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ग्राम पंचायत चुनाव: प्रधानी चुनाव को लेकर तनातनी, पुलिस बनी तमाशबीन
Sun, 06 Dec 2020 11:44 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2020 11:44 AM IST
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nala nirman
- फोटो : amar ujala
प्रधानी चुनाव को लेकर मेरठ देहात में खून खराबा हो रहा है। सरधना से पहले पिठलोकर गांव में और अब समसपुर सुरानी गांव में खूनी संघर्ष हो गया। कई गांवों में प्रधानी चुनाव को लेकर तनातनी चल रही है। जिसमें पुलिस तमाशबीन बनी हुई है।
छोटे-छोटे मामलों को लेकर देहात में फायरिंग, पथराव हो जाते है। कई मामलों में लोगों की जान भी चली गई। इसके बावजूद भी पुलिस नहीं जाग रही। खासतौर पर सरधना इलाके के कई गांवों में प्रधानी चुनाव को लेकर खूनी संघर्ष चल रहे हैं।
जानकारी होने के बावजूद भी पुलिस इसकी रोकथाम के प्रयास नहीं कर पा रही है। कुछ दिन पहले ही पिठलोकर गांव में भी नाली निर्माण को लेकर प्रधान पक्ष और पूर्व प्रधान पक्ष में विवाद हुआ था।
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राजनीति हस्तक्षेप के चलते पुलिस ने उक्त मामले में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जिसका नतीजा है कि समसपुर सुरारी गांव में प्रधान और पूर्व प्रधान पक्ष में खूनी संघर्ष हुआ। सूत्रों की मानें तो सरधना के करीब एक दर्जन गांव में प्रधानी चुनाव को लेकर तनातनी चल रही है।
सरधना सर्किल के भदौड़ा और रोहटा गांव समेत एक दर्जन से अधिक गांव में 20 से ज्यादा लोगों की हत्या हो चुकी है। प्रधानी चुनाव में खूनी संघर्ष में राजनीति हस्तक्षेप भी हावी है। जिसके चलते पुलिस आरोपियों पर भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। ब्यूरो
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छोटे-छोटे मामलों को लेकर देहात में फायरिंग, पथराव हो जाते है। कई मामलों में लोगों की जान भी चली गई। इसके बावजूद भी पुलिस नहीं जाग रही। खासतौर पर सरधना इलाके के कई गांवों में प्रधानी चुनाव को लेकर खूनी संघर्ष चल रहे हैं।
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जानकारी होने के बावजूद भी पुलिस इसकी रोकथाम के प्रयास नहीं कर पा रही है। कुछ दिन पहले ही पिठलोकर गांव में भी नाली निर्माण को लेकर प्रधान पक्ष और पूर्व प्रधान पक्ष में विवाद हुआ था।
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राजनीति हस्तक्षेप के चलते पुलिस ने उक्त मामले में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जिसका नतीजा है कि समसपुर सुरारी गांव में प्रधान और पूर्व प्रधान पक्ष में खूनी संघर्ष हुआ। सूत्रों की मानें तो सरधना के करीब एक दर्जन गांव में प्रधानी चुनाव को लेकर तनातनी चल रही है।
सरधना सर्किल के भदौड़ा और रोहटा गांव समेत एक दर्जन से अधिक गांव में 20 से ज्यादा लोगों की हत्या हो चुकी है। प्रधानी चुनाव में खूनी संघर्ष में राजनीति हस्तक्षेप भी हावी है। जिसके चलते पुलिस आरोपियों पर भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। ब्यूरो