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एडेड कॉलेजों में हाईकोर्ट के हिसाब से तय होगी शिक्षकों की वरिष्ठता
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एडेड कॉलेजों में हाईकोर्ट के हिसाब से तय होगी शिक्षकों की वरिष्ठता
मेरठ। सीसीएसयू से संबद्ध एडेड कॉलेजों में अब हाईकोर्ट के हिसाब से ही शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार की जाएगी। विवि प्रशासन ने इस संबंध में सभी कॉलेजों को आदेश जारी कर दिए हैं। 21 दिसंबर तक सभी कॉलेजों को वरिष्ठता सूची हाईकोर्ट के हिसाब से भेजनी होगी। अगर कॉलेजों आदेशों का पालन नहीं करते हैं तो वह हाईकोर्ट की अवमानना में फंस जाएंगे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सभी 50 एडेड कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा बदलाव आएगा। 20 के करीब कॉलेजों की प्राचार्यों की कुर्सी पर संकट आ गया है।
मेरठ और सहारनपुर मंडल में 50 एडेड कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में आठ सौ के करीब शिक्षक हैं। अभी तक कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची की बात करें तो जो शिक्षक दूसरे कॉलेजों से आए हैं, उनका पुराना कार्यकाल भी वरिष्ठता सूची में जुड़ रहा है। कई कॉलेजों में वहां के मैनेजमेंट और शिक्षकों ने अपने हिसाब से वरिष्ठता सूची तय की हुई है। इससे कॉलेजों में कई बार विवाद की स्थिति भी आती रही है। शिक्षक नेता भी इस मामले में खुद फंसे हुए हैं। ऐसे में वह भी कई बार गलत तरह से शिक्षकों की वरिष्ठता सूची बनवाने के प्रयास कर चुके हैं। लेकिन इस मामले में अब हाईकोर्ट ने वरिष्ठता सूची के बारे में स्पष्ट कर दिया है। विवि ने रिट का हवाला देते हुए कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी एडेड कॉलेज में अब शिक्षक की वह सेवा नहीं जुड़ेगी जो उन्होंने नियमित शिक्षक के रूप में न दी हो। अगर कोई शिक्षक दूसरे कॉलेज में नियमित रहने के बाद किसी दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित होकर आए हैं तो उनकी कॉलेज की वरिष्ठता सूची में पिछले कॉलेज की सेवा का कार्यकाल नहीं जुड़ेगा। हां, विश्वविद्यालय की वरिष्ठता सूची में उनका पुरा सेवाकाल जोड़ते हुए ही वरिष्ठता सूची बनाई जाएगी। यानी कॉलेज में वह उसी तिथि से वरिष्ठ शिक्षक माने जाएंगे जब से उन्होंने ज्वाइन किया है। ऐसी स्थिति में सभी कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा बदलाव आएगा। क्योंकि अब तक जो वरिष्ठता सूची बनी हैं उनमें शिक्षकों की पुराने कॉलेज की सेवा भी जुड़ी हुई हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश से सूची बनने के बाद 20 के करीब प्राचार्यों की कुर्सी पर भी संकट आएगा। इनकी भी वरिष्ठता सूची इसमें बदल जाएगी। अभी तक इस मामले में सिर्फ आठ कॉलेजों ने ही जानकारी दी है। इनमें मेरठ में सिर्फ एएसपीजी कॉलेज द्वारा ही जानकारी दी गई है। बहुत से कॉलेज जानकारी देने से बच रहे हैं। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि जो कॉलेज वरिष्ठ सूची अपडेट कर नहीं भेजेंगे वह हाईकोर्ट की अवमानना में फंसेंगे। इसके साथ ही विवि में एक समिति का भी गठन किया जा रहा है।
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मेरठ। सीसीएसयू से संबद्ध एडेड कॉलेजों में अब हाईकोर्ट के हिसाब से ही शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार की जाएगी। विवि प्रशासन ने इस संबंध में सभी कॉलेजों को आदेश जारी कर दिए हैं। 21 दिसंबर तक सभी कॉलेजों को वरिष्ठता सूची हाईकोर्ट के हिसाब से भेजनी होगी। अगर कॉलेजों आदेशों का पालन नहीं करते हैं तो वह हाईकोर्ट की अवमानना में फंस जाएंगे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सभी 50 एडेड कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा बदलाव आएगा। 20 के करीब कॉलेजों की प्राचार्यों की कुर्सी पर संकट आ गया है।
मेरठ और सहारनपुर मंडल में 50 एडेड कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में आठ सौ के करीब शिक्षक हैं। अभी तक कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची की बात करें तो जो शिक्षक दूसरे कॉलेजों से आए हैं, उनका पुराना कार्यकाल भी वरिष्ठता सूची में जुड़ रहा है। कई कॉलेजों में वहां के मैनेजमेंट और शिक्षकों ने अपने हिसाब से वरिष्ठता सूची तय की हुई है। इससे कॉलेजों में कई बार विवाद की स्थिति भी आती रही है। शिक्षक नेता भी इस मामले में खुद फंसे हुए हैं। ऐसे में वह भी कई बार गलत तरह से शिक्षकों की वरिष्ठता सूची बनवाने के प्रयास कर चुके हैं। लेकिन इस मामले में अब हाईकोर्ट ने वरिष्ठता सूची के बारे में स्पष्ट कर दिया है। विवि ने रिट का हवाला देते हुए कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी एडेड कॉलेज में अब शिक्षक की वह सेवा नहीं जुड़ेगी जो उन्होंने नियमित शिक्षक के रूप में न दी हो। अगर कोई शिक्षक दूसरे कॉलेज में नियमित रहने के बाद किसी दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित होकर आए हैं तो उनकी कॉलेज की वरिष्ठता सूची में पिछले कॉलेज की सेवा का कार्यकाल नहीं जुड़ेगा। हां, विश्वविद्यालय की वरिष्ठता सूची में उनका पुरा सेवाकाल जोड़ते हुए ही वरिष्ठता सूची बनाई जाएगी। यानी कॉलेज में वह उसी तिथि से वरिष्ठ शिक्षक माने जाएंगे जब से उन्होंने ज्वाइन किया है। ऐसी स्थिति में सभी कॉलेजों में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में बड़ा बदलाव आएगा। क्योंकि अब तक जो वरिष्ठता सूची बनी हैं उनमें शिक्षकों की पुराने कॉलेज की सेवा भी जुड़ी हुई हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश से सूची बनने के बाद 20 के करीब प्राचार्यों की कुर्सी पर भी संकट आएगा। इनकी भी वरिष्ठता सूची इसमें बदल जाएगी। अभी तक इस मामले में सिर्फ आठ कॉलेजों ने ही जानकारी दी है। इनमें मेरठ में सिर्फ एएसपीजी कॉलेज द्वारा ही जानकारी दी गई है। बहुत से कॉलेज जानकारी देने से बच रहे हैं। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि जो कॉलेज वरिष्ठ सूची अपडेट कर नहीं भेजेंगे वह हाईकोर्ट की अवमानना में फंसेंगे। इसके साथ ही विवि में एक समिति का भी गठन किया जा रहा है।
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