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Meerut News: गुरबाणी के अमृतरस से संगत ने किया निहाल
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गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब में कीर्तन समागम, संगत ने किया गुरबाणी का श्रवण
बीर खालसा दल ने सजाया समागम, सेवादारों को सिरोपा देकर सम्मानित किया
मेरठ। गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में बीर खालसा दल की ओर से चलाए जा रहे कीर्तन कार्यक्रम के अंतर्गत गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब में अमृतरस कीर्तन समागम हुआ। सोदर रहीरास साहिब के पाठ के बाद भाई जगमीत सिंह मीत ने गुरबाणी कीर्तन किया। उन्होंने शब्दों का गायन किया।
भाई जगमीत सिंह मीत ने गुरबाणी की व्याख्या करते हुए कहा कि गुरबाणी एक अथाह समुद्र है। गुरबाणी के शब्दों का मन पर लगातार चिंतन करने से जन्म-जन्म की मैल दूर होने लगती है। और जीवन में निर्मलता आती है। परमात्मा का नाम जपने से मन शुद्ध होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा के नाम की कमाई प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करनी होगी। जैसे पिता की संपत्ति में औलाद हिस्सेदार बन सकती है लेकिन पिता द्वारा की गई नाम की कमाई औलाद को विरासत में नहीं मिलती। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं मेहनत करनी होगी। समागम में मनजीत सिंह चड्ढा, गुरमीत सिंह को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
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बीर खालसा दल ने सजाया समागम, सेवादारों को सिरोपा देकर सम्मानित किया
मेरठ। गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में बीर खालसा दल की ओर से चलाए जा रहे कीर्तन कार्यक्रम के अंतर्गत गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब में अमृतरस कीर्तन समागम हुआ। सोदर रहीरास साहिब के पाठ के बाद भाई जगमीत सिंह मीत ने गुरबाणी कीर्तन किया। उन्होंने शब्दों का गायन किया।
भाई जगमीत सिंह मीत ने गुरबाणी की व्याख्या करते हुए कहा कि गुरबाणी एक अथाह समुद्र है। गुरबाणी के शब्दों का मन पर लगातार चिंतन करने से जन्म-जन्म की मैल दूर होने लगती है। और जीवन में निर्मलता आती है। परमात्मा का नाम जपने से मन शुद्ध होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा के नाम की कमाई प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करनी होगी। जैसे पिता की संपत्ति में औलाद हिस्सेदार बन सकती है लेकिन पिता द्वारा की गई नाम की कमाई औलाद को विरासत में नहीं मिलती। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं मेहनत करनी होगी। समागम में मनजीत सिंह चड्ढा, गुरमीत सिंह को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
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