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नाम जर्मन सिंह, पेशा मजदूरी और दिमाग में सिर्फ खालिस्तान, हथियारों से खेलने का बड़ा शौक
विनोद जैन, अमर उजाला, शामली
Updated Wed, 17 Oct 2018 04:53 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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खाली जहन, कोई काम धंधा नहीं, जंगल में बसेरा और दिमाग में बस गया खालिस्तान तो हथियारों से खेलने की भी सनक सवार हो गई। ऐसा है पुलिस से रायफल लूट की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह का सरगना जर्मन सिंह, जो जंगल के बीच बसे डेरे में रहता था।
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अमर उजाला टीम मंगलवार को उसके अजीजपुर स्थित डेरा तक पहुंची। यहीं उसका दो कमरों का काफी पुराना मकान है। बाहर धान फैला हुआ था तो कुछ ईंटें और खाली डिब्बे बिखरे पड़े थे। कमरों के बाहर दो चारपाई पड़ी थीं। पता लगा कि जर्मन ने झिंझाना कस्बे के संत आसाराम इंटर कॉलेज से 12वीं तक पढ़ाई कर रखी है। कॉलेज के बाद अपना ज्यादातर समय उसने गुरुद्वारे की सेवा में लगाया। दो साल से तो वह पूरी तरह सेवादार बन चुका था और कारसेवा में जाने वाले जत्थे का वाहन चलाता था।
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मां दलजीत कौर बताती हैं कि बड़ा बेटा कुलदीप सिंह ग्रेजुएट है, लेकिन नौकरी नहीं लगने पर वह पंजाब में ट्रक चलाता है। छोटा बेटा हरमन 9वीं कक्षा में पढ़ रहा है और एक छोटी बहन मनजीत कौर है। बकौल दलजीत, उन्हें नहीं मालूम जर्मन कब खालसा ग्रुप से जुड़ गया। उन्हें कभी इसका अहसास नहीं हुआ। उनका परिवार तो मेहनत मजदूरी करता है, उसी से गुजर बसर होती है।
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बताया गया कि जर्मन सिंह 30 सितंबर को घर से निकला था और इसके बाद घर नहीं लौटा। दो अक्तूबर को बिड़ौली-चौसाना मार्ग पर पुलिसकर्मियों पर हमला करके दो रायफलें लूटने वाले गिरोह का वह सरगना बताया जा रहा है।
हालांकि पुलिस ने इस घटना का खुलासा 14 दिन बाद किया है, लेकिन जर्मन इससे पहले ही सतर्क हो चुका था और लगातार घर से फरार है। दूसरा आरोपी करमा भी गांव डेरा अजीजपुर का ही रहने वाला है। उसके मकान पर मंगलवार को ताला लटका मिला। आसपास के लोगों को भी उसके या परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लोगों ने बताया कि कई दिन से मकान का ताला बंद है।
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