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Meerut News: महापौर के टिकट के लिए सपा और रालोद वाले ठोक रहे ताल
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महापौर के टिकट के लिए सपा और रालोद वाले ठोक रहे ताल
मेरठ। महापौर के टिकट के लिए सपा और रालोद दोनों की ही नेता ताल ठोक रहे हैं। हालांकि अभी तय नहीं हुआ है कि यह सीट किसके खाते में जाएगी। सपा में चुनाव लड़ने की इच्छा जताने वालों की लंबी फेहरिस्त है, कई लोग तो आवेदन भी कर चुके हैं, जिनमें विधायक अतुल प्रधान (अपनी पत्नी के लिए) और विधायक रफीक अंसारी प्रमुख हैं। वहीं, रालोद में राजकुमार सांगवान, मनीषा अहलावत, हशमत मलिक और सुनील रोहटा नाम प्रमुखता से चल रहा है।
अभी तक सपा और रालोद अपने बूते पर महापौर का चुनाव नहीं जीत सकी है। सुनीता वर्मा भी जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। इसके बाद सपा में शामिल हुई थीं। सपा से साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी और 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी हारे थे और चार पार्षद जीते थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं और चार पार्षद जीते थे। नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी। रालोद का प्रदर्शन भी ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। विधानसभा चुनाव में इस गठबंधन का प्रदर्शन अच्छा रहा था, सात में चार विधायक जीते थे, जिसके बलबूते दोनों दलों के नेता निकाय चुनाव के पुराने अनुभव भुलाकर जीत का दावा कर रहे हैं। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि आरक्षण और परिस्थितियों के हिसाब से सपा हाईकमान टिकट तय करेगी। सपा मजबूती से चुनाव मजबूती से लडे़गी। जिलाध्यक्ष मतलूब गौड़ का कहना है कि कई दावेदार हैं। हालांकि समन्वय समिति तय करेगी कि यह सीट किसके खाते में जाएगी।
सपा सारे पदों पर सिंबल से लड़ाएगी चुनाव
मेरठ। सपाई निकाय चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी निकाय चुनाव में सारे पदों पर सिंबल से चुनाव लड़ाएगी। प्रत्याशी के लिए शर्त यह होगी कि वह सपा का और समाजवादी बुलेटिन का सक्रिय सदस्य हो। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निदेशानुसार कोई भी वार्ड खाली नहीं छोड़ा जाएगा। सभी नगर निगम पार्षद, नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और वार्ड सदस्य सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे।
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कई विपक्षी दलों के नेता आप से मांग रहे टिकट
आम आदमी पार्टी से महापौर का टिकट पाने के लिए विपक्षी दलों के नेता भी संपर्क में हैं। अब तब आप के पास मुस्लिम, गुर्जर और एक जाट नेता ने आम आदमी पार्टी से महापौर का टिकट के लिए आवेदन किया है। दावेदारी से साफ हो रहा है कि आम आदमी पार्टी इस बार नगर निगम के चुनाव में दूसरे दलों का समीकरण बिगाड़ सकती है।
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में दम दिखाया है। उप्र में भी निकाय चुनाव में दमदारी के साथ चुनावी मैदान में है। आप के जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी का कहना है कि दूसरे दलों के कई बड़े नेता आम आदमी पार्टी से महापौर का टिकट मांग रहे हैं। अभी तक दो मुस्लिम, एक गुर्जर और एक जाट नेता ने पार्टी को अपना बायोडाटा भी भेज दिया है।
पत्ते खोलने से पहले सपा का रुख भांप रही है बसपा
