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जीवन को संयमित बनाता है अध्यात्म : मैत्रेयी
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जीवन को संयमित बनाता है अध्यात्म : मैत्रेयी
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित अध्यात्मिकता एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर संगोष्ठी का दूसरा दिन रहा। यहां वक्ता सिगमा सतीश ने कहा कि भूमंडलीकरण ने विभिन्न भौतिक सुविधाएं प्रदान की हैं वहीं, दूसरी असमानता, अन्याय, अपराध और आतंकवाद सरीखी कई समस्याओं को भी जन्म दिया है।
डॉ. रमेश मदान ने धर्म, समाज एवं विज्ञान को एक साथ जोड़कर देखने की बात कही। इसके लिए इंटेग्रेटेड शोध पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति समाज की आत्मा है और शरीर के समन्वित रूप का नाम ही आध्यात्मिकता है। सूफी संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. बबली परवीन ने कहा कि आध्यात्मिकता किसी भी धर्म की आत्मा होती है तथा ईश्वर तक की यात्रा का मार्ग होती है। कवि डॉ. अशोक मैत्रेयी ने कहा कि अध्यात्म आत्मा से परमात्मा के मिलन का माध्यम है। यह मानव के जीवन में संयम लाकर मानसिक सुदृढ़ता प्रदान करता है। डॉ. पूजा गुप्ता ने कहा कि धर्म आपस में लड़ने के लिए नहीं है बल्कि मानवता के हित के कार्य करने हेतु है। यह अध्यात्म से ही संभव है।
इनका रहा योगदान
मंच संचालन आकांक्षा भटनागर व कोमल खट्टर ने किया। कार्यक्रम संयोजिका डॉ. ज्योति गौड़, डॉ. निषमा सिंह, डॉ. श्वेता मलिक, डॉ. विदुषी यादव, शालू नेहरा, डॉ. महिमा राणा, आकांक्षा भटनागर, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. यशपाल, डॉ. सीमा नाज, पल्लवी त्यागी, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. नीलिमा आदि मौजूद रहे।
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मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित अध्यात्मिकता एवं मानसिक स्वास्थ्य विषय पर संगोष्ठी का दूसरा दिन रहा। यहां वक्ता सिगमा सतीश ने कहा कि भूमंडलीकरण ने विभिन्न भौतिक सुविधाएं प्रदान की हैं वहीं, दूसरी असमानता, अन्याय, अपराध और आतंकवाद सरीखी कई समस्याओं को भी जन्म दिया है।
डॉ. रमेश मदान ने धर्म, समाज एवं विज्ञान को एक साथ जोड़कर देखने की बात कही। इसके लिए इंटेग्रेटेड शोध पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति समाज की आत्मा है और शरीर के समन्वित रूप का नाम ही आध्यात्मिकता है। सूफी संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. बबली परवीन ने कहा कि आध्यात्मिकता किसी भी धर्म की आत्मा होती है तथा ईश्वर तक की यात्रा का मार्ग होती है। कवि डॉ. अशोक मैत्रेयी ने कहा कि अध्यात्म आत्मा से परमात्मा के मिलन का माध्यम है। यह मानव के जीवन में संयम लाकर मानसिक सुदृढ़ता प्रदान करता है। डॉ. पूजा गुप्ता ने कहा कि धर्म आपस में लड़ने के लिए नहीं है बल्कि मानवता के हित के कार्य करने हेतु है। यह अध्यात्म से ही संभव है।
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इनका रहा योगदान
मंच संचालन आकांक्षा भटनागर व कोमल खट्टर ने किया। कार्यक्रम संयोजिका डॉ. ज्योति गौड़, डॉ. निषमा सिंह, डॉ. श्वेता मलिक, डॉ. विदुषी यादव, शालू नेहरा, डॉ. महिमा राणा, आकांक्षा भटनागर, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. यशपाल, डॉ. सीमा नाज, पल्लवी त्यागी, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. नीलिमा आदि मौजूद रहे।
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