शीबा ने 24 घंटे बाद तोड़ा दम, मरने से पहले पुलिस को बताए आरोपियों के नाम... गिरफ्तार
मेरठ के किठौर में अपहरण के दौरान गोली लगने से घायल 17 साल की शीबा ने 24 घंटे बाद सोमवार रात मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में दम तोड़ दिया। मरने से पहले शीबा ने अपहरण करने वाले तीनों आरोपियों के नाम पुलिस को बताए। किशोरी के मजिस्ट्रेटी बयान भी कराए गए। मौत की पुष्टि होते ही किठौर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मामला किठौर थानाक्षेत्र के कायस्थ बड्ढा गांव का है। जान मोहम्मद की बेटी शीबा रविवार शाम घर के बाहर पानी लेने गई थी। तभी तीन युवक शीबा को उठाकर जंगल में ले गए। शीबा ने आरोपियों का विरोध करते हुए शोर मचाया था। जिस पर आरोपियों ने उसे गोली मार दी थी। गोली की आवाज सुनकर ग्रामीण जंगल पहुंचे थे और घायल किशोरी को गंभीर हालत में मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था।
वहीं एसपी देहात ने किशोरी के पुलिस और मजिस्ट्रेटी बयान अंकित कराए। जिसमें किशोरी ने गांव के तीन युवकों पप्पू, महबूब व इंतजार के नाम बताए। पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानकर चल रही थी। सोमवार रात किशोरी की इलाज के दौरान मौत हो गई।
अब छोड़ो, आरोपी पकड़ो
किशोरी की मौत की खबर लगते ही एसपी देहात राजेश कुमार ने एसओ किठौर राजेंद्र त्यागी को हड़काते हुए कहा कि संदिग्ध मामले को छोड़ो, तुरंत नामजद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करो। पुलिस ने तीनों आरोपी पप्पू, महबूब और इंतजार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि किशोरी के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया रात में ही कराई जा रही है। किशोरी ने मरने से पहले आरोपियों के नाम बताए हैं, उसी आधार पर कार्रवाई की गई है।
पुलिस के प्रति आक्रोश
पुलिस ने बिना जांच करे किशोरी से हुई वारदात को संदिग्ध मान लिया था। इसको लेकर किशोरी के परिजनों में आक्रोश था। किशोरी की मौत के बाद परिजनों को गुस्सा फूटा तो पुलिस हरकत में आई। पीड़ित परिवार का कहना कि किठौर पुलिस आरोपियों से मिली हुई। किशोरी के बयान होने के बावजूद भी पुलिस उसका यकीन करने को तैयार नहीं थी।
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पुलिस मान रही थी संदिग्ध
पुलिस के मुताबिक किशोरी की हत्या में नामजद आरोपी पप्पू के पिता मुर्सलीन की 2015 में हत्या हुई थी। जिसमें शीबा के भाई नजर और प्यार मोहम्मद जेल में बंद है। आरोपी समझौते का प्रयास कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बन रही थी। पुलिस को अंदेशा था कि किशोरी को अगवा कर गोली मारने के पीछे मुर्सलीन की हत्या के केस में समझौते का दबाव है।
पहली गलती मत करना
भावनपुर में आत्मदाह करने के छह दिन बाद आठवीं की छात्रा की मौत में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। पुलिस ने छात्रा के बयान अंकित नहीं किए थे। रविवार किठौर पुलिस ने भावनपुर जैसी गलती नहीं की। गोली लगने के बाद एसपी देहात मौके पर पहुंचे। एसपी ने सबसे पहले अस्पताल में भर्ती किशोरी शीबा के बयान दर्ज कराए। उसके बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया। आरोपी पुलिस के संपर्क में थे। मौत होते ही पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
सभी बिंदुओं पर बयान
एसएसपी मंजिल सैनी दहल ने बताया कि किशोरी की इलाज के दौरान मौत हो गई है। तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। किशोरी के दो भाई हत्या के मामले में जेल में है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है। किशोरी के बयान में दुष्कर्म जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
सुरक्षित नहीं बेटियां, ‘कठघरे’ में पुलिस
बेटियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस अफसरों के तमाम दावे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। बीस दिन लावड़ की घटना ने पुलिस अफसरों को हिलाकर रख दिया। दूसरे समुदाय के युवक ने युवती की वीडियो वायरल कर जबरन धर्मांतरण करने की कोशिश की। जिसके बाद युवती ने परेशान होकर शादी से पहले सुसाइड कर लिया था। लावड़ का मामला निपटा भी नहीं था कि भावनपुर क्षेत्र के एक गांव में छात्रा ने उत्पीड़न से परेशान होकर तेल छिड़ककर आत्मदाह कर लिया था। पूरे मामले में पुलिस की घोर लापरवाही रही। एसओ भावनपुर करतार सिंह और सीओ सदर देहात श्रीराम अर्ज को भी हटाया गया।
24 जनवरी को सोहरका गांव में मां-बेटे की हत्या की गूंज लखनऊ तक पहुंची तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठने शुरू हो गए। कायस्थ बड्ढा की 17 वर्षीय किशोरी शीबा की मौत होने के बाद एक बार फिर लगने लगा कि यहां बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
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