निकाय चुनाव में निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और चेयरमैन पद प्रत्याशियों के चयन को लेकर बसपा का लखनऊ में मंथन चल रहा है। बसपा विपक्षी दल सपा का रुख भांपकर चल रही है। कारण है कि मुस्लिम समाज दोनों ही दलों से जुड़ा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों ही दल एक दूसरे के प्रत्याशियों की सूची पर नजरें लगाए हुए हैं। उधर बसपा से निगम पार्षद के टिकट की बात करें तो शहर के लगभग 50 वार्ड ऐसे हैं जहां से टिकट मांगने वालों की लंबी लाइन बताई जा रही है।
बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने मेरठ के जिलाध्यक्ष मोहित आनंद समेत सभी कोआर्डिनेटर को लखनऊ में बुलाया। बताया जा रहा है कि बसपा से महापौर, पालिका अध्यक्ष और चेयरमैन का टिकट मांगने वालों के बायोडाटा बसपा सुप्रीमो के सामने रखे गए। हाईकमान ने सभी बायोडाटा पर विचार किया है। जानकारी मिली है कि पार्टी जाट, मुस्लिम, प्रजापति के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों पर भी विचार कर सकती है। हालांकि बसपा का कोई नेता अभी पत्ते खोलने को तैयार नहीं है। एक माह से पूर्व महापौर शाहिद अखलाक के भाई राशिद अखलाक का भी नाम बसपा से महापौर का चुनाव लड़ने वालों में गिना जा रहा है। वह अलग बात है कि बसपा का कोई भी स्थानीय नेता राशिद अखलाक के नाम पर बोलने को तैयार नहीं है।
पार्षद बनने का मन बनाया तो काट दी वोट
मेरठ। कांग्रेेस नेता एवं नगर निगम पार्षद रंजन शर्मा की पत्नी ने वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने का मन बनाया तो विरोधियों ने मतदाता सूची से उनका नाम ही गायब करा दिया। इसको लेकर रंजन शर्मा ने जिला निर्वाचन कार्यालय में शिकायत की है। शर्मा का कहना है कि पत्नी सारिका इस बार ब्रह्मपुरी के एक वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं। आरोप लगाया कि विरोधियों ने उनका नाम सूची से कटवा दिया। उन्होंने जिला निर्वाचन कार्यालय में शिकायत की है।
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मेरठ। महापौर के टिकट के लिए सपा और रालोद दोनों की ही नेता ताल ठोक रहे हैं। हालांकि अभी तय नहीं हुआ है कि यह सीट किसके खाते में जाएगी। सपा में चुनाव लड़ने की इच्छा जताने वालों की लंबी फेहरिस्त है, कई लोग तो आवेदन भी कर चुके हैं, जिनमें विधायक अतुल प्रधान (अपनी पत्नी के लिए) और विधायक रफीक अंसारी प्रमुख हैं। वहीं, रालोद में राजकुमार सांगवान, मनीषा अहलावत, हशमत मलिक और सुनील रोहटा नाम प्रमुखता से चल रहा है।
अभी तक सपा और रालोद अपने बूते पर महापौर का चुनाव नहीं जीत सकी है। सुनीता वर्मा भी जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। इसके बाद सपा में शामिल हुई थीं। सपा से साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी और 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी हारे थे और चार पार्षद जीते थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं और चार पार्षद जीते थे। नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी। रालोद का प्रदर्शन भी ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। विधानसभा चुनाव में इस गठबंधन का प्रदर्शन अच्छा रहा था, सात में चार विधायक जीते थे, जिसके बलबूते दोनों दलों के नेता निकाय चुनाव के पुराने अनुभव भुलाकर जीत का दावा कर रहे हैं। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि आरक्षण और परिस्थितियों के हिसाब से सपा हाईकमान टिकट तय करेगी। सपा मजबूती से चुनाव मजबूती से लडे़गी। जिलाध्यक्ष मतलूब गौड़ का कहना है कि कई दावेदार हैं। हालांकि समन्वय समिति तय करेगी कि यह सीट किसके खाते में जाएगी।
