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बिजनौर: गन्ने का रकबा बढ़ा, मिलों ने नहीं बढ़ाई मांग, पैदावार अच्छी होने से किसानों को हो सकती है परेशानी
Tue, 11 Aug 2020 08:24 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 11 Aug 2020 08:24 PM IST
सार
- - गन्ना रकबा बढ़ने और पैदावार अच्छी होने से किसानों को हो सकती है परेशानी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
आने वाला गन्ना पेराई सत्र किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। किसानों ने गन्ने के रकबे में 11.56 प्रतिशत वृद्धि कर दी है। साथ ही गन्ने की फसल भी खेतों में अच्छी खड़ी है। लेकिन चीनी की घटी कीमतों को देखते हुए चीनी मिल गन्ने की मांग ज्यादा नहीं कर रहे हैं।
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हालांकि पिछले साल के पेराई सत्र की मांग के मुकाबले गन्ना मांग में वृद्धि की गई है, लेकिन यह पिछले साल की गई पेराई के बराबर भी नहीं है। गन्ने के रकबे में हो चुकी वृद्धि और पैदावार में संभावित वृद्धि को देखते हुए अगले पेराई सत्र में भी किसानों के लिए गन्ना पर्ची कम पड़ना तय है।
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गन्ने पर किसानों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। किसान हर साल गन्ना रकबा में बढ़ोतरी कर रहे हैं तो अच्छी प्रजाति और मेहनत की वजह से पैदावार भी लगातार बढ़ रही है। इस साल कोरोना संक्रमण को हराने के लिए लगाए गए लॉक डाउन में किसानों ने गन्ना रकबे में और ज्यादा वृद्धि कर ली।
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गन्ना रकबा किसानों ने 11.56 प्रतिशत बढ़ा दिया। जिस बिलाई चीनी मिल से गन्ना भुगतान इस साल में पूरा होने की कोई आस नहीं दिखती है, उसके क्षेत्र के किसानों ने भी रकबे में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर ली। पेराई शुरू करने से पहले चीनी मिल प्रशासन गन्ने की मांग के बारे में गन्ना विभाग को पत्र लिखता है।
मिलों ने इस बार भी अपनी खपत के अनुसार मांग विभाग को भेज दी है। पिछले साल के मुकाबले मांग में वृद्धि की गई है, लेकिन यह उतनी नहीं है कि गन्ना रकबे में वृद्धि को पूरा कर सके। किसानों ने पिछले सीजन में गन्ना पर्ची कम पड़ने के बाद भी रकबे में ज्यादा वृद्धि करके मांग और आपूर्ति के सिद्धांत को ही बिगाड़ दिया है।
चीनी मिल 2019-20 में मांग पेेराई 2020-21 में मांग पिछले साल रकबा इस साल रकबा
बिजनौर 54.20 40.36 63 7701 7781
धामपुर 223.84 231.63 252 45179 48608
स्योहारा 199.55 214.50 198 28898 38323
नजीबाबाद 53.82 51.66 51.06 16491 16295
बुुंदकी 117.72 128.10 110.86 26492 29838
चांदपुर 64.86 64.65 81 14785 15211
बिलाई 148.99 146.47 134.42 23965 28602
बरकातपुर 123.72 141.36 126 26810 28715
बहादरपुर 112.67 119.47 106.46 27636 29029
योग 1099.37 1138.20 1122.80 221753 247389
नोट : गन्ने की मांग और पेराई लाख क्विंटल में है। आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। रकबे में धनौरा मिल का भी थोड़ा रकबा शामिल है।
अन्य फसलों को भी बोएं किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा का कहना है कि गन्ने के बिकने की गारंटी होती है इसलिए किसानों का रुझान गन्ने पर ही है। फिर भी किसानों को दूसरी फसलों की ओर रुख करना चाहिए। लघु व सीमांत वर्ग से ऊपर के किसानों को कम से कम कुछ जमीन में अपने खाने के लिए ही सब्जी, दाल बोनी चाहिए।
चीनी मिल 2019-20 में मांग पेेराई 2020-21 में मांग पिछले साल रकबा इस साल रकबा
बिजनौर 54.20 40.36 63 7701 7781
धामपुर 223.84 231.63 252 45179 48608
स्योहारा 199.55 214.50 198 28898 38323
नजीबाबाद 53.82 51.66 51.06 16491 16295
बुुंदकी 117.72 128.10 110.86 26492 29838
चांदपुर 64.86 64.65 81 14785 15211
बिलाई 148.99 146.47 134.42 23965 28602
बरकातपुर 123.72 141.36 126 26810 28715
बहादरपुर 112.67 119.47 106.46 27636 29029
योग 1099.37 1138.20 1122.80 221753 247389
नोट : गन्ने की मांग और पेराई लाख क्विंटल में है। आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। रकबे में धनौरा मिल का भी थोड़ा रकबा शामिल है।
अन्य फसलों को भी बोएं किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा का कहना है कि गन्ने के बिकने की गारंटी होती है इसलिए किसानों का रुझान गन्ने पर ही है। फिर भी किसानों को दूसरी फसलों की ओर रुख करना चाहिए। लघु व सीमांत वर्ग से ऊपर के किसानों को कम से कम कुछ जमीन में अपने खाने के लिए ही सब्जी, दाल बोनी चाहिए।