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‘सुसाइड नोट के हस्ताक्षर फर्जी, उत्पीड़न के सुबूत भी नहीं मिले’

Thu, 25 Mar 2021 02:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 02:01 AM IST
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'Signature of suicide note fake, evidence of harassment not even found'
‘सुसाइड नोट के हस्ताक्षर फर्जी, उत्पीड़न के सुबूत भी नहीं मिले’
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मेरठ। आनंद हॉस्पिटल के मालिक हरिओम आनंद की आत्महत्या के मामले में नामजद लोगों को क्लीन चिट देना और मुकदमे में एफआर लगाने पर पुलिस की किरकिरी हो रही है। पुलिस का दावा है कि उत्पीड़न के कोई सुबूत नहीं मिले। सुसाइड नोट के हस्ताक्षर को भी फर्जी हैं।
हरिओम आनंद ने 27 जून 2020 में जहर खाकर आत्महत्या की थी। 9 महीने तक एसआईटी गठित करके विवेचना भी कराई गई है। विवेचक टीम के प्रभारी वरुण शर्मा ने मामले में एफआर लगाई है। मामले में सुभारती ग्रुप के चेयरमैन अतुल कृष्ण व उनकी पत्नी मुक्ति भटनागर, आनंद हॉस्पिटल के शेयर धारक जीएस सेठी, राहुल दास, ललित भारद्वाज, समय सिंह सैनी, मुमताज, समीम समेत 9 लोग नामजद थे। विवेचना में आया है कि हरिओम आनंद पर बैंक का 500 करोड़ का कर्जा था। सुसाइड नोट पर उनके हस्ताक्षर का मिलान फॉरेंसिक लैब में किया गया, जो सही नहीं मिले। मोबाइल की रिकॉर्डिंग में उत्पीड़न के सुबूत नहीं मिले। आनंद परिवार के बयानों को अनदेखा कर विवेचक ने मुकदमे में एफआर लगाई। विवेचना में बताया है कि हरिओम का किसी ने उत्पीड़न नहीं किया। इसी आधार पर एसआर लगाई गई है।
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नामजद लोगों के बयान विवेचना में शामिल
विवेचना में हरिओम की बेटी मानसी आनंद के नामजद लोगों के खिलाफ जो भी आरोप लगाए, उनके जवाब आरोपियों ने बयान में दिए है। नामजद लोगों ने भी पीड़ित परिवार के द्वारा लगाए आरोपों को निराधार बताते पुलिस को सुबूत दिए। विवेचक ने नामजद लोगों के बयान व सुबूत को विवेचना का हिस्सा बनाया। बताया जा रहा कि विवेचना में नामजद लोगों की सारी बातें शामिल की गई हैं और आनंद परिवार के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को गलत दर्शाया गया।
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एफआर में बताई गईं मुख्य बातें
1 हरिओम आनंद का नामजद आरोपी उत्पीड़न कर रहे थे, इसका सुबूत नहीं मिला
2 सुसाइड नोट पर हरिओम के हस्ताक्षर का नहीं हुआ मिलान
3 500 करोड़ का कर्जा बताया, जिसको लेकर घर में विवाद चल रहा था
4 मरने से पहले हरिओम ने नहीं लगाया किसी भी नामजद आरोपी पर आरोप, कोई वीडियो नहीं
5 97 फीसदी शेयरधारकों का हक, तीन फीसदी आनंद परिवार का हॉस्पिटल में था हक
इन बिंदुओं पर नहीं की जांच
1 आनंद परिवार ने शेयर धारक और अतुल कृष्ण के खिलाफ 55 पन्नों के सुबूत दिए थे, नहीं की गई जांच
2 खुदकुशी से पहले किस-किस से हरिओम आनंद की बात हुई । कौन धमकाने के लिए उनके घर आया था। इसकी नहीं हुई जांच
3 सुसाइड नोट कंप्यूटर पर किसने टाइप किया है और हरिओम ने कब हस्ताक्षर किए या नहीं किए। सुबूत नहीं तलाशे
4 आनंद हॉस्पिटल के डॉक्टरों के बयान क्यों नहीं किए विवेचना में शामिल
5 हरिओम आनंद क्यों परेशान थे। मुरलीपुर गांव में जाकर अपने फार्म हाउस पर जहर क्यों खाया। ड्राइवर को क्या-क्या बताया
6 पीड़ित परिवार के बयान व सुबूत को विवेचना में क्यों शामिल नहीं किया
दोबारा से होगी जांच
मानसी आनंद के शिकायती पत्र पर मुकदमे की दोबारा से जांच होगी। विवेचना हापुड़ के एसपी को सौंप दी गई। निष्पक्ष जांच होगी, जो भी आरोपी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - राजीव सभरवाल, एडीजी मेरठ जोन
एसपी सिटी की जांच में थे आरोपी, कैसे मिली क्लीन चिट
मेरठ। एसपी सिटी की जांच में नामजद आरोपी सिद्ध हो गए थे, लेकिन दरोगा की जांच में उनको क्लीन चिट दे दी गई। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। दरोगा की विवेचना ने एसपी सिटी की जांच पर सवाल उठा दिए हैं। हरिओम आनंद की बेटी मानसी ने 3 पेज की तहरीर एसएसपी को दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी और एसपी सिटी से पूरे मामले की जांच कराई। 20 दिन तक एसपी सिटी ने जांच की व मुकदमा दर्ज करने की बात कह दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मानसी की पहली तहरीर पर ही नामचीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।

एफआर कोर्ट में जमा
मेरठ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लाजमी हैं। एडीजी-आईजी के निर्देश पर मामले की जांच हापुड़ ट्रांसफर हुई। इसके बावजूद बुधवार को एफआर कोर्ट में जमा की गई। इस मामले में पीड़ित परिवार के वकील रामकुमार शर्मा ने पुलिस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है। वहीं सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि जिस मुकदमे में एफआर लग गई हो, उसकी जांच नहीं होती। दोबारा से विवेचना होती या फिर अग्रिम विवेचना (कुछ खास बिंदु पर जांच) होगी।
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