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सपा सारे पदों पर सिंबल से लड़ाएगी चुनाव
मेरठ। सपाई निकाय चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी निकाय चुनाव में सारे पदों पर सिंबल से चुनाव लड़ाएगी। प्रत्याशी के लिए शर्त यह होगी कि वह सपा का और समाजवादी बुलेटिन का सक्रिय सदस्य हो। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निदेशानुसार कोई भी वार्ड खाली नहीं छोड़ा जाएगा। सभी नगर निगम पार्षद, नगर पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और वार्ड सदस्य सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे।
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कई विपक्षी दलों के नेता आप से मांग रहे टिकट
आम आदमी पार्टी से महापौर का टिकट पाने के लिए विपक्षी दलों के नेता भी संपर्क में हैं। अब तब आप के पास मुस्लिम, गुर्जर और एक जाट नेता ने आम आदमी पार्टी से महापौर का टिकट के लिए आवेदन किया है। दावेदारी से साफ हो रहा है कि आम आदमी पार्टी इस बार नगर निगम के चुनाव में दूसरे दलों का समीकरण बिगाड़ सकती है।
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बाद पंजाब में दम दिखाया है। उप्र में भी निकाय चुनाव में दमदारी के साथ चुनावी मैदान में है। आप के जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी का कहना है कि दूसरे दलों के कई बड़े नेता आम आदमी पार्टी से महापौर का टिकट मांग रहे हैं। अभी तक दो मुस्लिम, एक गुर्जर और एक जाट नेता ने पार्टी को अपना बायोडाटा भी भेज दिया है।
पत्ते खोलने से पहले सपा का रुख भांप रही है बसपा
निकाय चुनाव में निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और चेयरमैन पद प्रत्याशियों के चयन को लेकर बसपा का लखनऊ में मंथन चल रहा है। बसपा विपक्षी दल सपा का रुख भांपकर चल रही है। कारण है कि मुस्लिम समाज दोनों ही दलों से जुड़ा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों ही दल एक दूसरे के प्रत्याशियों की सूची पर नजरें लगाए हुए हैं। उधर बसपा से निगम पार्षद के टिकट की बात करें तो शहर के लगभग 50 वार्ड ऐसे हैं जहां से टिकट मांगने वालों की लंबी लाइन बताई जा रही है।
बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने मेरठ के जिलाध्यक्ष मोहित आनंद समेत सभी कोआर्डिनेटर को लखनऊ में बुलाया। बताया जा रहा है कि बसपा से महापौर, पालिका अध्यक्ष और चेयरमैन का टिकट मांगने वालों के बायोडाटा बसपा सुप्रीमो के सामने रखे गए। हाईकमान ने सभी बायोडाटा पर विचार किया है। जानकारी मिली है कि पार्टी जाट, मुस्लिम, प्रजापति के अलावा अन्य पिछड़ी जातियों पर भी विचार कर सकती है। हालांकि बसपा का कोई नेता अभी पत्ते खोलने को तैयार नहीं है। एक माह से पूर्व महापौर शाहिद अखलाक के भाई राशिद अखलाक का भी नाम बसपा से महापौर का चुनाव लड़ने वालों में गिना जा रहा है। वह अलग बात है कि बसपा का कोई भी स्थानीय नेता राशिद अखलाक के नाम पर बोलने को तैयार नहीं है।
पार्षद बनने का मन बनाया तो काट दी वोट
मेरठ। कांग्रेेस नेता एवं नगर निगम पार्षद रंजन शर्मा की पत्नी ने वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने का मन बनाया तो विरोधियों ने मतदाता सूची से उनका नाम ही गायब करा दिया। इसको लेकर रंजन शर्मा ने जिला निर्वाचन कार्यालय में शिकायत की है। शर्मा का कहना है कि पत्नी सारिका इस बार ब्रह्मपुरी के एक वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं। आरोप लगाया कि विरोधियों ने उनका नाम सूची से कटवा दिया। उन्होंने जिला निर्वाचन कार्यालय में शिकायत की है।