कैराना सांसद तबस्सुम हसन ने उपचुनाव की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
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यूपी में कैराना उपचुनाव में मतगणना के बाद टैबुलेशन जोड़ में करीब 3 हजार वोटों की गड़बड़ी में शामली डीएम पर कार्रवाई के बाद सांसद तबस्सुम हसन ने चुनाव की पारदर्शिता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा के बाबू हुकुम सिंह की मृत्यु के बाद रिक्त हुई इस सीट पर इसी साल जून में हुए उपचुनाव में रालोद की तबस्सुम ने सिंह की बेटी और भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को हराया था। सांसद तबस्सुम ने कहा है कि यदि उपचुनाव में निष्पक्षता से काम होता तो उनकी जीत का अंतर काफी ज्यादा होता।
बुधवार को जारी अपने बयान में रालोद सांसद ने कहा कि 21 मई को चुनाव प्रक्रिया के आरंभ होते ही तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी/ डीएम इंद्र विक्रम सिंह का पक्षपाती रवैया सामने आ रहा था। उन्होंने इसकी चुनाव आयोग से लगातार शिकायत की। मतदान के दिन तो पक्षपात की हद हो गई थी। जिला निर्वाचन अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं कर रहे थे। न ही वोटिंग मशीन की गड़बड़ी दूर करने को तकनीकी स्टाफ भेजा जा रहा था।
सांसद ने कहा कि वीवीपैट गड़बड़ी वाले बूथों पर मशीन को ठीक कराने के लिए कोई तकनीकी व्यवस्था नहीं थी। मतदान के दौरान सेक्टर मजिस्ट्रेट के फोन नंबर तक देने से उन्हें इंकार कर दिया गया था। हालांकि सहारनपुर के तत्कालीन डीएम ने निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन किया। यदि जनपद शामली में भी ऐसा होता तो यहां पर सहारनपुर जिले के अंतर्गत पड़ने वाले बूथों से ज्यादा पर पुनर्मतदान होता। बकौल सांसद, मतगणना के दिन वह इंद्र विक्रम सिंह के तौर तरीकों से पहले ही सतर्क हो चुके थे। सिंह ने मतगणना कर्मियों पर अपना दबाव बनाया और जीत के अंतर को बेहद कम कराया। सबसे अधिक कैराना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में गड़बड़ी हुई। डीएम के तबादले से उनकी शिकायतों को बल मिलता है।
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