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बीमारी में भी नहीं रुके गोल्डन बाबा, 15 किलो सोना पहन ले जा रहे 26वीं कावंड़
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पिछले साल पहना हुआ था 21 किलो सोना
मेरठ पहुंचा गोल्डन बाबा का काफिला
मोहित कुमार
मोदीपुरम। दिल्ली के गारमेंटस व्यापारी सुधीर मक्कड़ उर्फ गोल्डन बाबा अपने भक्तों के साथ दौराला मोदीपुरम पहुंच गए। इस बार वे 26वीं कांवड़ लेकर आ रहे हैं। उनके काफिले को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। हालांकि ऑपरेशन होने के कारण इस बार वे सिर्फ 15 किलो सोना पहनकर ही निकले हैं, जबकि पिछले वर्ष वह 21 किलो सोना पहनकर निकले थे।
काफिले में ऑटो से लेकर फॉरच्यूनर तक
गोल्डन बाबा के काफिले में दो फॉरच्यूनर, दो स्कॉर्पियो, दो इनोवा, दो क्वालिस, तीन बड़े ट्रक, 5 टेंपो, एक एंबुलेंस, 4 छोटे हाथी शामिल हैं। 30 निजी सुरक्षाकर्मी, दो गनर, 8 बांउसर उनकी सुरक्षा में लगे हैं। गोल्डन बाबा ने बताया कि वे 22 जुलाई को हरिद्वार से जल लेकर दिल्ली के लिए चले हैं। उन्होंने दादरी के पास एक होटल में आराम किया और शाम को दिल्ली के निकल गए। उनके काफिले में कुल 85 लोग हैं। मेरठ पहुंचने पर उनकी दौराला पुलिस भी उनकी सुरक्षा में लग गई। 29 जुलाई को बाबा दिल्ली पहुंचेगे और अशेाक गली के लक्ष्मी नारायण मंदिर में जल चढ़ाएंगे। बाबा के सिक्योरिटी इंचार्ज मोहित ने बताया कि गोल्डन बाबा पिछले काफी समय से बीमार हैं, उनके दो ऑपरेशन भी हो चुके। ऐसे में वे काफी कमजोर हो गए हैं। इसलिए उन्होंने इस बार 15 किलो सोना ही धारण किया है। गोल्डन बाबा ने बताया कि दो ऑपरेशन होने की वजह से डाक्टर ने उन्हें सोना पहनने से मना कर दिया था। इसके अलावा बीमारी के चलते इस बार कांवड़ लेने आना भी नामुमकिन था, लेकिन भोले बाबा का आशीर्वाद रहा कि 26वीं बार भी कांवड़ लेने आ गया।
गोल्डन बाबा का कपड़ों और प्रोपर्टी का कारोबार था, लेकिन 2013 में कुंभ के मेेले में शामिल होने के बाद उन्होंने अपना कारोबार बंद कर दिया और महात्मा बन गए। गोल्डन बाबा भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त हैं। वह हर साल अपने भक्तों के साथ हरिद्वार से जल लेकर आते है। पहली यात्रा में वह पांच किलो सोने के आभूषण पहनकर दो दर्जन साथियों के साथ कांवड़ लेकर आए थे। इसके अलावा दिल्ली और हरिद्वार में वे शिविर लगाकर कांवड़ियों की सेवा भी करते हैं। उनके काफिले में शामिल महिला-पुरुष उनकी सेवा में तैनात रहते हैं। इस दौरान खाने पीने की व्यवस्था के लिए रसोई स्टाफ व चिकित्सा के लिए एक एंबुलेंस भी काफिले में शामिल रहती है। बारिश से बचने के लिए वाटरप्रूफ तंबू भी उनके पास मौजूद है।
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मेरठ पहुंचा गोल्डन बाबा का काफिला
मोहित कुमार
मोदीपुरम। दिल्ली के गारमेंटस व्यापारी सुधीर मक्कड़ उर्फ गोल्डन बाबा अपने भक्तों के साथ दौराला मोदीपुरम पहुंच गए। इस बार वे 26वीं कांवड़ लेकर आ रहे हैं। उनके काफिले को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। हालांकि ऑपरेशन होने के कारण इस बार वे सिर्फ 15 किलो सोना पहनकर ही निकले हैं, जबकि पिछले वर्ष वह 21 किलो सोना पहनकर निकले थे।
काफिले में ऑटो से लेकर फॉरच्यूनर तक
गोल्डन बाबा के काफिले में दो फॉरच्यूनर, दो स्कॉर्पियो, दो इनोवा, दो क्वालिस, तीन बड़े ट्रक, 5 टेंपो, एक एंबुलेंस, 4 छोटे हाथी शामिल हैं। 30 निजी सुरक्षाकर्मी, दो गनर, 8 बांउसर उनकी सुरक्षा में लगे हैं। गोल्डन बाबा ने बताया कि वे 22 जुलाई को हरिद्वार से जल लेकर दिल्ली के लिए चले हैं। उन्होंने दादरी के पास एक होटल में आराम किया और शाम को दिल्ली के निकल गए। उनके काफिले में कुल 85 लोग हैं। मेरठ पहुंचने पर उनकी दौराला पुलिस भी उनकी सुरक्षा में लग गई। 29 जुलाई को बाबा दिल्ली पहुंचेगे और अशेाक गली के लक्ष्मी नारायण मंदिर में जल चढ़ाएंगे। बाबा के सिक्योरिटी इंचार्ज मोहित ने बताया कि गोल्डन बाबा पिछले काफी समय से बीमार हैं, उनके दो ऑपरेशन भी हो चुके। ऐसे में वे काफी कमजोर हो गए हैं। इसलिए उन्होंने इस बार 15 किलो सोना ही धारण किया है। गोल्डन बाबा ने बताया कि दो ऑपरेशन होने की वजह से डाक्टर ने उन्हें सोना पहनने से मना कर दिया था। इसके अलावा बीमारी के चलते इस बार कांवड़ लेने आना भी नामुमकिन था, लेकिन भोले बाबा का आशीर्वाद रहा कि 26वीं बार भी कांवड़ लेने आ गया।
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गोल्डन बाबा का कपड़ों और प्रोपर्टी का कारोबार था, लेकिन 2013 में कुंभ के मेेले में शामिल होने के बाद उन्होंने अपना कारोबार बंद कर दिया और महात्मा बन गए। गोल्डन बाबा भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त हैं। वह हर साल अपने भक्तों के साथ हरिद्वार से जल लेकर आते है। पहली यात्रा में वह पांच किलो सोने के आभूषण पहनकर दो दर्जन साथियों के साथ कांवड़ लेकर आए थे। इसके अलावा दिल्ली और हरिद्वार में वे शिविर लगाकर कांवड़ियों की सेवा भी करते हैं। उनके काफिले में शामिल महिला-पुरुष उनकी सेवा में तैनात रहते हैं। इस दौरान खाने पीने की व्यवस्था के लिए रसोई स्टाफ व चिकित्सा के लिए एक एंबुलेंस भी काफिले में शामिल रहती है। बारिश से बचने के लिए वाटरप्रूफ तंबू भी उनके पास मौजूद है।
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