UP: माफिया के कब्जे से मुक्त होगी शिया वक्फ की संपत्ति, सैयद जैदी ने अमर उजाला से बातचीत में कही ये बड़ी बात
Meerut News : शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद अली जैदी ने अब्दुल्लापुर और मवाना में शिया वक्फ की जमीनों पर हुए कब्जे का मुआयना करने के बाद अमर उजाला को बताया कि अब्दुल्लापुर में शिया वक्फ की कई बेशकीमती संपत्तियां हैं।
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मेरठ के मवाना और अब्दुल्लापुर में शिया वक्फ बोर्ड की जमीनों को जल्द ही माफिया के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। मंगलवार को एक वैवाहिक समारोह में पहुंचे शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद अली जैदी ने स्थानीय लोगों को इसका आश्वासन दिया।
उन्होंने अब्दुल्लापुर और मवाना में शिया वक्फ की जमीनों पर हुए कब्जे का मुआयना करने के बाद अमर उजाला को बताया कि अब्दुल्लापुर में शिया वक्फ की कई बेशकीमती संपत्तियां हैं। स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि इन जमीनों पर माफिया की नजर है। कुछ संपत्तियों पर माफिया ने कब्जा भी कर रखा है, जिसे जल्द मुक्त कराया जाएगा।
इसके अलावा मवाना में शिया समुदास्के इमामबाड़े पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। मवाना बाजार में भी वक्फ की काफी संपत्ति है जिस पर अवैध कब्जा है। उन्होंने इस संबंध में मेरठ के एसएसपी रोहित सिंह सजवाण से मुलाकात भी की है और जमीनों को कब्जा मुक्त कराए जाने का अनुरोध किया। एसएसपी ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
वक्फ मनसविया होगा आधुनिक मदरसा
अली जैदी ने कहा कि मेरठ में मनसबिया वक्फ की सबसे पुरानी संपत्ति है। यहां की भी काफी शिकायतें मिली हैं। बुधवार को वह यहां का दौरा करेंगे। यहां के मदरसे को आधुनिक बनाकर छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
अमरोहा, जौनपुर में बनेगा बोर्ड का सेटेलाइट ऑफिस
चेयरमैन ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वक्फ की संपत्तियों पर निगरानी के लिए अमरोहा में एक सेटेलाइट आफिस बनाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही पूरा प्लान तैयार किया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में वक्फ की संपत्तियां है, जिन पर लखनऊ से निगरानी संभव नहीं हो पाती। पूर्वी उत्तर प्रदेश में जौनपुर में भी एक सेटेलाइट आफिस खोलने का प्लान तैयार किया जा रहा है।
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ट्रस्ट को हलाल सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार किसने दिया?
प्रदेश सरकार द्वारा हलाल सर्टिफिकेशन पर लगाई गई रोक और उसकी कराई जा रही जांच की बाबत अली जैदी ने कहा कि जो संस्थाएं हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रही थीं, वह खुद जायज थीं या नहीं? सर्टिफिकेट देने के लिए क्या प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। संस्थाओं को सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार किसने दिया? फीस के नाम पर जो पैसे लिए जाते हैं उनका इस्तेमाल कहां होता है। इसकी जांच होने में किसी को एतराज नहीं होना चाहिए।
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