Shamli: ट्रक चोरी के बाद नहीं मिला बीमा दावा, आयोग ने कंपनी को ठहराया दोषी, 16.60 लाख रुपये भरने का आदेश
शामली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ट्रक चोरी के बाद बीमा दावा न देने के मामले में बीमा कंपनी को 16.60 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी के खिलाफ जुर्माना और क्षतिपूर्ति भी तय की है।
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शामली जनपद में ट्रक चोरी होने के बाद बीमा दावा न देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को परिवादी को कुल 16 लाख 60 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही निर्धारित समय में आदेश का पालन न करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
ट्रक चोरी होने के बाद दर्ज कराया था परिवाद
गांव खेड़ीकरमू निवासी बबीता पत्नी मदनपाल ने 28 सितंबर 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में बीमा कंपनी के शाखा प्रबंधक, मुख्य अधिकारी तथा प्रबंध निदेशक के विरुद्ध परिवाद दायर किया था।
परिवादी ने बताया कि उनके मोटर वाहन ट्रक का बीमा कराया गया था, जो 30 मार्च 2018 से 29 मार्च 2019 की मध्यरात्रि तक वैध था। बीमा पॉलिसी के अनुसार निर्धारित प्रीमियम का भुगतान भी समय पर कर दिया गया था। 27 जुलाई 2018 को ट्रक चोरी हो गया था। इस संबंध में 28 अगस्त को पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और परिवहन विभाग को भी सूचना दी गई।
पुलिस जांच के बाद भी नहीं मिला वाहन
पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन चोरी हुए वाहन का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 29 अप्रैल 2019 को न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई। परिवादी ने बीमा कंपनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया और कई बार कार्यालय जाकर भुगतान की मांग की, लेकिन कंपनी ने दावा देने से इनकार कर दिया।
आयोग ने सुनाया भुगतान का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अमरजीत कौर ने परिवाद स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया।
आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह बीमा दावा राशि 13 लाख 50 हजार रुपये पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित भुगतान करे। इसके अलावा परिवाद व्यय के रूप में दस हजार रुपये, शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए दो लाख रुपये तथा अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए एक लाख रुपये का अर्थदंड अदा करने का आदेश दिया गया। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड की राशि नियमानुसार राजकोष में जमा कराई जाएगी।
आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया गया तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आगे की कार्रवाई की जाएगी। परिवादी के अनुसार इस मामले की सुनवाई आयोग में 40 से अधिक तारीखों पर हुई। उन्होंने कहा कि आयोग का यह फैसला न्यायपूर्ण है।