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सुभाष चंद्र बोस जयंती : नेताजी से जुड़ी ये बातें शायद नहीं जानते होंगे आप

Tue, 23 Jan 2018 02:48 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मनु चौधरी, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मनु चौधरी, मेरठ Updated Tue, 23 Jan 2018 02:48 PM IST
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Subhash Chandra Bose Jubilee: you may not know these things related to Netaji
नेताजी सुभाष चंद्र बोस

वह अविस्मरणीय पल आज भी कुछ लोगों के जेहन और दस्तावेजों में ताजा हैं जब पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रांतिधरा मेरठ आए थे। उन्होंने टाउन हाल में हजारों लोगों को संबोधित कर उनमें क्रांति की चिंगारी पैदा कर दी थी। नेताजी की यादें आज भी यहां की फिजाओं में हैं। शहर का प्रमुख स्मारक घंटाघर द्वार नेताजी के नाम पर है। वहीं चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर प्रेक्षागृह भी है। 

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आजादी की लड़ाई उस समय जोरों पर थी। हर कोई उसमें शिरकत करने को बेताब था। आजादी के उस दौर को याद करते हुए धर्म दिवाकर बताते हैं कि वर्ष 1939 में गांधी जी से मतभेद होने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी पार्टी से अलग होने लगे। जैसे ही पता चला कि नेताजी मेरठ आ रहे हैं तो पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गईं। सुभाष चंद्र बोस के लिए खंदक बाजार से एक रईस व्यक्ति की बग्गी मांगी गई। बग्घी को पूरी तरह से सजाया गया। रेलवे स्टेशन पर उनका पूरे जोश से स्वागत कर उन्हें बग्गी से लाया गया। 
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गूंज रहे थे देशभक्ति के नारे
हजारों की भीड़ नेताजी के पीछे थी। देश भक्ति के नारे गूंज रहे थे। उस समय पंडित प्यारेलाल शर्मा के अलावा कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता साथ थे। शांति त्यागी ने एक बैठक में सभी का परिचय कराया। इसके बाद एक जनसभा की तैयारी की गई। इसमें नेताजी का संबोधन होना था। भाषण के लिए घंटाघर स्थित टाउन हाल चुना गया। जब नेताजी ने भाषण दिया तो पूरा हाल देशभक्ति के नारों से गूंजता रहा। इसमें मेरठ कालेज के सैकड़ों छात्र भी शामिल हुए। टाउन हाल के बाद नेताजी जीआईसी भी गये थे। बेगमबाग के मैदान में भी उन्होंने मीटिंग की। कचहरी पुल के पास आरएफ ब्रदर्स रेस्टोरेंट में खाना खाया। उसके बाद नेताजी ने पंडित प्यारेलाल शर्मा के यहां रात्रि विश्राम और भोजन किया।
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उनकी फौज के सदस्य बने थे पहले सांसद

Subhash Chandra Bose Jubilee: you may not know these things related to Netaji
घंटाघर - फोटो : अमर उजाला

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया था। उनकी फौज में कैप्टन शाहनवाज खान भी थे। देश के बंटवारे के दौरान वह पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गये। उसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और मेरठ के पहले सांसद बनने का गौरव प्राप्त किया।

टिकट का लिया जाता था ज्यादा पैसा
इतिहासकार प्रो. विघ्नेश त्यागी बताते हैं कि उस समय अप्सरा सिनेमा के मैनेजर देवेंद्र जैन एक टिकट का चार आना ज्यादा लेते थे। वहां से पैसे जोड़कर नेताजी के कार्यक्रम की तैयारी की जाती थी। प्रशासन को पता था कि सिनेमा मैनेजर ज्यादा पैसे लेते हैं, पर प्रशासन में कोई भी कुछ नहीं कहता था।

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