रेडिएशन के दंश से खत्म हो रहा गौरैया का वंश, विशेषज्ञों ने दी ये राय
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मेरठ में मोबाइल टॉवर से निकलने वाला घातक इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन (ईएमएस) गौरैया के जीवन को संकट में डाल रहा है। ईएमएस गौरैया की नाजुक कोशिकाएं प्रभावित करने के साथ उनके डीएनए को विकृत कर रहा है। इससे गौरैया के वंश पर रुकावट लगने लगी है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार रेडिएशन से नन्हीं चिड़िया पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इससे उनकी प्रजनन क्षमता के अंडों की परिपक्वता प्रभावित हो रही है। आमतौर पर गौरैया दो से तीन अंडे देती है। प्रकृति के नियमानुसार जो पक्षी कम अंडे देते हैं उनका सर्वाइवल रेट 100 प्रतिशत होता है। लेकिन गौरैया के अंडों का सक्सेस रेट अब 80 से 90 फीसदी गिर गया है। जन्म के बाद अंडा पूर्ण विकसित नहीं हो रहा। रेडिएशन की वजह से समय से पूर्व ही अंडा फूटकर खराब हो रहा है। इसलिए गौरैया की नई पीढ़ी का विकास थम गया है।
रेडिएशन से गाढ़ा हो रहा रक्त
अलीगढ़ मुस्लिम विवि में वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डॉ. हफीफु ल्लाह कहते हैं पक्षियों की आदतों में परिवर्तन नजर आने लगा है। रेडिएशन के कारण गौरैया सहित अन्य नन्हीं चिड़ियों का खून गाढ़ा होने लगा है। जो आने वाले सालों में गौरैया के रूप को परिवर्तित करने के लिए काफी है। गौरैया की कोशिकाओं में कैंसर कारक सेल्स पनपनी शुरू हो गई हैं। हालांकि शोध के अभाव में पक्षियों में कैंसर के प्रतिशत व रेडिएशन के असर का आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं।
टावर पर बैठी गौरैया पूर्ण सुरक्षित
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. हफीफुल्लाह के अनुसार मोबाइल टावर से निकलने वाला रेडिएशन चिड़िया के लिए घातक है। लेकिन जो चिड़िया मोबाइल टावर पर बैठती है वो पूरी तरह सुरक्षित है। मोबाइल टावर के मध्य और पीछे के भाग में रेडिएशन का बहाव शून्य होता है। मोबाइल टावर पर अच्छी संख्या में चिड़ियों को बैठे देखा होगा। उस स्थान पर रेडिएशन न होने के कारण पक्षी वहां बैठते हैं। मोबाइल टावर में 90 डिग्री पर रेडिएशन का अधिक असर होता है। इसी दिशा में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन चलता है, इसलिए टावर के पीछे या बीच में बैठने वाले पक्षी सुरक्षित हैं।
एनएएस कॉलेज में गौरैया संरक्षकों का सम्मान
एनएएस डिग्री कॉलेज के सांख्यिकी विभाग में आज विश्व गौरैया दिवस पर गौरैया संरक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। शहर में एनएएस डिग्री कॉलेज, फेज वन पल्लवपुरम, आबूलेन, कंपनी बाग, सूरजकुंड पार्क और शास्त्रीनगर के इलाके में काफी पाई जाती हैं।
कोशिकाओं, खून में घुल रहा रेडिएशन
गौरैया सहित अन्य छोटे पक्षियों पर रेडिएशन का दुष्प्रभाव हो रहा है। देश में गौरैया व पक्षियों की गणना और इनके सर्वाइवल पर शोध का खासा अभाव है। इसलिए आंकड़ों में गौरैया कितनी हैं, कहना मुश्किल है। लेकिन ईएमएस का बड़ा असर गौरैया की कोशिकाओं व रक्त को प्रभावित कर रहा है। इसका असर उसके डीएनए पर हो रहा है। प्रो. हफीफुल्लाह खान, वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ, प्रवक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विवि
नहीं मिल रहे रुचिकर कीट
गौरेया के रुचिकर भोजन नन्हें कीड़ों (लिमेटोर) व अनाज का अभाव हो रहा है, इसलिए गौरेया एकांतवास में जा रही है। खेतों की जुताई के वक्त काफी संख्या में गौरेया मिलती हैं। डॉ. आर.एस.सेंगर प्रोफेसर एवं एचओडी जैव प्रौद्योगिकी विभाग कृषि विवि मोदीपुरम
बैठक हो रही खत्म
गौरेया भूमि से कीटों को खा लेती है इसलिए खेती में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। ग्रंथों व इतिहास में भी गौरेया का महत्व बताया जाता रहा है। घौंसलों की कमी नहीं हैं लेकिन उसकी बैठक, ठिकाने नष्ट हो रही हैं। रजत भार्गव पक्षी विशेषज्ञ
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