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Meerut News: बलिदानी इंस्पेक्टर के घर दिन भर गूंजे जांबाजी के किस्से

Sat, 25 Jan 2025 01:38 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2025 01:38 AM IST
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Stories of bravery echoed throughout the day in the house of the  inspector.
अन्य संस्करणों के ध्यानार्थ....
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बेटे ने बिजनौर बैराज पर कीं अस्थियां विसर्जित
राज्यमंत्री, पूर्व सांसद, सपा जिलाध्यक्ष सांत्वना देने पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
गंगानगर। एसटीएफ के बलिदानी इंस्पेक्टर सुनील कुमार के मसूरी गांव स्थित घर पर शुक्रवार को दिनभर उनकी जांबाजी के किस्से गूंजते रहे। इससे पहले सुबह बेटे मंजीत ने बिजनौर बैराज पर पिता की अस्थी विसर्जित कीं। घर पर हवन किया गया। देर रात तक उनके घर सांत्वना देने के लिए नेताओं व अन्य लोगों का तांता लगा रहा।
इंचौली के मसूरी स्थित आवास पर राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर सांत्वना देने पहुंचे। उन्होंने परिवार से बात की और हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने सुनील कुमार के बलिदान पर गर्व जताया। इसके बाद पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी परिवार के बीच पहुंचे। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद बड़े भाई अनिल व परिवार के अन्य सदस्यों से बात की। दोपहर में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। उन्होंने बेटे मंजीत काकरान को कठिन समय में हिम्मत से काम लेने की बात कही। उनके साथ हस्तिनापुर के पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि भी मौजूद थे।
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रालोद से मानवेंद्र वर्मा, भाजपा रजपुरा मंडल अध्यक्ष मोनू कुनकुरा, पूर्व अध्यक्ष मोहित मलिक, प्रमोद कुमार सहित रजपुरा, इंचौली, सलापुर, फिटकरी, तोफापुर आदि गांवों से भी लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
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गांव के पहले व्यक्ति जिन्हें राजकीय सम्मान मिला
सांत्वना देने पहुंचे एक ग्रामीण ने बताया कि मसूरी गांव में पहला मौका है जब किसी को राजकीय सम्मान के साथ श्मशान तक लाया गया है। पूरा गांव व आसपास के ग्रामीण उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। बुजुर्ग ग्रामीण भी गर्व से कह रहे थे कि हमारा बेटा सुनील शहीद हुआ है।

सुनील कब आएगा, बेटे को बुला दो
बुजुर्ग मां अतरकली देवी आंगन में बैठी महिलाओं से बार-बार कह रहीं थी सुनील कब आएगा। घर की महिलाएं उन्हें समझा रहीं थी। वहीं, दूसरी ओर पिता के दुख में डूबे मंजीत से आने वाले लोग मिलते तो वह रोने लगते। लोग उसे गले से लगाकर हिम्मत देते और कहते बेटे अब तुम्हें पिता की शहादत पर गर्व होना चाहिए।

ग्रामीणों की मदद करते थे
ग्रामीणों के मुताबिक अगर गांव का कोई व्यक्ति उन्हें फोन करके बताता कि सह मसूरी गांव का है और यह काम करवा दो। तो वह हरसंभव मदद करते थे। गांव के लोगों के लिए उनके मन में विशेष लगाव व सम्मान है।


अभी तो बहुत काम करना है
घर पर लोगों के बीच चर्चा रही कि कुछ समय पूर्व पत्नी मुनेश देवी ने सुनील से कहा था कि अब आपकी उम्र बढ़ रही है। इस मेहनत और खतरे वाले काम को छोड़कर कोई दूसरी ड्यूटी कर लो। जिस पर उन्होंने कहा था कि अब तो मुझे बहुत काम करना है। वे कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी थे। गांव में भी वह अपने साथियों के साथ खूब कबड्डी खेलते थे। पुलिस में भर्ती होने के बाद भी वह काफी समय तक बटालियन की टीम में कबड्डी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करते थे।
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