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Meerut News: श्रेया ने डिजाइन पेटेंट हासिल किया, गन्ना कटाई के नवाचार को मिली राष्ट्रीय पहचान
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- टू-वे डी-ट्रैश शुगरकेन मिनी हार्वेस्टर से गन्ने की कटाई होगी बेहतर और आसान
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। दीवान पब्लिक स्कूल में बारहवीं की छात्रा श्रेया सिंह ने कृषि क्षेत्र में अभिनव तकनीक विकसित कर विद्यालय और जिले का नाम रोशन किया है। श्रेया के टू-वे डी-ट्रैश शुगरकेन मिनी हार्वेस्टर को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने डिजाइन पेटेंट प्रदान किया है। यह उपलब्धि विद्यालय स्तर पर नवाचार और वैज्ञानिक सोच को नई पहचान देने वाली है।
श्रेया के आविष्कार का पंजीकरण डिजाइन संख्या 490134-001 (क्लास 15-03) के तहत किया गया है। इसे 10 अप्रैल को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय के आधिकारिक जर्नल में प्रकाशित किया गया है। यह मशीन गन्ने की कटाई और सफाई की प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें दोनों दिशाओं से गन्ने की पत्तियां हटाने की व्यवस्था, समायोज्य कटाई ऊंचाई, असमतल खेतों में कार्य करने की क्षमता, जाम की पहचान, ओवरलोड सुरक्षा प्रणाली और छोटे खेतों के लिए उपयुक्त कॉम्पैक्ट डिजाइन जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
इस नवाचार को विकसित करने में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन शुगरकेन के प्रभारी एवं सहायक डॉ. विकास कुमार का मार्गदर्शन रहा। डॉ. विकास कुमार श्रेया के पिता भी हैं। विद्यालय प्रबंधन ने श्रेया सिंह, उनके अभिभावकों और डॉ. विकास कुमार को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं।
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मेरठ। दीवान पब्लिक स्कूल में बारहवीं की छात्रा श्रेया सिंह ने कृषि क्षेत्र में अभिनव तकनीक विकसित कर विद्यालय और जिले का नाम रोशन किया है। श्रेया के टू-वे डी-ट्रैश शुगरकेन मिनी हार्वेस्टर को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने डिजाइन पेटेंट प्रदान किया है। यह उपलब्धि विद्यालय स्तर पर नवाचार और वैज्ञानिक सोच को नई पहचान देने वाली है।
श्रेया के आविष्कार का पंजीकरण डिजाइन संख्या 490134-001 (क्लास 15-03) के तहत किया गया है। इसे 10 अप्रैल को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय के आधिकारिक जर्नल में प्रकाशित किया गया है। यह मशीन गन्ने की कटाई और सफाई की प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें दोनों दिशाओं से गन्ने की पत्तियां हटाने की व्यवस्था, समायोज्य कटाई ऊंचाई, असमतल खेतों में कार्य करने की क्षमता, जाम की पहचान, ओवरलोड सुरक्षा प्रणाली और छोटे खेतों के लिए उपयुक्त कॉम्पैक्ट डिजाइन जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
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इस नवाचार को विकसित करने में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन शुगरकेन के प्रभारी एवं सहायक डॉ. विकास कुमार का मार्गदर्शन रहा। डॉ. विकास कुमार श्रेया के पिता भी हैं। विद्यालय प्रबंधन ने श्रेया सिंह, उनके अभिभावकों और डॉ. विकास कुमार को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं।
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