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काली नदी से जुडे़े 26 नालों पर बनेंगे ‘एसटीपी’

Sat, 01 Jul 2017 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 01 Jul 2017 02:47 AM IST
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'STP' will be built on 26 drains connected to the Black River
गंगा नदी का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 
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गंगा को बचाने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना के तहत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने का आदेश जारी किया है। इसके लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम को प्रस्ताव पर काम करने को कहा है। ये बड़े नाले मुजफ्फरनगर से कानपुर देहात के बीच काली नदी में सीधे गिरते हैं। बाद में काली नदी गंगा में मिल जाती है। इससे गंगा प्रदूषित हो रही है। एसटीपी के लिए सात जनपदों के 26 बड़े नालों को चिन्हित किया गया है। 
पिछले कई दशकों से प्रदूषित काली नदी के माध्यम से प्रदूषण गंगा तक पहुंच रहा है। इससे गंगा के भी हालात खराब है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी में भी लगातार सुनवाई चल रही है। हाल ही में एनजीटी ने उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम को नालों पर एसटीपी लगाने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के अनुसार शहरों से निकल रहे बड़े नाले, घरेलू अपशिष्ट, और फैक्ट्रियों से निकल रहे रंगीन पानी बिना ट्रीटमेंट के काली नदी में पहुंच रहा है। काली नदी जिन जनपदों से निकल रही है, वहां के नालों के माध्यम से गंदगी सीधे गंगा नदी तक पहुंच रही है।  
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ये नाले किए गए चिह्नित
मुजफ्फरनगर- शुगर फैक्ट्री नाला प्रथम 
मेरठ- आबू नाला प्रथम, आबू नाला द्वितीय, ओडियन
हापुड- छोईया, हापुड सिटी ड्रेन, हापुड सिटी ड्रेन टू 
गजियाबाद- कादराबाद ड्रेन
बुलंदशहर- गुलावटी ड्रेन, चील घाट, चंदनवाडी रोड नाला, धमेला रोड नाला, देवीपुरा रोड नाला, फैसलाबबनाला, कसाई बाड़ा नाला, आदिल नगर नाला, नहसर घाट नाला, मम्मन रोड नाला, चामुंडा मंदिर नाला, शनिवदेव मंदिर नाला आदि। 
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अलीगढ़- नीमनाला, कासगंज नाला 
कन्नौज- पटटा नाला, अडंगा नाला, टमी नाला शामिल हैं। 

अंतवाड़ा से शुरू होती है काली नदी
काली नदी मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली ब्लाक स्थित अंतवाड़ा गांव से शुरू होती है। मेरठ, हापुड, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ से होते हुए कन्नौज और इसके बाद कानपुर देहात में गंगा में जाकर मिलती है। काली नदी का पानी कई दशक पहले साफ था। इसे पीने के लिए भी उपयोग किया जाता था। लेकिन फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन उत्प्रवाह ने काली को काला कर दिया। दिन प्रतिदिन प्रदूषण बढ़ता चला गया। 


क्या है एनजीटी के निर्देश 
* काली नदी में जाने वाला प्रदूषण रोका जाए 
* काली नदी में गिरने वाले सभी नालों की गंभीरता से मॉनीटरिंग की जाए। 
* पहले बड़े नालों पर देखा जाए कि कहां-कहां एसटीपी लगाए जाने हैं। 
* जिन नालों पर एसटीपी लगे हैं, उनकी क्षमता को बढ़ाया जाए। 
* टीम संयुक्त रूप से नालों पर जाकर प्रदूषण को स्थिति की जांच करे। 
वर्जन 
काली नदी में गिर रहे नालों पर एसटीपी लगाने के लिए एनजीटी ने निर्देश दिए हैं। काली नदी कानपुर में जाकर गंगा में मिल जाती है। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए कवायद की जा रही है। इसके लिए जल निगम को काम करने के लिए कहा गया है। एनजीटी और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जो भी निर्देश होगा, उसके अनुसार काम किया जाएगा। फिलहाल 26 नालों को एसटीपी के लिए चिह्नित किया जा रहा है। 
अतुलेश यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
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