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कार्तिक पूर्णिमा की रात विशेष पूजा
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कार्तिक पूर्णिमा की रात विशेष पूजा
हस्तिनापुर। प्राचीन पांडव टीले पर स्थित जयंती माता मंदिर में मौजूद पंडित मुकेश शांडिल्य ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा की रात को जयंती माता मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। जिसमें दूरदराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक असुर का अंत किया था। वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिवशंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूइया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिवजी भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है।
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हस्तिनापुर। प्राचीन पांडव टीले पर स्थित जयंती माता मंदिर में मौजूद पंडित मुकेश शांडिल्य ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा की रात को जयंती माता मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। जिसमें दूरदराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक असुर का अंत किया था। वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिवशंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूइया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिवजी भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है।
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