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यूपी: कुर्सी के लिए सियासी सरगर्मियां तेज, मंत्री बनने को पश्चिम के विधायकों में जोर आजमाइश 

Sun, 18 Aug 2019 03:14 PM IST
Dimple Sirohi अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 18 Aug 2019 03:14 PM IST
सार

  • मेरठ से 4 विधायक हैं दावेदारी में, किसी एक की खुल सकती है लॉटरी
  • 52 विधायक हैं भाजपा के 71 विधानसभा सीटों पर 
  • 3 मंडलों के 14 जिले आते हैं पश्चिम क्षेत्र में
  • 7 मंत्री हैं वर्तमान में पश्चिम से यूपी मंत्रिमंडल में

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Struggle among western legislators to become a minister
सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार में बदलाव के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद शुरू हो चुकी है। इसे लेकर दिल्ली और लखनऊ में पिछले दो दिनों से लगातार मंथन चल रहा है।यूपी कैबिनेट का सोमवार को विस्तार होने की खबरों के बीच पश्चिमी क्षेत्र के विधायकों में जोर आजमाइश चरम पर है। चर्चा है कि जहां पश्चिम से 44 में से केवल एक विधायक की ही लॉटरी लग सकती है तो वहीं मेरठ को फिर से मायूसी हाथ लग सकती है।  

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भाजपा के संगठनात्मक दृष्टिकोण से यूपी के पश्चिमी क्षेत्र में तीन मंडलाें के 14 जिले आते हैं। 71 विधानसभा सीटों पर भाजपा के 52 विधायक हैं, इनमें सात मंत्री हैं। यूपी सरकार के मंत्रिमंडल में इस समय पश्चिम क्षेत्र से आठ मंत्री चेतन चौहान, बलदेव सिंह ओलख, गुलाबो देवी, भूपेंद्र चौधरी, अतुल गर्ग, धर्म सिंह सैनी और सुरेश राणा हैं।

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पिछले दिनों लोकसभा चुनाव के बाद रीता बहुगुणा जोशी और एसपी सिंह बघेल यूपी मंत्रिमंडल में शामिल थे, जो अब सांसद निर्वाचित होकर लोकसभा में पहुंच चुके हैं। जबकि स्वतंत्र देव सिंह अब संगठन में प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए हैं। 

ऐसे में इन तीनों मंत्रियों के विभागों पर नई तैनाती के साथ कुछ अन्य विभागों में भी मंत्रिमंडल को विस्तार देना है। इसके तहत जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन को कायम रखना संगठन की प्राथमिकता है। मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद में कुछ के कद जहां बढ़ेंगे और घटेंगे तो कुछ विधायकों और एमएलसी को मंत्रिमंडल में जगह दी जानी है। 

चर्चाओं में सियासी समीकरण
शुक्रवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल की मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर आला नेताओं से चर्चा हुई।

इसके बाद शनिवार को भी चर्चा रही कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली से लौटकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करने के साथ ही शाम को एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री संगठन के साथ बैठक की। दो दिन से चल रहे सियासी समीकरणों के बीच मंत्रिमंडल विस्तार में संभावितों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 

पश्चिम में कहां क्या समीकरण
वेस्ट यूपी ही नहीं पूरे मंत्रिमंडल में यदि जातिगत संतुलन को देखें तो एक भी गुर्जर विधायक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है। जबकि एक एमएलसी अशोक कटारिया सहित पांच गुर्जर विधायक भाजपा से हैं। ऐसे में पार्टी के मूल कैडर बेस के आधार पर एमएलसी अशोक कटारिया और दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के बीच खींचतान मानी जा रही है।

वहीं, पूर्व मंत्री और बुलंदशहर सीट से विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही का नाम भी चर्चा में है। क्योंकि एमएलसी और पंचायत राज मंत्री भूपेंद्र सिंह मुरादाबाद से हैं और पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में उनके मुरादाबाद मंडल में एक भी सीट पर भाजपा को जीत हासिल नहीं हुई।

ऐसे में चर्चा है कि उन्हें मंत्रिमंडल से मुक्त कर वीरेंद्र सिंह को शामिल किया जा सकता है और भूपेंद्र सिंह को फिर से संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसे में चर्चा है कि पश्चिम क्षेत्र से मंत्रिमंडल विस्तार में सिर्फ एक नाम और बढ़ सकता है। 

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