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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Shradh: Very auspicious yoga of planetary constellations being formed on Sarva Pitru Amavasya

श्राद्ध: सर्व पितृ अमावस्या पर 11 साल बाद बन रहा ग्रह नक्षत्रों का बेहद शुभ योग, ऐसे करें पितरों की विदाई

Tue, 05 Oct 2021 01:01 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 05 Oct 2021 01:01 PM IST
सार

सर्व पितृ अमावस्या पर ग्रह नक्षत्रों का शुभ योग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गज्ज्छाया योग में श्राद्ध या तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं।

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Shradh: Very auspicious yoga of planetary constellations being formed on Sarva Pitru Amavasya
श्राद्ध-प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

सर्व पितृ अमावस्या पर ग्रह नक्षत्रों का शुभ योग बन रहा है। पितृ अमावस्या पर गज्ज्छाया योग बन रहा है। इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। बुधवार छह अक्तूबर को सूर्योदय से सूर्य और चंद्रमा शाम 04 बजकर 34 मिनट तक हस्त नक्षत्र में होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गज्ज्छाया योग में श्राद्ध या तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इस दिन ब्रह्म योग और इंद्र योग का बन रहा है। अब ये योग 8 साल बाद 2029 में बनेगा। 

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इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस की सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सर्व पितृ अमावस्या पर सभी पितरों के लिए श्राद्ध और दान किया जाता है।

सूर्य की सहस्र किरणों में जो सबसे प्रमुख किरण है उसका नाम ‘अमा’ है। उस अमा नामक प्रधान किरण के तेज से सूर्य त्रिलोक को प्रकाशित करते हैं। उसी अमा में इस तिथि विशेष को चंद्रदेव निवास करते हैं (वस्य), इसलिए इसका नाम ‘अमावस्या’ है।
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ऐसे करें पितरों की विदाई
विगत पंद्रह दिनों से पृथ्वी की परिधि में पधारे हमारे पितर गण अमावस्या के दिन विशेष तर्पण एवं भोज्य पदार्थों को ग्रहण करते हुए अपने वंशजों को राजी-खुशी एवं सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हुए पितृ लोक प्रस्थान करेंगे। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान सभी पितर वायु रूप में धरती पर आते हैं पितरों को अमावस्या के दिन विदाई दी जाती है और पितर अपने लोक चले जाते हैं।

तिलांजलि के साथ विदा होंगे पितर
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि पद्म पुराण, मार्कंडेय और अन्य पुराणों में कहा गया है कि अश्विन महीने की अमावस्या पर पितृ पिंडदान और तिलांजलि चाहते हैं। यदि उन्हें यह नहीं मिलता तो वे अतृप्त होकर ही चले जाते हैं।

इस दिन करें ये  विधि-विधान
इस दिन पीपल के पत्तों पर पांच तरह की मिठाइयों को रखकर  पीपल की पूजा करें। पितरों से प्रार्थना करें कि वह हमेशा आप पर आशीर्वाद बनाए रखें। पितर संतुष्ट होकर अपने लोक जाएंगे तो आप सुख से रहेंगे। 

अमावस्या पर श्राद्ध जरूरी
जो व्यक्ति अपने पितरों की देहांत  तिथि के अनुसार, पूर्व श्राद्ध के पंद्रह दिनों में किसी भी कारणवश शास्त्रोक्त विधि से श्राद्धकर्म नहीं कर पाए। वह इस अमावस्या तिथि को पितरों के निमित पिंडदान, तर्पण व श्राद्धकर्म कर सकते हैं।

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