लू का टेस्ट कराने की सलाह दी। 21 जनवरी को निजी लैब में उन्हें स्वाइन फ्लू निकला। इसी सैंपल को मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बृहस्पतिवार को उन्हें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। उनका उपचार चल रहा है। पहले वह गाजियाबाद के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती थे। अब उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया है। सीएमओ ने बताया कि तापमान जब 30 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है, तब स्वाइन फ्लू का वायरस ज्यादा एक्टिव होता है। इसके ऊपर तापमान पर स्वाइन फ्लू वायरस कमजोर हो जाता है। स्वाइन फ्लू का सीजन नवंबर से मार्च तक माना जाता है।
पिछले साल मिले थे 399 मरीज
पिछले साल स्वाइन फ्लू के399 मरीज मिले थे। इनमें चार की मौत हो गई थी। साल 2018 में 24 मरीज मिले थे। साल 2017 में स्वाइन फ्लू के मेरठ में 395 मरीज मिले थे। इनमें 21 लोगों की मौत हो गई थी।
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यह हैं लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना
- ठंड लगना और लगातार खांसी
- मांसपेशियों में दर्द या अकड़न
- सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान
- दवा खाने पर भी बुखार का बढ़ना
- गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
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यह बरतें सावधानी
- स्वाइन फ्लू की आशंका हो तो सरकारी संस्थान में जांच कराएं
- आराम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना
- आसपास कोई खांस रहा है तो एहतियात बरतें
- हाथों को साबुन से धोएं
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इलाज
शुरुआत में पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर, टैमी फ्लू और जानामीविर, रेलेंजा जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है, लेकिन इन दवाओं को खुद से नहीं लेना चाहिए।
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ऐसे होती है जांच
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के थ्रोट स्वेब का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। कई बार निजी लैब में एच1एन1 की पुष्टि हो जाती है। इसके बाद भी आधिकारिक पुष्टि लिए सरकारी लैब में सैंपल भेजा जाता है। स्वाइन फ्लू एनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस ए से होने वाला इंफेक्शन है। इसके इंफेक्शन ने 2009 और 2010 में महामारी का रूप ले लिया था।
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स्वाइन फ्लू का हमला शुरू हो गया है। सदर क्षेत्र निवासी 62 वर्षीय बुजुुर्ग कारोबारी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। उन्हें गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह इस साल का पहला केस है।
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि वृद्ध 14 जनवरी को रुड़की गए थे। वहां बारिश में भीगने के बाद से उनकी तबियत खराब थी। 17 जनवरी को चिकित्सक ने उन्हें स्वाइन फ्लू का टेस्ट कराने की सलाह दी। 21 जनवरी को निजी लैब में उन्हें स्वाइन फ्लू निकला। इसी सैंपल को मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बृहस्पतिवार को उन्हें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। उनका उपचार चल रहा है। पहले वह गाजियाबाद के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती थे। अब उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया है। सीएमओ ने बताया कि तापमान जब 30 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है, तब स्वाइन फ्लू का वायरस ज्यादा एक्टिव होता है। इसके ऊपर तापमान पर स्वाइन फ्लू वायरस कमजोर हो जाता है। स्वाइन फ्लू का सीजन नवंबर से मार्च तक माना जाता है।
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पिछले साल मिले थे 399 मरीज
पिछले साल स्वाइन फ्लू के399 मरीज मिले थे। इनमें चार की मौत हो गई थी। साल 2018 में 24 मरीज मिले थे। साल 2017 में स्वाइन फ्लू के मेरठ में 395 मरीज मिले थे। इनमें 21 लोगों की मौत हो गई थी।
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यह हैं लक्षण
- नाक का लगातार बहना, छींक आना
- ठंड लगना और लगातार खांसी
- मांसपेशियों में दर्द या अकड़न
- सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान
- दवा खाने पर भी बुखार का बढ़ना
- गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
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यह बरतें सावधानी
- स्वाइन फ्लू की आशंका हो तो सरकारी संस्थान में जांच कराएं
- आराम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना
- आसपास कोई खांस रहा है तो एहतियात बरतें
- हाथों को साबुन से धोएं
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इलाज
शुरुआत में पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर, टैमी फ्लू और जानामीविर, रेलेंजा जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है, लेकिन इन दवाओं को खुद से नहीं लेना चाहिए।
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ऐसे होती है जांच
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के थ्रोट स्वेब का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। कई बार निजी लैब में एच1एन1 की पुष्टि हो जाती है। इसके बाद भी आधिकारिक पुष्टि लिए सरकारी लैब में सैंपल भेजा जाता है। स्वाइन फ्लू एनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस ए से होने वाला इंफेक्शन है। इसके इंफेक्शन ने 2009 और 2010 में महामारी का रूप ले लिया था।