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शरई अदालतें बंद करें... नहीं तो पश्चिमी यूपी के पांच जिलों में खोली जाएंगी 'हिंदू कोर्ट'

Sat, 25 Aug 2018 08:14 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 25 Aug 2018 08:14 PM IST
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Sharia courts should be closed, otherwise Hindu courts will be opened in 5 districts of western UP
फाइल फोटो

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के मेरठ जिलाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने कहा है कि महासभा हिंदू न्यायपीठ खोलने के फैसले पर अडिग है। केवल एक शर्त पर ही इसे रोका जा सकता है कि देश में चल रही शरई अदालतों को बंद किया जाए और एक समान कानून पूरे देश में लागू हो।

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हिंदू अदालत खोलने की घोषणा के बाद से लगातार इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जिलाध्यक्ष अभिषेक का कहना है कि वेस्ट यूपी के पांच जिलों में हिंदू न्यायपीठ खोली जाएंगी। उन्होंने कहा कि दारूल उलूम 70 की बजाय 700 शरई अदालतें खोलने की बात कह रहा है। उसका कोई विरोध नहीं पर यदि हिंदू महासभा चंद हिंदू न्यायपीठ खोल रही है तो उस पर हल्ला हो रहा है। कई नेता, जनप्रतिनिधि अपना दरबार लगाकर फैसले कर रहे हैं, उसका भी कोई विरोध नहीं है। 
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उन्होंने कहा कि महासभा द्वारा मनाए जाने वाले धिक्कार दिवस (दो अक्टूबर) पर महासभा इसके नियम कानून जारी करेगी। 15 नवंबर को गोडसे बलिदान दिवस पर पांच जिलों में इसकी शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि देश में सभी शरई अदालतों को प्रतिबंधित कर किया जाए। साथ ही 700 शरई अदालतें खोलने की घोषणा करने वालों को गिरफ्तार किया जाए। पूरे देश में संविधान द्वारा बनाई गई अदालतों के निर्णय ही अंतिम माने जाएं।

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हमें हिंदू अदालत पर कोई ऐतराज नहीं : शहर काजी
मेरठ शहरकाजी जैनुस साजिद्दीन का कहना है कि उन्हें हिंदू अदालत के गठन पर कोई ऐतराज नहीं है। बकौल शहर काजी, ‘यह तो अच्छी बात है। दरअसल यह अदालत क्या पंचायतें हैं, जिनमें दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मसला निपटाया जाता है। जिस व्यक्ति को इनके द्वारा किए गए फैसले पर यकीन नहीं, वह अदालत का सहारा लेता है। शर्त यह है कि ऐसी अदालत में ईमानदार व काबिल आदमी को ही जिम्मेदारी दी जाए ताकि इस का दुरुपयोग न हो।’

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