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सूरज की तपिश से हो रहा 1.32 लाख का फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Jul 2018 01:12 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पीवीवीएनएल ने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना सोलर फोटो वोल्टिक पावर प्लांट (एसएफवीपीपी) को न केवल धरातल पर उतार दिया है बल्कि 1100 किलोवाट बिजली का उत्पादन भी शुरू हो गया है। इससे हर रोज विभाग को 1.32 लाख का फायदा हो रहा है। कुल 6 हजार किलोवाट क्षमता का प्लांट लगाया जाना है, जिससे विभाग हर महीने 2 करोड़ 16 लाख रुपये की बिजली उत्पादित करेगा। विभाग केवल 3 मेगावाट (3000 किलोवाट) बिजली का यूज करेगा, बाकी 3 मेगावाट बिजली उपभोक्ताओं को बेच दी जाएगी।
केंद्र सरकार ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) की तरफ कदम बढ़ा रही है। इसके लिए लोगों को प्रोत्साहित करने और प्लांट स्थापित करने की अपील के साथ अब सरकार ने अपने कार्यालयों पर भी सोलर फोटो वोल्टिक पावर प्लांट स्थापित कराने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में केंद्र सरकार की आईपीडीएस योजना के तहत पीवीवीएनएल ने कुल 6000 किलोवाट क्षमता वाले प्लांट की 1100 किलोवाट क्षमता की यूनिट ऊर्जा भवन, मुख्य अभियंता ऑफिस से लेकर पश्चिमांचल के 95 सब स्टेशनों पर स्थापित कर दी है। इन यूनिटों से प्रतिदिन 1100 किलोवाट बिजली का उत्पादन होना शुरू हो गया है।
510 बिजलीघरों की छत पर लगना है सिस्टम
कार्ययोजना के अनुसार मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद व सहारनपुर जोन के कुल 510 बिजलीघरों की छतों पर प्लांट स्थापित किया जाएगा। बिजलीघरों पर 5, 10, 15 व 20 किलोवाट साइज के प्लांट लगने हैं, जिनकी कुल क्षमता 5740 किलोवाट होगी। जबकि ऊर्जा भवन पर 75 किलोवाट का एक और चारों जोन आफिस पर 50-50 किलोवाट के प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं।
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डेढ़ साल में वसूल हो जाएगी प्लांट की लागत
कंपनी सूत्रों का दावा है कि 6 मेगावाट बिजली प्लांट से एक दिन में 1 लाख 44 हजार यूनिट बिजली बनेगी। एक साल में 5 करोड़ 25 लाख 60 हजार यूनिट बिजली मिलेगी। 5 रुपये प्रति औसत यूनिट से एक साल में करीब 26 करोड़ 28 लाख रुपये की बिजली बनाई जा सकेगी। प्लांट डेढ़ साल में अपनी पूरी कीमत अदा कर देगा। फिलहाल चालू हुए 1100 किलोवाट प्लांट से प्रतिदिन 26400 यूनिट बिजली पैदा हो रही है। जिसकी कीमत 5 रुपये प्रति यूनिट दर से 1 लाख 32 हजार रुपये प्रतिदिन और महीने में 39 लाख 60 हजार रुपये बैठती है।
ये हैं योजना
जोन बिजलीघर सोलर प्लांट क्षमता
मेरठ 91 1025 किलोवाट
गाजियाबाद 236 2660 किलोवाट
मुरादाबाद 108 1210 किलोवाट
सहारनपुर 75 845 किलोवाट
एमडी आफिस 75 किलोवाट
4 जोन आफिस 200 किलोवाट
कुल 510 6015 किलोवाट
(नोट: इसमें 95 बिजली घरों पर यूनिट लग चुकी हैं)
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केंद्र सरकार ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) की तरफ कदम बढ़ा रही है। इसके लिए लोगों को प्रोत्साहित करने और प्लांट स्थापित करने की अपील के साथ अब सरकार ने अपने कार्यालयों पर भी सोलर फोटो वोल्टिक पावर प्लांट स्थापित कराने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में केंद्र सरकार की आईपीडीएस योजना के तहत पीवीवीएनएल ने कुल 6000 किलोवाट क्षमता वाले प्लांट की 1100 किलोवाट क्षमता की यूनिट ऊर्जा भवन, मुख्य अभियंता ऑफिस से लेकर पश्चिमांचल के 95 सब स्टेशनों पर स्थापित कर दी है। इन यूनिटों से प्रतिदिन 1100 किलोवाट बिजली का उत्पादन होना शुरू हो गया है।
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510 बिजलीघरों की छत पर लगना है सिस्टम
कार्ययोजना के अनुसार मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद व सहारनपुर जोन के कुल 510 बिजलीघरों की छतों पर प्लांट स्थापित किया जाएगा। बिजलीघरों पर 5, 10, 15 व 20 किलोवाट साइज के प्लांट लगने हैं, जिनकी कुल क्षमता 5740 किलोवाट होगी। जबकि ऊर्जा भवन पर 75 किलोवाट का एक और चारों जोन आफिस पर 50-50 किलोवाट के प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं।
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डेढ़ साल में वसूल हो जाएगी प्लांट की लागत
कंपनी सूत्रों का दावा है कि 6 मेगावाट बिजली प्लांट से एक दिन में 1 लाख 44 हजार यूनिट बिजली बनेगी। एक साल में 5 करोड़ 25 लाख 60 हजार यूनिट बिजली मिलेगी। 5 रुपये प्रति औसत यूनिट से एक साल में करीब 26 करोड़ 28 लाख रुपये की बिजली बनाई जा सकेगी। प्लांट डेढ़ साल में अपनी पूरी कीमत अदा कर देगा। फिलहाल चालू हुए 1100 किलोवाट प्लांट से प्रतिदिन 26400 यूनिट बिजली पैदा हो रही है। जिसकी कीमत 5 रुपये प्रति यूनिट दर से 1 लाख 32 हजार रुपये प्रतिदिन और महीने में 39 लाख 60 हजार रुपये बैठती है।
ये हैं योजना
जोन बिजलीघर सोलर प्लांट क्षमता
मेरठ 91 1025 किलोवाट
गाजियाबाद 236 2660 किलोवाट
मुरादाबाद 108 1210 किलोवाट
सहारनपुर 75 845 किलोवाट
एमडी आफिस 75 किलोवाट
4 जोन आफिस 200 किलोवाट
कुल 510 6015 किलोवाट
(नोट: इसमें 95 बिजली घरों पर यूनिट लग चुकी हैं)