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गंगा स्नान मेले में खोई बहन, 65 साल बाद भाई की कलाई पर बांधेगी राखी

Thu, 07 Aug 2025 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:27 AM IST
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Sister lost in Ganga Snan Mela, will tie Rakhi on brother's wrist after 65 years
बिजनौर के गांव कंभौर में अपने भाई के साथ बैठी बहन बालेश। स्रोत परिजन - फोटो : खराब मिली मिठाई व नमकीन को नहर में फिंकवाती सहायक खाद्य आयुक्त प्रियंका सिंह।
- बिजनौर के गांव कंभौर की बालेश साल 1960 में गंगा स्नान मेले में खो गई थी
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- कंभौर में बालेश से मिलने के लिए लगा रिश्तेदार और गांवों का तांता
- भाई और भतीजों, पोतों से मिलने के बाद भावुक हुई बालेश
बिजनौर। कहानी, किस्सों और फिल्मों में तो अक्सर देखते हैं कि सालों पहले खोया व्यक्ति परिवार से मिला तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन, बिजनौर में भी ऐसा ही हुआ है। जी हां, 65 साल पहले गंगा स्नान मेले में खोई कंभौर की बालेश अपने परिवार से मिली है। इतने साल बाद रक्षाबंधन पर अपने भाई जगदीश को राखी बांधेंगी।

कंभौर के गांव भगवाना सिंह की पुत्री बालेश नौ साल की उम्र में गंज गंगास्नान मेले में साल 1960 में खो गई थीं। भाई हरपाल के बेटे के मुंडन में गंगा स्नान में गए थे। परिवार के लोगों ने काफी तलाश की। लेकिन, कुछ पता नहीं चला। एक दिन अचानक फरुखाबाद के गांव सिरौली निवासी प्रशांत कंभौर पहुंचता है। इसके बाद अपनी दादी बालेश की बात उनके भाई जगदीश से कराई। दोनों ने एक-दूसरे से बात कर पुरानी याद ताजा की। बाद में प्रशांत के साथ परिवार के लोग जगदीश, सतेंद्र सिंह, नरेश सिंह, नरपाल सिंह उन्हें बुलाने के लिए सिरौली पहुंचे। परिवार के लोगों को देखकर बालेश भावुक हो गई। मंगलवार रात को वह परिवार साथ अपने गांव कंभौर पहुंची। जिसके बाद उनसे मिलने के लिए रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है।
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- गांव पखना में डाल कुमारी, लाल सिंह से मिला माता-पिता का प्यार
सतेंद्र सिंह का कहना है कि उनके दादा बताते हैं कि गंगा स्नान मेले में बैल बिदक गए। इस दौरान वह मेले में खोई गई थी। यहां से एक महिला और पुरुष खुद को उनकी मौसी-मौसा बताते हुए अपने साथ ले गए। यहां से वह फरुखाबाद पहुंचे। जहां गांव पखना में उनका पालन पोषण डाल कुमारी और लाल सिंह ने किया। बेटी की तरह प्यार दिया। इसके बाद उनकी शादी सिरौली के अमन सिंह से हुई। उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं।
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- पौत्र प्रशांत ने परिवार से ऐसे मिलाया
परिजनों का कहना है कि एक दिन बालेश की तबीयत खराब हो रही थी तो पौत्र प्रशांत उनके पैर दबा रहा था। इस दौरान उसने कोई कहानी सुनाने के लिए कहा। बालेश ने कहा कि उन्होंने सभी को अपनी बात बताई। लेकिन, किसी ने गौर नहीं किया। इसके बाद उन्हें अपने बिछड़ने की पूरी बात बताई। जिसके बाद प्रशांत गूगल मैप के जरिए बिजनौर के कंभौर पहुंचा। यहां बालेश के पिता भगवाना सिंह और उनके भाइयों जगदीश सिंह सहित अन्य का पता पूछा। गांव वालों ने प्रशांत को उनके घर पहुंचाया। इस तरह बालेश अपने परिवार से मिलीं।

- 11 भाई-बहन हैं बालेश
परिजनों का कहना है कि कंभौर निवासी भगवाना सिंह की 11 संतान थीं। जिसमें आठ बेटे और तीन बेटियां थीं। बालेश के भाई जगदीश सिंह, अतर सिंह, हरपाल सिंह, गेंदा सिंह, सोनात सिंह, यादराम सिंह, छतरपाल सिंह, ऋषिपाल सिंह एवं बहन सरमा देवी, जग्गो देवी हैं।
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