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यूपी से बिहार तक फैला है सॉल्वर गैंग का नेटवर्क, कहां से आती है आंसर शीट, विक्रम खोलेगा राज

Wed, 23 Jan 2019 01:06 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 23 Jan 2019 01:06 PM IST
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Solver gang network is sperade from UP to Bihar, Vikram from Meerut will open the secret

सॉल्वर गैंग में बागपत के अरविंद राणा का वेस्ट यूपी के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में भी नेटवर्क है। वहीं अरविंद के साथी रहे बागपत के विजय तोमर उर्फ नीटू ने भी कई राज्यों में सॉल्वर गैंग का ऐसा जाल बिछाया कि अभ्यर्थियों का उससे मिलना भी मुश्किल होता था। यूपी पुलिस में सिपाही भर्ती से लेकर केंद्रीय सेवाओं की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इस गैंग ने सेंधमारी की कोशिश की और अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली।

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ट्यूबवेल ऑपरेटर की भर्ती में भी सॉल्वर गैंग ने लिखित परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर आउट करा दिया। तीन अगस्त की परीक्षा को स्थगित करना पड़ा था। जिसके बाद फलावदा क्षेत्र के रहने वाले शिक्षक सचिन को गंगानगर से गिरफ्तार किया तो एसटीएफ सॉल्वर गैंग तक पहुंची। ट्यूबवेल ऑपरेटर की परीक्षा में इस गिरोह ने करीब 150 अभ्यर्थियों से पांच-पांच लाख रुपये तय किए थे। परीक्षा से पहले आधा पैसा ले लिया था।
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रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा में भी अभ्यर्थियों से मोटा पैसा ठगा। ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में भी अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से आंसर शीट भेजकर पैसे वसूले। दिल्ली और बिहार में एसएससी की परीक्षा में भी सॉल्वर बैठाए, जहां दिल्ली से एसटीएफ ने पांच लोगों को 20 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था।  अन्य भर्तियों में झांसा देकर यह गिरोह पैसा वसूल चुका है।

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ट्यूबवेल ऑपरेटर परीक्षा का पेपर आउट कराया
सीओ ने बताया कि विजय तोमर ने स्वीकार किया कि तीन अगस्त को हुई ट्यूबवेल ऑपरेटर परीक्षा में उसने पेपर आउट कराया गया था। इस परीक्षा में अभ्यर्थियों से पांच-पांच लाख रुपये लिए गए थे। उसने अपने साथी शिक्षक सचिन निवासी गंगानगर को एक दिन पहले ही परतापुर बाईपास पर ट्यूबवेल ऑपरेटर का पेपर दे दिया था। पेपर के बदले में सचिन ने उसे दस लाख रुपये भी दे दिए थे, लेकिन बाद में एसटीएफ ने सचिन समेत अन्य युवकों को गिरफ्तार कर लिया था। अंत में यह परीक्षा निरस्त हो गई थी।

सिविल कोर्ट की परीक्षा में भी सेंधमारी की कोशिश
विजय ने यह भी बताया कि 20 जनवरी को सिविल कोर्ट स्टाफ की परीक्षा के लिए भी सेंधमारी की कोशिश की गई, लेकिन पेपर नहीं मिला। इस परीक्षा के 20 अभ्यर्थियों से सात से दस लाख रुपये में सौदा हुआ था। पेपर आउट नहीं हुआ तो अभ्यर्थियों को आंसर शीट भेज दी थी, जिससे परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों से पैसा लिया जा सके। लेकिन ब्रह्मपुरी क्षेत्र के एस्ट्रॉन कॉलेज में नकल करते हुए मुजफ्फरनगर के विभोर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जिससे एसटीएफ को पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया।

कहां से आती है आंसर शीट, विक्रम खोलेगा राज 
एसटीएफ सीओ बृजेश सिंह का कहना है कि कस्टम अधीक्षक विजय तोमर उर्फ नीटू ने बताया कि उसके पास पेपर और आंसर शीट सोनीपत के मॉडल टाउन निवासी विक्रम भेजता था। विक्रम से विजय की दस साल से दोस्ती है।
एसटीएफ विक्रम की तलाश में लगी है, लेकिन वह घर से फरार है। पूछताछ में विजय ने यह भी बताया कि एक ही पेपर के कई-कई सेट होते थे। जो पेपर विक्रम देता था, वह उसी पेपर की उत्तर कुंजी तैयार कराते थे, लेकिन परीक्षा में किस अभ्यर्थी के पास कौन से सेट की कॉपी जाएगी, यह नहीं पता चलता था।

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