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वेस्ट यूपी समेत उत्तराखंड के कुछ क्षेत्र में पोखा-बोंगा बीमारी का प्रकोप
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sat, 05 Aug 2017 12:00 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वेस्ट यूपी में पोखा-बोंग बीमारी के कारण गन्ने की फसल की बढ़वार रुक गई है। उत्तराखंड के भी कुछ जिलों में इस बीमारी का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इसका असर गन्ने के उत्पादन पर भी दिखाई देगा। गन्ने की बढ़ोत्तरी न होने से किसान चिंतित हैं। इस बीमारी का पता मोदीपुरम के भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संसाधन के वैज्ञानिकों की टीम ने सर्वेक्षण में किया।
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पोखा-बोंग गन्ने की एक कवक जनित बीमारी है। इसमें गन्ने की पत्तियों के ऊपरी भाग में पीलापन, सिकुड़न और बाद में सड़न होने के कारण ऊपर का हिस्सा मर जाता है। पौधे की बढ़वार यहीं से रुक जाती है। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रभानु के नेतृत्व में टीम ने उत्तराखंड और वेस्ट यूपी के दर्जनों जनपद के गांवों का दौरा किया। जहां गन्ने की फसल इस बीमारी से जकड़ी मिली। डॉ. चंद्रभानु के अनुसार गन्ने की फसल में कहीं पर 25 से 30 तो कुछ गांवों में नुकसान का आंकलन 50 प्रतिशत तक पहुंच रहा है, जो सबसे अधिक है। गन्ने की 0238 प्रजाति में इस बीमारी का अधिक प्रकोप देखने को मिला है।
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इस तरह करें बीमारी की जांच
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रभानु ने बताया कि यह बीमारी फ्ुजेरियम मोनीलीफज्ञर्मी नामक कवक से फैलती है। अप्रैल-मई में इस बीमारी के लक्षण दिखने शुरू होते हैं। पत्तियों के ऊपरी 2-3 के आधारीय भाग में पीलापन, पत्तियों में सिकुड़न, सबसे ऊपरी पत्ती का प्याज की पत्ती की तरह से गोल रहकर और बाद में सूखकर सड़ जाना, ऊपरी कई पत्तियों में चाकू से कटने जैसे कई तरह के मिश्रित लक्षण पाये जाते है।
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वेस्ट यूपी के इन जनपदों में है अधिक प्रभाव
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, बुलंदशहर, अलीगढ़ शाहजहांपुर, समेत अन्य जिले भी शामिल है। इसके अलावा उत्तराखंड क्षेत्र के हरिद्वार और अन्य क्षेत्र में भी इस बीमारी का प्रकोप देखा गया है। इस बीमारी से बचने के लिए किसान वैज्ञानिकों की सलाह ले ओर अपनी फसल को बचाए।