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मेरठ: अब नगर निगम को धोखा नहीं दे पाएंगे सफाई कर्मचारी, ड्यूटी पर पहननी होगी स्मार्ट वॉच

Wed, 19 Dec 2018 11:12 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 19 Dec 2018 11:12 AM IST
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sweepers in Meerut have to wear smart watch on duty will connect with GPS system

ड्यूटी के घंटों के दौरान अपने कार्य क्षेत्र से बाहर रहने और काम के दौरान अपने काम को छोड़कर दूसरे काम करने वाले कर्मचारी से निपटने के लिए अब नियोक्ता अपने कर्मचारियों की पल-पल की खबर रखने वाली तकनीक पर अमल कर रहे हैं। यह सुविधा जियोफेंसिंग के आने से संभव हुई है, जिस पर अब देश के कुछ नगर निगम अमल करने लगे हैं जबकि कुछ ने ऐसा करना तय कर लिया है। मेरठ और लखनऊ ने भी जियोफेंसिंग के लिए आईटीआई से समझौता किए हैं। 

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मेरठ शहर में बिना सफाई किए वेतन लेने वाले नगर निगम के कर्मचारियों की पोल अब जीपीएस से चलने वाली स्मार्ट घड़ी खोलेगी। निगम के सफाई कर्मचारियों पर बायोमेट्रिक हाजिरी के बाद अब जियोफेंसिंग तकनीक से शिकंजा कसने की योजना है। जियोफेंसिंग में सेटेलाइट की मदद से सफाई कर्मचारियों पर नजर रखी जाएगी। इससे जहां शहर की स्वच्छता में चार चांद लगेंगे, वहीं वेतन में होने वाले फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी।  
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नगर निगम में लगभग तीन हजार आउट सोर्सिंग और स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। सफाई कर्मचारियों पर काम न करने के आरोप लगते रहे हैं। इन आरोपों को धोने के लिए नगर निगम प्रशासन ने दिसंबर माह में ही बायोमेट्रिक मशीन से सफाई कर्मचारियों की हाजिरी की शुरूआत की। अभी तो कुछ वार्डों के सफाई नायक उनको भी चलाने को तैयार नहीं हैं। 

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सफाई कर्मचारियों का वार्डों में मौजूद न मिलना और स्वच्छता योजना में अपेक्षाकृत सफलता न मिलने के कारण अब भारत सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए नया तरीका ढूंढ निकाला है। बायोमेट्रिक के बाद अब हाजिरी का सत्यापन स्मार्ट घड़ी से किया जाएगा।  
 

यह होगा जरूरी
अपने वार्ड में बीट पर पहुंचने पर प्रत्येक सफाई कर्मचारी को यह घड़ी बांधनी होगी। कंप्यूटर से जुड़ी यह घड़ी सफाई कर्मी की हर गतिविधि पर नजर रखेगी। जो कर्मचारी होशियारी दिखाने के लिए घड़ी नहीं बांधेगा, उसे गैरहाजिर मान लिया जाएगा।  

स्वच्छ भारत मिशन के तहत उन्होंने भारत सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। उसी के तहत सरकार ने जियोफेंसिंग तकनीक के माध्यम से चलने वाली स्मार्ट घड़ी की व्यवस्था की है। शासन के आदेश का अनुपालन किया जाएगा। स्वच्छता अभियान में सफलता के लिए शीघ्र ही स्मार्ट घड़ियों का इंतजाम किया जाएगा। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त

जानें क्या है जियोफेंसिंग
जियोफेंसिंग उपग्रह की सहायता से किसी इलाके को चिन्हित करने की तकनीक है। ऐसा होने के बाद उससे जुड़ा उपकरण लेकर कोई व्यक्ति उस इलाके में जाएगा तो कंप्यूटर पर उसकी लोकेशन मिलती रहेगी। वह व्यक्ति बैठा है या सफाई कर रहा है, इसकी भी जानकारी मिल जाएगी। यदि वह अपने तय इलाके से बाहर निकला, तो भी उनके बॉस को इसकी जानकारी मिल जाएगी।

रेलवे ने भी अपने पटरियों की जियो फेंसिंग कराई हुई है, इससे कोई व्यक्ति यदि रेल की पटरी के 20 मीटर के दायरे में होगा तो उसे पता चल जाएगा। इसी के सहारे रेलवे ने मोबाइल एप के जरिए अनरिजर्व टिकटिंग सिस्टम शुरू किया है। इसी तकनीक का उपयोग अब नगरपालिका में होना शुरू हुआ है। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईटीआई लिमिटेड से समझौता किया गया है। 
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