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सीसीएसयू में अब हस्तिनापुर सेंक्चुअरी का भूगोल पढ़ेंगे छात्र,  बीए भूगोल के सिलेबस पर बोर्ड ऑफ स्ट्डीज में लगी मुहर   

Mon, 07 Jun 2021 09:24 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 07 Jun 2021 09:24 PM IST
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Students will now study Geography of Hastinapur Sanctuary in CCSU
गंगा नदी में डॉल्फिन मछली - फोटो : अमर उजाला

गंगा में डॉल्फिन कितनी दूर तक तैरती है। कछुओं का संरक्षण किस तरह से हो रहा है। तेेंदुओं की संख्या क्यों बढ़ रही है। बारसिंघा का कुनबे को सेंक्चुअरी को इतनी क्यों भाती है। हजारों किलोमीटर दूूर से विदेशी परिंदे यहां किस वजह से आते हैं। सेंक्चुअरी के इस भूगोल को यूजी के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा। हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी बनने के 33 साल बाद इसे सीसीएसयू के सिलेबस में शामिल किया गया है। सोमवार को इस पर मुहर लग गई। 

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बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक में प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए भूगोल के सिलेबस में कुछ ही बदलाव किए गए हैं। 70 फीसदी सिलेबस सभी विवि में समान रहना है, ऐसे में 30 फीसदी में ही बदलाव किया जा रहा है। कन्वीनर डॉ. अनीता मलिक ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से सीसीएसयू के परिक्षेत्र में हस्तिनापुर सेंक्चुअरी अहम है। ऐसे में इसे केस स्ट्डी के रूप में रखा गया है।
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सिलेबस में हस्तिनापुर सेंक्चुअरी के क्षेत्रफल से लेकर यहां की भौगोलिक स्थिति को रखा गया है। यहां रहने वाले जीव-जंतुओं और बाहर से आने वाले विदेशी पक्षियों के बारे में भी पढ़ने को मिलेगा। गंगा के कारण यहां का भौगोलिक क्षेत्र दूसरी सेंक्चुअरी से किस तरह से भिन्न है, इस पर भी छात्र-छात्राएं अध्ययन कर सकेंगे।
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इसके अलावा सेमेस्टर के कई पेपरों में बदलाव करने को लेकर समिति अपने विचार विषय विशेषज्ञों को भेज रही है। डॉ. अनीता मलिक ने बताया कि बीए के अलावा बीकॉम और बीएससी के छात्र-छात्राएं भी तीसरे विषय के रूप में भूगोल को ले सकेंगे।

33 साल में भी नहीं हुआ नोटिफिकेशन 
दुनियाभर में वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर हर कोई आवाज उठा रहा है, लेकिन हस्तिनापुर सेंक्चुअरी बनने के 33 साल बाद भी इसका क्षेत्र तय नहीं हो पाया है। 1986 में गंगा नदी के दोनों तटों पर अवस्थित खादर मैदानों एवं खोला पहाड़ियों को मिलाकर 2073 वर्ग किमी क्षेत्रफल को हस्तिनापुर वन्य जीव विहार के रूप में संरक्षित करने का निर्णय लिया गया था। धारा 18 ए के तहत वन विभाग ने सेंक्चुअरी के अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी किया, लेकिन 33 सालों में फाइनल नोटिफिकेशन नहीं किया गया।

हस्तिनापुर अभयारण्य  में मेरठ के साथ बिजनौर और अमरोहा जिले की सीमा लगती है। सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण अभयारण्य क्षेत्र का विकास नहीं हुआ। वन विभाग भी विकास एवं औद्योगिक गतिविधियों को रोकने में सख्ती नहीं कर पाता है। इन्हीं कारणों से बारहसिंघा समेत विभिन्न प्रजाति के हिरण और तेेंदुए खतरे में हैं।

वन विभाग और वाइल्ड लाइफ की तरफ से बारहसिंघा को लेकर सेंक्चुअरी में सर्वे कराया गया था। इस सर्वे के मुताबिक बारहसिंघा का रहवास गंगा किनारे के अलावा उन इलाकों में भी मिला, जहां पर पास में आबादी है। ऐसे में समस्या यह है कि किस तरह से क्षेत्र को संरक्षित किया जाए। वहीं, जहां अभी तक प्रदेश सरकार सेंक्चुअरी का क्षेत्र तय नहीं कर पाई है, ऐसे में सीसीएसयू के सिलेबस में सेंक्चुअरी को जगह मिलने से कम से कम यहां के छात्र-छात्राओं को इसके बारे में जानने का मौका जरूर मिलेगा। 

हस्तिनापुर सेंक्चुअरी में ये हैं वन्य जीव-जंतु 
तेंदुआ     छह
चीतल     74
बारहसिंघा     13
नीलगाय     715
सियार     337
वन गाय     29
जंगली बिल्ली     66
बिज्जू     48
सेही     129
गोह     59
गंगा में कछुए - 5000 के करीब 
गंगा में डॉल्फिन - 41 
पक्षियों की प्रजाति - 120 से अधिक 
विदेशी पक्षी - 20 से ज्यादा प्रजाति आती हैं हर साल

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