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मेरठ में दूसरे दिन भी बंद रहा पशु कटान
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 21 Mar 2017 01:32 AM IST
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स्लाटर हाउस का लोगो
- फोटो : अमर उजाला
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आदित्यनाथ योगी के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से मेरठ में पशुओं का कटान बंद है। रविवार के बाद सोमवार को भी फैक्ट्रियों में पशुओं का कटान नहीं हुआ, जिससे मीट आपूर्ति बाधित रही और इस काम से जुड़े 5000 लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। मीट मार्केट में दुकानें बंद रही। कुछ ही दुकानें खुली, लेकिन वहां भी पर्याप्त मीट नहीं था।
फैक्ट्रियों से होती है शहर में मीट आपूर्ति
घोसीपुर में नगर निगम का कमेला बंद होने के बाद से महानगर में मीट आपूर्ति के लिए हापुड़ रोड स्थित फैक्ट्रियों में पशुओं का कटान हो रहा था। शहर में प्रतिदिन 250-300 पशुओं के मांस की खपत बतायी जाती है। वैसे तो दो फैक्ट्रियों में कटान चल रहा था, पर फिलहाल एक फैक्ट्री में ही कटान चालू था, जो अब लगभग बंद है। कारोबारी वहां न पशु लेकर जा रहे हैं और न मीट लेने के लिए दुकानदार आ रहे हैं।
रोजाना कटते हैं तीन-चार हजार पशु
मेरठ में पांच बड़ी फैक्ट्रियों में कटान होता है, जिनका मीट निर्यात होता है। इन सभी में तीन से चार हजार पशु रोज काटे जाते हैं। शहर की आपूर्ति से अलग यह बड़ा कारोबार है, जिससे लगभग पांच हजार लोग जुड़े हैं। इन सभी में यांत्रिक कमेले हैं। यहीं पर पैकेजिंग प्लांट भी हैं। यदि यह धंधा बंद हुआ तो 5000 लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
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अवैध रूप से चल रहे कमेले ही बंद हाेंगे। जहां वैध रूप से कटान हो रहा है, वह तो चालू रहेगा। इसके लिए तो निगम एक्ट में भी प्रावधान है, इसे कैसे बंद किया जा सकता है। यह एक वर्ग के लिए न केवल जरूरी है, बल्कि रोजगार का भी बड़ा माध्यम है। - हाजी याकूब कुरैशी, चेयरमैन अल फहीम मीटैक्स
किसी को डरने की जरूरत नहीं है। वैध रूप से चल रहा मीट कारोबार चलता रहेगा और सरकार भी इसी तरह का निर्णय लेगी। अगर कहीं अवैध कटान हो रहा है, तो उसे बंद कराया जा सकता है। लेकिन यह तो रोजगार का भी मुद्दा है। - हाजी शाहिद अखलाक, डायरेक्टर अल साकिब मीटैक्स
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फैक्ट्रियों से होती है शहर में मीट आपूर्ति
घोसीपुर में नगर निगम का कमेला बंद होने के बाद से महानगर में मीट आपूर्ति के लिए हापुड़ रोड स्थित फैक्ट्रियों में पशुओं का कटान हो रहा था। शहर में प्रतिदिन 250-300 पशुओं के मांस की खपत बतायी जाती है। वैसे तो दो फैक्ट्रियों में कटान चल रहा था, पर फिलहाल एक फैक्ट्री में ही कटान चालू था, जो अब लगभग बंद है। कारोबारी वहां न पशु लेकर जा रहे हैं और न मीट लेने के लिए दुकानदार आ रहे हैं।
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रोजाना कटते हैं तीन-चार हजार पशु
मेरठ में पांच बड़ी फैक्ट्रियों में कटान होता है, जिनका मीट निर्यात होता है। इन सभी में तीन से चार हजार पशु रोज काटे जाते हैं। शहर की आपूर्ति से अलग यह बड़ा कारोबार है, जिससे लगभग पांच हजार लोग जुड़े हैं। इन सभी में यांत्रिक कमेले हैं। यहीं पर पैकेजिंग प्लांट भी हैं। यदि यह धंधा बंद हुआ तो 5000 लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
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अवैध रूप से चल रहे कमेले ही बंद हाेंगे। जहां वैध रूप से कटान हो रहा है, वह तो चालू रहेगा। इसके लिए तो निगम एक्ट में भी प्रावधान है, इसे कैसे बंद किया जा सकता है। यह एक वर्ग के लिए न केवल जरूरी है, बल्कि रोजगार का भी बड़ा माध्यम है। - हाजी याकूब कुरैशी, चेयरमैन अल फहीम मीटैक्स
किसी को डरने की जरूरत नहीं है। वैध रूप से चल रहा मीट कारोबार चलता रहेगा और सरकार भी इसी तरह का निर्णय लेगी। अगर कहीं अवैध कटान हो रहा है, तो उसे बंद कराया जा सकता है। लेकिन यह तो रोजगार का भी मुद्दा है। - हाजी शाहिद अखलाक, डायरेक्टर अल साकिब मीटैक्स