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सेंट्रल मार्केट मामला: सुप्रीम कोर्ट से झटका, 44 सील भवन ध्वस्त कराने के आदेश, धरनारत महिलाओं के छलके आंसू

Tue, 14 Jul 2026 02:59 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 14 Jul 2026 02:59 PM IST
सार

मेरठ के सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 44 सील भवनों को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। भवन स्वामियों को 15 दिन में स्वयं ध्वस्तीकरण करने का समय दिया गया है। अवैध निर्माण और सेटबैक के मामले में अदालत ने कोई राहत नहीं दी।

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Supreme Court Orders Demolition of 44 Sealed Buildings in Meerut Central Market, No Relief for Traders
सेंट्रल मार्केट में महिलाओं के छलके आंसू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय से व्यापारियों और भवन स्वामियों को कोई राहत नहीं मिली। न्यायालय ने आवासीय भवनों में बने 44 सील व्यावसायिक परिसरों को ध्वस्त करने के आदेश बरकरार रखते हुए भवन स्वामियों को 15 दिन के भीतर स्वयं ध्वस्तीकरण करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अवैध निर्माण को किसी भी स्थिति में वैध नहीं ठहराया जा सकता और न ही उसे नियमित करने की अनुमति दी जाएगी। फैसले के बाद बाजार में मायूसी छा गई और कई महिलाओं व व्यापारियों की आंखें नम हो गईं।

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15 दिन में खुद हटाने होंगे अवैध निर्माण
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आवासीय भवनों में पूर्ण रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले 44 सील भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। अदालत ने भवन स्वामियों को 15 दिन का समय देते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि में स्वयं ध्वस्तीकरण नहीं किया गया तो आवास एवं विकास परिषद कार्रवाई करेगी और उसका पूरा खर्च संबंधित आवंटियों से वसूला जाएगा।

अवैध निर्माण पर अदालत का सख्त संदेश
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। ऐसे निर्माण को नियमित करने अथवा उन्हें किसी भी प्रकार की छूट देने का कोई आधार नहीं है। पीठ ने परिषद द्वारा प्रस्तुत 1468 अवैध निर्माणों की सूची पर भी संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया कि सभी अवैध निर्माणों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई की जाए। 

सेटबैक पर भी नहीं मिली राहत
अल्प और दुर्बल आय वर्ग के मकानों के संबंध में राहत देने की मांग भी अदालत ने स्वीकार नहीं की। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे भूखंडों पर बने मकानों में यदि निर्धारित निर्माण सीमा छोड़ी गई तो कई मकान पूरी तरह प्रभावित हो जाएंगे। फैसले की जानकारी मिलते ही सेक्टर-दो में सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे महिलाओं और व्यापारियों की आंखें भर आईं।

नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक केंद्रों पर भी सख्ती
सुनवाई के दौरान सील किए गए नर्सिंग होम और जांच केंद्रों की ओर से राहत की मांग की गई। इस पर अदालत ने कहा कि आवासीय भवनों में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने परिषद को सभी अनधिकृत अस्पतालों और जांच केंद्रों के खिलाफ समान कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल संचालकों को आवश्यक मशीनें निकालने के लिए परिषद के समक्ष आवेदन देने को कहा।

बाजार में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
फैसले के बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। व्यापारी नेताओं के अनुसार मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी, जिसमें परिषद न्यायालय के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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