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Meerut News: खुलकर मुस्कराओ...ये जिंदगी बड़ी अनमोल

Thu, 20 Mar 2025 01:44 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Mar 2025 01:44 AM IST
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Smile openly... this life is very precious
मेरठ। हंसता हुआ नूरानी चेहरा दूसरे के चेहरे पर भी मुस्कान ला देता है, मगर तकनीक और सुविधाओं से अत्याधुनिक होते जा रहे इस दौर में यह मुस्कान ही गुम हो रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का तनाव, बदली जीवनशैली सहित कई कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे हालात में बहुत से लोग ऐसे हैं जो खुद भी मुस्कुरा रहे हैं और दूसरों के चेहरों पर भी मुस्कान ला रहे हैं। उनका यही संदेश है-खुलकर मुस्कराओ, ये जिंदगी बड़ी अनमोल है।
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दरअसल, कोरोना काल के बाद तीन साल में ही तीन गुना मानसिक रोगी बढ़ गए हैं। वर्ष 2022-23 में करीब 15 हजार मानसिक रोगी थे, जो वर्ष 2024-25 में 30 हजार तक पहुंच गए हैं। इसके चलते ही तनाव प्रबंधन और बेहतर दिनचर्या के लिए शहर में 550 स्थानों पर निशुल्क योग साधना केंद्र भी चल रहे हैं। अन्य संस्थाओं की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं।20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस है। इस मौके पर फिर से लोगों को पहली सी मुस्कान लाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। मुरझाए चेहरों पर फिर हंसी लाने के लिए विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संगठन योग और प्राणायाम पर आधारित शिविर लगा रहे हैं। शहर में पार्क, स्कूल, आर्य समाज मंदिर, महिला पार्क सहित 550 स्थानों हास्य योग कराकर मानसिक रोग और डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों के जीवन में खुशियां लाने का प्रयास किया जा रहा है। बहुत से लोगों को इसका लाभ भी मिला है।
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पतंजलि के मंडल प्रभारी विनोद चौधरी ने बताया कि उनके शहर में 300 स्थानों पर निशुल्क योग केंद्र हैं। आर्य समाज व योग साधना केंद्र की ओर से भी 200 से ज्यादा स्थानों पर निशुल्क शिविर चल रहे हैं। सूरजकुंड, गांधी बाग, महिला पार्क सहित कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, गंगानगर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार सहित क्लोज डोर कॉलोनियों में योग, मेडिटेशन की कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
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-तीन साल में मानसिक रोगियों की संख्या
वर्ष 2022-23 - 15000
वर्ष 2023-24 - 18000
वर्ष 2024-25 - 30000
(नोट: जिला अस्पताल से प्राप्त संभावित आंकड़े)
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सोशल मीडिया प्लेटफार्म भी बढ़ा रहे तनाव
- मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. एश्वर्य राज कहते हैं कि पहले कोरोना काल के हालात और अब तेजी से बदल रहे समाज में भागदौड़ भरी जिंदगी, कॅरिअर, रोजगार का तनाव, बिगड़ती जीवन शैली से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भ्रमित करने वाली सामग्री और वीडियो से भी तनाव बढ़ रहा है और पहले सी मुस्कान छिन रही है। पहले परिवार और समाज के लोग सुख-दुख बांटते थे। अब बच्चे और युवा घरों में ही मोबाइल पर रील या अपने ही कामों में व्यस्त रहते हैं। उन्हें तनाव कम करने के लिए बेहतर सहारा नहीं मिलता।
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ये कर रहे चेहरे पर मुस्कान लौटाने का प्रयास
- पुरानी मोहनपुरी निवासी बिंदू रानी ने बताया कि वह पीएचडी कर रही हैं। महिला उत्थान पार्क में 15 साल से लगातार महिलाओं को निशुल्क योग सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में निशुल्क योग सेमिनार आयोजित कर हास्य प्रयोग कराया जा रहा है। हाल ही में अमेरिका, कनाडा और आस्ट्रेलिया से आई 21 छात्राओं का निशुल्क हाइपर डिप्रेशन का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इनमें 380 महिलाएं 40 से 60 वर्ष तक की उम्र की थीं।
- हनुमानपुरी निवासी 75 वर्षीय मूर्ति माता ने बताया कि वर्ष 2005 से सूरजकुंड पार्क में निशुल्क योग सेवा दे रही हैं। योग के साथ प्राणायाम सिखाती हैं। हास्य योग की भी महत्व बताती हैं। बहुत सी महिलाओं को योग सिखाया जिसके बाद वह महिलाएं भी शहर में विभिन्न स्थानों पर योग कक्षा चला रही हैं। सूरजकुंड पार्क सुबह और शाम दोनों समय योग कक्षा संचालित की जाती है।
- जागृति विहार निवासी 55 वर्षीय पुष्पा देवी जागृति विहार सेक्टर आठ के पार्क में वर्ष 2011 से निशुल्क योग कक्षा चलाती हैं। योग के प्रति अपने जीवन को पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग योग करने पार्क में आते हैं। इन्होंने बताया कि हमारा उद्देश्य है कि स्वयं स्वस्थ रहें और दूसरों को भी स्वस्थ रखें।

- श्रद्धापुरी निवासी सोनवीर आर्य ने बताया कि कंकरखेड़ा में डिफेंस एंक्लेव, आर्य समाज श्रद्धापुरी, सरस्वती शिशु मंदिर में योग कक्षा चलाई जाती हैं। दिन की शुरुआत लोगों की हंसते हुए होती है। हंसने से सभी तरह की टेंशन खत्म हो जाती हैं। स्वास्थ्य लाभ भी होता है।
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हंसना ही जिंदगी है, मुस्कान न जाने दो : पापुलर मेरठी
- हास्य कवि पापुलर मेरठी का कहना है कि हंसना ही जिंदगी है। इसलिए चेहरे की मुस्कान न जाने दें। उन्होंने अपनी ये पंक्तियां भी पेश कीं-
हर हसीना के गमों से आशना मैं ही तो हूं
आजकल हंसाने की दवा मैं ही तो हूं
हर किसी से पूछता रहता हूं हंस हंसकर मिजाज
होशियारों की गली में बावला मैं ही तो हूं
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