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शिव विवाह है संतुलन का प्रतीक: देवी अंशिका
Tue, 08 Jul 2025 01:51 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Tue, 08 Jul 2025 01:51 AM IST
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मेरठ। वेस्ट एंड रोड बाबा औघड़नाथ मंदिर मार्ग स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में श्रीराम कथा हुई। कथा व्यास 11 वर्षीय देवी अंशिका ने कहा कि भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह संतुलन का प्रतीक है। यह विवाह हिंदू धर्म में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। शिव की पहली पत्नी सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में हुआ। माता पार्वती ने अपनी भक्ति साबित करने के लिए कठोर तपस्या की और शिव को प्राप्त किया।
शिव पार्वती का विवाह उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर में हुआ। कथा स्थल को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था। हर तरफ श्रीराम और भोलेनाथ जी के जयकारे गूंज रहे थे। देवी अंशिका ने बताया कि भगवान शिव के अपमान के कारण माता सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। इस बीच असुर तारकासुर ने भगवान ब्रह्मा से वरदान लिया कि उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र द्वारा ही संभव है। सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में हुआ। पार्वती ने शिव को प्रभावित करने के लिए कठोर तपस्या की। देवताओं ने कामदेव को शिव की ध्यान भंग करने के लिए भेजा लेकिन शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। अंत में माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ। कथा सुनने वालों में ब्रजभूषण गुप्ता, सुरेश गर्ग, पुष्पदीप, अतुल अग्रवाल, राजकेसरी, अनिल अग्रवाल, विजय गोयल, किशोर गर्ग, अशोक गर्ग आदि रहे।
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शिव पार्वती का विवाह उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर में हुआ। कथा स्थल को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था। हर तरफ श्रीराम और भोलेनाथ जी के जयकारे गूंज रहे थे। देवी अंशिका ने बताया कि भगवान शिव के अपमान के कारण माता सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। इस बीच असुर तारकासुर ने भगवान ब्रह्मा से वरदान लिया कि उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र द्वारा ही संभव है। सती का पुनर्जन्म पार्वती के रूप में हुआ। पार्वती ने शिव को प्रभावित करने के लिए कठोर तपस्या की। देवताओं ने कामदेव को शिव की ध्यान भंग करने के लिए भेजा लेकिन शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। अंत में माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ। कथा सुनने वालों में ब्रजभूषण गुप्ता, सुरेश गर्ग, पुष्पदीप, अतुल अग्रवाल, राजकेसरी, अनिल अग्रवाल, विजय गोयल, किशोर गर्ग, अशोक गर्ग आदि रहे।
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