यूपी: सरकारी जमीन पर बोई गई गन्ने की फसल की होगी नीलामी, प्रशासन लेगा कब्जा
- प्रशासन ने गन्ना विभाग से क्राप कटिंग कराकर औसत पैदावार की रिपोर्ट मांगी
- 208 हेक्टेयर जमीन 165 लोगों को पट्टे पर आवंटित की गई थी
- 1999 में प्रशासन ने खारिज कर दिए इन लोगों को आवंटित पट्टे
- 197 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी गन्ने की फसल की होनी है नीलामी
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विस्तार
गांव पुरुषोत्तमपुर में गंगा खादर की 208 हेक्टेअर जमीन है। इस जमीन पर 165 लोगों ने पट्टे करा लिए थे। 1999 में ये पट्टे खारिज कर दिए गए। इस जमीन में गन्ने की फसल की बुआई कर रखी है। 40 से 50 हेक्टेअर जमीन पर पट्टे धारकों ने स्टे ले लिया है। पट्टेदारों के साथ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू लखनऊ में मुकदमा चल रहा है।
197 हेक्टेअर जमीन में खड़ी फसल की नीलामी होनी है। इसमे 39 बीघा जमीन में खड़ी फसल की 17 नवंबर को नीलामी हो चुकी है। अब दो दिसंबर को बाकी जमीन में खड़ी फसल की नीलामी होगी। तहसीलदार प्रीति सिंह ने बताया कि तहसील कार्यालय में यह नीलामी कराई जाएगी। जिस जमीन पर स्टे है उसकी फसल की नीलामी नहीं की जाएगी।
हजारों बीघा जमीन पर है अवैध कब्जा
जिले में गंगा खादर और अन्य जगह पर सिंचाई, राजस्व, वन विभाग की हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जा है। इस पर गन्ने की फसल बोई गई है। गन्ने की फसल बाद में चीनी मिलों को किसी न किसी जुगाड़ से बेच दी जाती है।
अवैध जमीन में खड़े गन्ने की आपूर्ति चीनी मिलों को होने से बाकी किसानों को समय पर गन्ना पर्ची नहीं मिल पाती हैं। किसान गन्ना पर्ची के लिए परेशान रहते हैं। गन्ना विभाग पहले ही भूमिहीन किसानों के अवैध सट्टे को बंद करा चुका है। अब सरकारी जमीन पर गन्ना बोने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जब फसल बोई गई तब कहां सोया था प्रशासन
फसल बोने से लेकर तैयार होने तक किसी ने इस जमीन की सुध नहीं ली, अब इसे नीलाम कर कब्जा लेने की तैयारी की जा रही है। 1999 में पट्टे समाप्त होने के बाद प्रशासन अब तक कहां सोया रहा। क्यों नहीं पहले कब्जा लिया गया। इससे कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
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