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जिद्दी जेट्रोफा किसी भी बदलाव को तैयार नहीं, एक क्लिक में पढ़ें

Thu, 03 May 2018 11:59 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, विजय नारायण सिंह, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, विजय नारायण सिंह, मेरठ Updated Thu, 03 May 2018 11:59 AM IST
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Stubborn Jatropha does not make any changes, read in one click
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय कृषि मंत्रालय अब राज्य सरकारों की मदद से इस पर विभिन्न संस्थानों के जरिए शोध को आगे बढ़ाने में लगा है। साथ ही यह कारण भी खोजा जा रहा है कि जेट्रोफा के अंदर ऐसा क्या है जो सभी तकनीकों के प्रति प्रतिरोध की क्षमता रखता है...

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डीजल का विकल्प जेट्रोफा (रतनजोत) इतना जिद्दी है कि वह अपने अंदर किसी भी तरह के बदलाव की इजाजत नहीं दे रहा है। पिछले करीब दो दशकों से उसकी उत्पादकता बढ़ाने के कृषि विज्ञानियों के सभी प्रयास नाकाम रहे हैं। भारत सरकार ने जेट्रोफा मिशन को 2015 में बंद कर दिया, लेकिन विज्ञानी भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। वह आज भी इसकी उत्पादकता बढ़ाने की हर कोशिश में जुटे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय अब राज्य सरकारों की मदद से विभिन्न संस्थानों के जरिए शोध को आगे बढ़ाने में लगा है। 
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उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 1997 में जेट्रोफा मिशन की शुरूआत की थी। इसके लिए नेशनल वेजिटेबल ऑयल सीड बोर्ड का गठन किया गया। सन 2000 तक इसमें देश के चुनिंदा 85 संस्थानों को शामिल किया गया था। जिसमें आईआईटी दिल्ली, चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद, सीएर्सआईआर, आईसीएआर, सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रौद्योगिकी एवं कृषि विश्वविद्यालय मेरठ, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को शामिल किया गया। सरकार ने इसकी खेती करने के इच्छुक किसानों को 99 साल की लीज पर जमीन और सब्सिडी मुहैया कराई। गुजरात, मणिपुर, मिजोरम, मध्य प्रदेश में इस मिशन को विशेष प्रोत्साहन दिया गया। बाद में शिकायतें मिलीं कि किसान जमीन का उपयोग अन्य कार्यों के लिए कर रहे हैं। कृषि मंत्रालय भारत सरकार में नेशनल वेजिटेबल ऑयल बोर्ड डिवीजन के निदेशक प्रोफेसर आरएस कुरील ने बताया कि जेट्रोफा उपयोगी वनस्पति है। देश इस वैकल्पिक डीजल के उपयोग से आत्मनिर्भर हो सकता है।

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उत्पादकता बढ़ाने के यह प्रयास हुए विफल

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फाइल फोटो

- प्लांट ब्रीडिंग के जरिए नई प्रजाति पैदा नहीं की जा सकी।
- जीन में बदलाव के प्रयास भी किए गए
- एग्रोनोमिकल प्रयास कारगर नहीं रहे।
- बायो तकनीक से प्लांट ब्रीडिंग की कोशिश नाकाम
- पैथोलॉजिकल प्रयास भी सफल नहीं रहे।
- मृदा विज्ञानी भी नाकाम रहे।
- हाइड्रोफोनिक्स जैव तकनीक भी कारगर नहीं रही।
- ग्राफ्टिंग की कोशिशें भी नाकाम रहीं। 
इसकी व्यावसायिक खेती उन इलाकों के लिए बेहद लाभकारी होगी, जहां की जमीन बंजर और उपजाऊ नहीं हैं। इसकी खेती से रोजगार भी मिलता है। 

जेट्रोफा मिशन 
विज्ञानी भी हार मानने को तैयार नहीं, शोध जारी
30 प्रतिशत तेल निकलता है प्रति ग्राम बीज से
05 साल की उम्र से देने लगता है बीज
325 लोगों को मिलता है रोजगार प्रति हेक्टेयर

बंजर भूमि के लिए उपयोगी : डॉ. सेंगर

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डॉ. सेंगर और प्रोफेसर आरएस कुरील का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रौद्योगिकी एवं कृषि विवि के प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आरएस सेंगर ने बताया कि यह बंजर और अनउपजाऊ भूमि के लिए बहुत ही उपयोगी है। जिस जमीन पर कोई खेती नहीं होती। वहां इसका विकास किया जा सकता। हालांकि इसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए लगातार 10 साल तक शोध किया गया, लेकिन इसके सार्थक परिणाम सामने नहीं आए। जैव तकनीक से लेकर ग्राफ्टिंग तक की सभी तकनीक अपनाई गई, लेकिन बात नहीं बनी। उन्होंने बताया कि पूरे देश से जेट्रोफा की लगभग सभी प्रजातियों के जर्म प्लाज्मा एकत्रित किए गए थे, लेकिन अशानुरूप सफलता नहीं मिली। 

शोध जारी, परिणाम सार्थक होंगे : कुरील
कृषि मंत्रालय भारत सरकार में नेशनल वेजिटेबल ऑयल बोर्ड डिवीजन के निदेशक प्रोफेसर आरएस कुरील ने कहा कि बिना तकनीकी विकास के प्रोजेक्ट को लॉच किया गया था, इसलिए इसके उचित परिणाम सामने नहीं आए। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्याल में प्लांट ब्रीडिंग के जरिए जेट्रोफा की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सराहनीय काम किया जा रहा है। अब कृषि मंत्रालय शोध के लिए सीधे राज्य सरकारों को मदद कर रहा है। कृषि विज्ञानी लगातार इस पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इसके सार्थक परिणआम सामने आएंगे। प्रो. कुरील आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद और बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय इँदौर के वाइस चांसलर भी रह चुके हैं। 

शोध जारी रखने की जरूरत: प्रो. गया प्रसाद
सरदार बल्लभ भाई पटेल प्रौद्योगिकी एवं कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गया प्रसाद ने कहा कि विज्ञानियों को इस पर लगातार शोध जारी रखना चाहिए। जेट्रोफा से उत्पादित बायोडीजल बेहद कारगर विकल्प हो सकता है। शोध की सफलता से देश डीजल के मामले सक्षम हो सकता है।

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