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माता-पिता की सेवा ही वास्तविक पूजा : राजेश सेठी
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आर्य समाज थापरनगर के सत्संग में श्राद्ध और तर्पण पर हुआ विचार विमर्श
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में पितृ श्राद्ध एवं तर्पण कैसे करें विषय पर उद्बोधन हुआ। राजेश सेठी ने कहा कि जीवित माता-पिता, आचार्य और वरिष्ठजनों की श्रद्धापूर्वक सेवा करना ही वास्तविक पूजा, श्राद्ध और तर्पण है।
उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति में ऋषि मुनियों ने सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए बालकों और 60 वर्ष से अधिक आयु के गृहस्थों के लिए गुरुकुलों एवं अरण्यों में रहने की व्यवस्था की थी। वरिष्ठजन समाज और लोक कल्याण के लिए समय देते थे। उनके स्वास्थ्य, भोजन और आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा उनके विचारों का सम्मान करना परिवार का दायित्व था।
उन्होंने कहा कि मृत व्यक्ति तक भोजन या कोई वस्तु पहुंचाना तार्किक रूप से संभव नहीं है। इसलिए जीवित माता पिता और बुजुर्गों की सेवा, सम्मान और आज्ञापालन को ही वास्तविक तर्पण माना जाना चाहिए। संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। कार्यक्रम में प्रीति सेठी, चांद ग्रोवर, कमलेश चांदना, विदुला सोनी, सुमन आनंद, सुभाष मल्होत्रा और धर्मवीर ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ हुआ। यजमान सुनीता और मुकेश कन्नौजिया रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में पितृ श्राद्ध एवं तर्पण कैसे करें विषय पर उद्बोधन हुआ। राजेश सेठी ने कहा कि जीवित माता-पिता, आचार्य और वरिष्ठजनों की श्रद्धापूर्वक सेवा करना ही वास्तविक पूजा, श्राद्ध और तर्पण है।
उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति में ऋषि मुनियों ने सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए बालकों और 60 वर्ष से अधिक आयु के गृहस्थों के लिए गुरुकुलों एवं अरण्यों में रहने की व्यवस्था की थी। वरिष्ठजन समाज और लोक कल्याण के लिए समय देते थे। उनके स्वास्थ्य, भोजन और आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा उनके विचारों का सम्मान करना परिवार का दायित्व था।
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उन्होंने कहा कि मृत व्यक्ति तक भोजन या कोई वस्तु पहुंचाना तार्किक रूप से संभव नहीं है। इसलिए जीवित माता पिता और बुजुर्गों की सेवा, सम्मान और आज्ञापालन को ही वास्तविक तर्पण माना जाना चाहिए। संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया। कार्यक्रम में प्रीति सेठी, चांद ग्रोवर, कमलेश चांदना, विदुला सोनी, सुमन आनंद, सुभाष मल्होत्रा और धर्मवीर ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ हुआ। यजमान सुनीता और मुकेश कन्नौजिया रहे।
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