{"_id":"6892012a94bc2062b50ae157","slug":"subharti-university-students-are-teaching-yoga-in-south-korea-meerut-news-c-72-1-mrt1063-138207-2025-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुभारती विवि के छात्र दक्षिण कोरिया में सिखा रहे योग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुभारती विवि के छात्र दक्षिण कोरिया में सिखा रहे योग
विज्ञापन
सुभारती विश्वविद्यालय द्वारा दक्षिण कोरिया में सिखाया जा रहा है योग
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सुभारती विश्वविद्यालय के महर्षि अरबिंदो सुभारती कॉलेज एवं हॉस्पिटल ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज के बीएनवाईएस और एमडी पाठ्यक्रमों के छात्र वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा परंपरा का परचम लहरा रहे हैं। इन छात्रों ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित डेगू हनी विश्वविद्यालय में छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत योग प्रशिक्षण देना शुरू किया है।
इस पहल से कोरियाई पारंपरिक चिकित्सा और भारतीय पद्धतियों के बीच ज्ञान का गहरा आदान-प्रदान भी हो रहा है। कॉलेज के डीन डॉ. अभय शंकरगौड़ा ने बताया कि यह छात्र विनिमय कार्यक्रम महज एक शैक्षणिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि दो समृद्ध चिकित्सा परंपराओं का मिलन है।
उन्होंने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक मंच पर कॅरिअर बनाने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यह पद्धति विश्वभर में वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में तेजी से स्वीकार की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। सुभारती विश्वविद्यालय के महर्षि अरबिंदो सुभारती कॉलेज एवं हॉस्पिटल ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज के बीएनवाईएस और एमडी पाठ्यक्रमों के छात्र वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा परंपरा का परचम लहरा रहे हैं। इन छात्रों ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित डेगू हनी विश्वविद्यालय में छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत योग प्रशिक्षण देना शुरू किया है।
इस पहल से कोरियाई पारंपरिक चिकित्सा और भारतीय पद्धतियों के बीच ज्ञान का गहरा आदान-प्रदान भी हो रहा है। कॉलेज के डीन डॉ. अभय शंकरगौड़ा ने बताया कि यह छात्र विनिमय कार्यक्रम महज एक शैक्षणिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि दो समृद्ध चिकित्सा परंपराओं का मिलन है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक मंच पर कॅरिअर बनाने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यह पद्धति विश्वभर में वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में तेजी से स्वीकार की जा रही है।
विज्ञापन