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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Seven candidates declared: Don't fall into the alliance, try to compensate the SP leader by fighting Siwalkhas on the symbol of RLD

घोषित हुए सातों उम्मीदवार :गठबंधन में न पड़ जाए दरार, सिवालखास से सपा नेता को रालोद के सिंबल पर लड़ाकर भरपाई की कोशिश 

Wed, 19 Jan 2022 02:45 PM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 19 Jan 2022 02:45 PM IST
सार

एक तरह देखा जाए तो सारी सीटों पर सपा से जुड़े रहे उम्मीदवारों को ही टिकट को सौगात मिली है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे कहीं गठबंधन तो कमजोर नहीं पड़ जाएगा, क्योंकि इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
 

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Seven candidates declared: Don't fall into the alliance, try to compensate the SP leader by fighting Siwalkhas on the symbol of RLD
जयंत चौधरी व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मेरठ जिले की सातों विधानसभा सीटों से सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी घोषित कर दिए गए हैं। जिस तरह से सिवालखास सीट पर टिकट को लेकर खींचतान हुई है, उससे चुनाव में गठबंधन की गांठ कमजोर पड़ सकती है। हालांकि, सपा नेता और पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद को अपने सिंबल पर प्रत्याशी बनाकर रालोद ने भरपाई की कोशिश की है। 
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सात सीटों में से पांच सपा के खाते में गई हैं, जबकि दो रालोद के खाते में। हालांकि जो दो सीटें रालोद को मिली हैं, उनमें से सिवालखास के अलावा कैंट से प्रत्याशी बनाई गईं मनीषा अहलावत भी सपा से ही सरधना से टिकट मांग रही थीं। यानी एक तरह देखा जाए तो सारी सीटों पर सपा से जुड़े रहे उम्मीदवारों को ही टिकट को सौगात मिली है। 
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इसी वजह से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे कहीं गठबंधन तो कमजोर नहीं पड़ जाएगा, क्योंकि इसका विरोध भी शुरू हो गया है। हालांकि सपाई इसकी भरपाई ऐसे कर रहे हैं कि रालोद के खाते में दो सीटें ही गईं जो पहले से तय था।
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विधानसभा सीट   प्रत्याशी      सिंबल 
 मेरठ शहर    रफीक अंसारी    सपा 
 मेरठ दक्षिण     आदिल चौधरी     सपा
 सरधना     अतुल प्रधान     सपा 
 हस्तिनापुर    योगेश वर्मा    सपा 
 किठौर     शाहिद मंजूर    सपा  
 कैंट        मनीषा अहलावत    रालोद
 सिवालखास    गुलाम मोहम्मद    रालोद

कहीं पड़ जाए भारी   
सिवालखास क्षेत्र में बने सियासी माहौल का असर आसपास की सीटों पर भी पड़ सकता है। वहीं, मुजफ्फरनगर में कोई मुस्लिम प्रत्याशी न देना और मेरठ की सात में से चार सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी मुस्लिम होना, कहीं सियासी लिहाज से बड़े नुकसान का कारण तो नहीं बन जाएगा। 

भाजपा कर सकती है भुनाने की कोशिश 
सपा-रालोद गठबंधन में सिवालखास सीट पर हुई खींचतान, रालोद के किसी जाट प्रत्याशी के बजाय सपा के ही मुस्लिम चेहरे को रालोद के सिंबल पर लड़ाने को भाजपा मुद्दा बना सकती है। इससे रालोद के वोटरों को गठबंधन से नाराज करने की कोशिश कर अपनी वोटबैंक बनाने का प्रयास कर सकती है।

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