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माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म : भाव भूषण
Fri, 22 May 2026 05:56 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 22 May 2026 05:56 PM IST
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श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का दूसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि माता-पिता और गुरु की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने कहा कि एक माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण और सेवा करते हैं, लेकिन कई बार पुत्र भी माता-पिता की सेवा नहीं कर पाते। जो व्यक्ति माता-पिता और गुरु की सेवा करता है, उसे जीवन में उन्नति और सम्मान अवश्य मिलता है। समाज और देश में प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए इनकी सेवा को कभी नहीं भूलना चाहिए।
विधान के दूसरे दिन मंत्रोच्चार के साथ श्री जिनेंद्र भगवान का जलाभिषेक किया गया। करीब 130 परिवारों ने विधान में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। शांतिधारा का सौभाग्य विनोद कुमार जैन की पुण्य स्मृति में सरोज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी के निर्देशन में पंडित आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई। सायंकालीन बेला में भगवान शांतिनाथ सहित 24 तीर्थंकरों की मंगल आरती तथा धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। कार्यक्रम में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन समेत कई पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि माता-पिता और गुरु की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने कहा कि एक माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण और सेवा करते हैं, लेकिन कई बार पुत्र भी माता-पिता की सेवा नहीं कर पाते। जो व्यक्ति माता-पिता और गुरु की सेवा करता है, उसे जीवन में उन्नति और सम्मान अवश्य मिलता है। समाज और देश में प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए इनकी सेवा को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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विधान के दूसरे दिन मंत्रोच्चार के साथ श्री जिनेंद्र भगवान का जलाभिषेक किया गया। करीब 130 परिवारों ने विधान में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। शांतिधारा का सौभाग्य विनोद कुमार जैन की पुण्य स्मृति में सरोज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी के निर्देशन में पंडित आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई। सायंकालीन बेला में भगवान शांतिनाथ सहित 24 तीर्थंकरों की मंगल आरती तथा धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। कार्यक्रम में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन समेत कई पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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