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पश्चिमी यूपी में किसानों के मुद्दों को धार देंगे सपा-रालोद
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पश्चिमी यूपी में किसानों के मुद्दों को धार देंगे सपा-रालोद
मेरठ। सपा-रालोद गठबंधन मिशन 2022 में फतह के लिए पश्चिमी यूपी के छह मंडलों में किसानों के मुद्दों को ही धार देगा। मेरठ के दबथुवा में सात दिसंबर की संयुक्त जनसभा के बाद इसी रणनीति के तहत 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह की जयंती पर अलीगढ़ के इगलास में रैली का एलान किया गया है।
पश्चिमी यूपी के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और आगरा मंडल की सीटों पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को किसानों ने बड़ी ताकत दी थी। गन्ना और तराई बेल्ट में मिली इसी ताकत कोे 2022 में सहेजना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। तीन कृषि कानूनों से पैदा हुई नाराजगी को भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल माना जा रहा है। लखीमपुर कांड के बाद यह नाराजगी और बढ़ी है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी तीन कृषि कानूनों को लगातार मुद्दा बना रहे हैं। अब अखिलेश की जुगलबंदी के बाद इसे और मुखर ढंग से उठाने की तैयारी है। मेरठ के दबथुवा में मंगलवार को हुई संयुक्त रैली में भी अखिलेश-जयंत के भाषण के केंद्र में किसान ही रहे।
पश्चिमी यूपी में किसानों के लिए गन्ने का भुगतान, एमएसपी पर फसलों की खरीद और खेतों में छुट्टा पशुओं से हो रहे नुकसान भी बड़ा मुद्दा हैं। सपा-रालोद ने इन मुद्दों के इर्द-गिर्द ही नारे गढ़े हैं। पश्चिमी यूपी के ठेठ देसी अंदाज में रागनियां भी इन्हीं मुद्दों पर गढ़ी गई हैं। जयंत चौधरी ने यूपी में गठबंधन सरकार बनते ही किसान आंदोलन में जान गंवाने वालों की याद में स्मारक बनाने की घोषणा कर साफ कर दिया है कि किसान आंदोलन से बीजेपी के लिए उपजी नाराजगी उनके लिए अहम है।
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ध्रुवीकरण की काट में जातीय गणित
सपा-रालोद पश्चिमी यूपी में ध्रुवीकरण की काट में जातीय गणित बिठाने में भी जुट गए हैं। किसान आंदोलन के सहारे वह जाट मतदाताओं में फिर अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं तो मुस्लिम और दलित पर भी नजर है। वर्ष 2009 में भाजपा के साथ गठबंधन के बाद मुस्लिम रालोद से छिटक गया था। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट मतदाताओं का रुझान भी भाजपा की तरफ हो गया, पर किसान आंदोलन से पश्चिमी यूपी में रालोद को राजनीतिक लाभ मिला है।
अलीगढ़ की रैली दबथुवा से भी बड़ी होगी
कृषि कानूनों को वापस लेने में देरी हुई। गन्ना बकाया भुगतान और एमएसपी भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सपाई लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। किसानों को जागरूक करते रहेंगे। 23 दिसंबर को इगलास (अलीगढ़) में होने वाली साझा रैली दबथुवा से भी बड़ी होगी।
नरेश उत्तम पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सपा
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किसानों के साथ ज्यादती हुई है और हो रही है। रालोद हमेशा से किसानों के साथ है और आगे भी रहेगी। किसानों के लिए संघर्ष करती रहेगी। किसानों की आवाज बनती रहेगी। अब बड़ी संख्या में लोग इगलास की रैली में जाएंगे।
त्रिलोक त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव रालोद
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मेरठ। सपा-रालोद गठबंधन मिशन 2022 में फतह के लिए पश्चिमी यूपी के छह मंडलों में किसानों के मुद्दों को ही धार देगा। मेरठ के दबथुवा में सात दिसंबर की संयुक्त जनसभा के बाद इसी रणनीति के तहत 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह की जयंती पर अलीगढ़ के इगलास में रैली का एलान किया गया है।
पश्चिमी यूपी के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और आगरा मंडल की सीटों पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को किसानों ने बड़ी ताकत दी थी। गन्ना और तराई बेल्ट में मिली इसी ताकत कोे 2022 में सहेजना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। तीन कृषि कानूनों से पैदा हुई नाराजगी को भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल माना जा रहा है। लखीमपुर कांड के बाद यह नाराजगी और बढ़ी है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी तीन कृषि कानूनों को लगातार मुद्दा बना रहे हैं। अब अखिलेश की जुगलबंदी के बाद इसे और मुखर ढंग से उठाने की तैयारी है। मेरठ के दबथुवा में मंगलवार को हुई संयुक्त रैली में भी अखिलेश-जयंत के भाषण के केंद्र में किसान ही रहे।
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पश्चिमी यूपी में किसानों के लिए गन्ने का भुगतान, एमएसपी पर फसलों की खरीद और खेतों में छुट्टा पशुओं से हो रहे नुकसान भी बड़ा मुद्दा हैं। सपा-रालोद ने इन मुद्दों के इर्द-गिर्द ही नारे गढ़े हैं। पश्चिमी यूपी के ठेठ देसी अंदाज में रागनियां भी इन्हीं मुद्दों पर गढ़ी गई हैं। जयंत चौधरी ने यूपी में गठबंधन सरकार बनते ही किसान आंदोलन में जान गंवाने वालों की याद में स्मारक बनाने की घोषणा कर साफ कर दिया है कि किसान आंदोलन से बीजेपी के लिए उपजी नाराजगी उनके लिए अहम है।
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ध्रुवीकरण की काट में जातीय गणित
सपा-रालोद पश्चिमी यूपी में ध्रुवीकरण की काट में जातीय गणित बिठाने में भी जुट गए हैं। किसान आंदोलन के सहारे वह जाट मतदाताओं में फिर अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं तो मुस्लिम और दलित पर भी नजर है। वर्ष 2009 में भाजपा के साथ गठबंधन के बाद मुस्लिम रालोद से छिटक गया था। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट मतदाताओं का रुझान भी भाजपा की तरफ हो गया, पर किसान आंदोलन से पश्चिमी यूपी में रालोद को राजनीतिक लाभ मिला है।
अलीगढ़ की रैली दबथुवा से भी बड़ी होगी
कृषि कानूनों को वापस लेने में देरी हुई। गन्ना बकाया भुगतान और एमएसपी भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सपाई लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। किसानों को जागरूक करते रहेंगे। 23 दिसंबर को इगलास (अलीगढ़) में होने वाली साझा रैली दबथुवा से भी बड़ी होगी।
नरेश उत्तम पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सपा
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किसानों के साथ ज्यादती हुई है और हो रही है। रालोद हमेशा से किसानों के साथ है और आगे भी रहेगी। किसानों के लिए संघर्ष करती रहेगी। किसानों की आवाज बनती रहेगी। अब बड़ी संख्या में लोग इगलास की रैली में जाएंगे।
त्रिलोक त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव रालोद