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Meerut News: जिला पंचायत के चुनाव से है शाहिद मंजूर-अतुल की अदावत
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जिला पंचायत के चुनाव से है शाहिद मंजूर-अतुल की अदावत
महापौर चुनाव में अनदेखी से खफा हैं रफीक अंसारी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पूर्व कैबिनेट मंत्री और किठौर विधायक शाहिद मंजूर और अतुल प्रधान की अदावत काफी पुरानी है। 2016 में हुए जिला पंचायत के चुनाव से यह अदावत शुरू हुई थी। इसमें अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं। दरअसल, शाहिद मंजूर अपने बेटे नवाजिश मंजूर को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहते थे। इसी को लेकर खींचतान हुई थी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस दौरान एक बार शाहिद मंजूर पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा के साकेत स्थित आवास पर रणनीति बनाने के गए तो वहां अतुल प्रधान के समर्थकों ने पथराव कर दिया। गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और काफी हंगामा किया। बाद में नवाजिश मंजूर चुनाव नहीं लड़े और सीमा प्रधान अध्यक्ष का चुनाव लड़ीं और जीतीं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कहने पर नवाजिश ने सीमा को वोट भी किया। लेकिन कलह काफी बढ़ गई। इसके बाद सीमा प्रधान के खिलाफ भाजपा अविश्वास प्रस्ताव ले आई और जिला पंचायत अध्यक्ष के उप चुनाव हुए, जिसमें मुखिया गुर्जर के बेटे कुलविंदर जीते। इसमें शाहिद मंजूर, सपना हुड्डा चुनाव लड़ा रहे थे, लेकिन सपाई दावा करते हैं कि अतुल प्रधान ने सीमा और एक अन्य वोट भाजपा के कुलविंदर को गुर्जर होने की वजह से दिलवाया, सपना हुड्डा को वोट नहीं कराया।
हालांकि अब दावा किया जा रहा है कि अतुल प्रधान और शाहिद मंजूर के आपस में गिले शिकवे दूर कर लिए हैं। अतुल, शाहिद के घर जाकर उनसे मिले और पुरानी बातें भूलने को कहा। वहीं, रफीक अंसारी इस बात से नाराज हैं कि पिछले महापौर चुनाव में प्रचार के दौरान अतुल प्रधान ने उनको नहीं पूछा। न नामांकन में और न ही अपने किसी रोड शो में। सपाई कहते हैं कि इसी का नतीजा रहा कि सपा तीसरे नंबर पर रही। एआईएमआईएम का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा था। हालांकि अब रफीक से भी अतुल ने लिए शिकवे दूर किए हैं, ऐसा दावा है।
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नामांकन करने वाले 5 लोगों में शामिल न होने से जिलाध्यक्ष नाराज, कलक्ट्रेट से वापस आए
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सपा में एक कलह खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है। अब सपा जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी नाराज हैं। दरअसल, उन्हें उन पांच लोगों में शामिल नहीं किया गया जो कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी की कोर्ट में नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए गए थे। इससे वह आहत हुए और नामांकन स्थल से बीच में ही चले आए।
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दरअसल कलक्ट्रेट में नामांकन करने के लिए जिलाधिकारी की कोर्ट में जाना पड़ता है। नियमानुसार प्रत्याशी समेत पांच लोग उसमें जा सकते हैं। इसमें सुनीता वर्मा के अलावा योगेश वर्मा, शहर विधायक रफीक अंसारी, शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश मंजूर, और कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अवनीश काजला अंदर गए, जिला अध्यक्ष को उसमें शामिल नहीं किया गया। वह बाहर ही रह गए। नाराज जिला अध्यक्ष विपिन चौधरी वहां से निकल आए। जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने सुनीता वर्मा का टिकट कराने के लिए पूरी मेहनत की। अब उन्हें ही नज़रंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शायद योगेश वर्मा और सुनीता वर्मा को संगठन की जरूरत नहीं है। वह अनदेखी से आहत हैं।
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महापौर चुनाव में अनदेखी से खफा हैं रफीक अंसारी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पूर्व कैबिनेट मंत्री और किठौर विधायक शाहिद मंजूर और अतुल प्रधान की अदावत काफी पुरानी है। 2016 में हुए जिला पंचायत के चुनाव से यह अदावत शुरू हुई थी। इसमें अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं। दरअसल, शाहिद मंजूर अपने बेटे नवाजिश मंजूर को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहते थे। इसी को लेकर खींचतान हुई थी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस दौरान एक बार शाहिद मंजूर पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा के साकेत स्थित आवास पर रणनीति बनाने के गए तो वहां अतुल प्रधान के समर्थकों ने पथराव कर दिया। गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और काफी हंगामा किया। बाद में नवाजिश मंजूर चुनाव नहीं लड़े और सीमा प्रधान अध्यक्ष का चुनाव लड़ीं और जीतीं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कहने पर नवाजिश ने सीमा को वोट भी किया। लेकिन कलह काफी बढ़ गई। इसके बाद सीमा प्रधान के खिलाफ भाजपा अविश्वास प्रस्ताव ले आई और जिला पंचायत अध्यक्ष के उप चुनाव हुए, जिसमें मुखिया गुर्जर के बेटे कुलविंदर जीते। इसमें शाहिद मंजूर, सपना हुड्डा चुनाव लड़ा रहे थे, लेकिन सपाई दावा करते हैं कि अतुल प्रधान ने सीमा और एक अन्य वोट भाजपा के कुलविंदर को गुर्जर होने की वजह से दिलवाया, सपना हुड्डा को वोट नहीं कराया।
हालांकि अब दावा किया जा रहा है कि अतुल प्रधान और शाहिद मंजूर के आपस में गिले शिकवे दूर कर लिए हैं। अतुल, शाहिद के घर जाकर उनसे मिले और पुरानी बातें भूलने को कहा। वहीं, रफीक अंसारी इस बात से नाराज हैं कि पिछले महापौर चुनाव में प्रचार के दौरान अतुल प्रधान ने उनको नहीं पूछा। न नामांकन में और न ही अपने किसी रोड शो में। सपाई कहते हैं कि इसी का नतीजा रहा कि सपा तीसरे नंबर पर रही। एआईएमआईएम का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा था। हालांकि अब रफीक से भी अतुल ने लिए शिकवे दूर किए हैं, ऐसा दावा है।
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नामांकन करने वाले 5 लोगों में शामिल न होने से जिलाध्यक्ष नाराज, कलक्ट्रेट से वापस आए
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सपा में एक कलह खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है। अब सपा जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी नाराज हैं। दरअसल, उन्हें उन पांच लोगों में शामिल नहीं किया गया जो कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी की कोर्ट में नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए गए थे। इससे वह आहत हुए और नामांकन स्थल से बीच में ही चले आए।
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दरअसल कलक्ट्रेट में नामांकन करने के लिए जिलाधिकारी की कोर्ट में जाना पड़ता है। नियमानुसार प्रत्याशी समेत पांच लोग उसमें जा सकते हैं। इसमें सुनीता वर्मा के अलावा योगेश वर्मा, शहर विधायक रफीक अंसारी, शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश मंजूर, और कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अवनीश काजला अंदर गए, जिला अध्यक्ष को उसमें शामिल नहीं किया गया। वह बाहर ही रह गए। नाराज जिला अध्यक्ष विपिन चौधरी वहां से निकल आए। जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने सुनीता वर्मा का टिकट कराने के लिए पूरी मेहनत की। अब उन्हें ही नज़रंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शायद योगेश वर्मा और सुनीता वर्मा को संगठन की जरूरत नहीं है। वह अनदेखी से आहत हैं।