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चतुर्मास के दौरान हनुमान मंदिर में आचार्य श्री मुनि संरम रत्न विजय जी,भुवनरत्न विजय जी ने दिये मंगल प्रवन
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सरधना पुलिस चौकी बस स्टैंड स्थित मंदिर में मंगल प्रवचन देते मुनि श्री संयमरत्न विजय महाराज।
- फोटो : SARDANA
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जैन समाज का हनुमान मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
सरधना। पुलिस चौकी बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर में रविवार को जैन समाज द्वारा पहली बार धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्री सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर श्री संघ सरधना में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री मुनि संयम रत्न विजय जी एवं मुनिश्री भुवनरत्न विजय जी शनिवार सुबह मंदिर पहुंचे। इस दौरान मुनिश्री ने महावीर बजरंग बली की अजर अमर गाथा के बारे में बताया। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
चौक बाजार स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में चतुर्मास के दौरान धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जैन मंदिर की जगह शनिवार को पुलिस चौकी बस स्टैंड के निकट हनुमान मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आचार्य श्री जयंतसेन सूरिजी के सुशिष्य मुनिश्री संयम रत्न विजय जी एवं मुनिश्री भुवनरत्न विजय जी का मंगल प्रवचन दिए। यहां डॉ. महेश पालीवाल एवं कमलेश पालीवाल परिवार ने भी धर्मलाभ लिया। प्रवचन के पूर्व मुनि श्री भुवनरत्न विजय जी के 33वें जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। श्री संघ अध्यक्ष सतेंद्र जी के साथ समस्त श्रद्धालुओं ने दी। महिला मंडल, बालिका मंडल ने बधाई गीत प्रस्तुत किया। हनुमान चालीसा पर आधारित मार्मिक प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन में गुरु नहीं तो जीवन शुरू नहीं। गुरु ही हमें सही रास्ता दिखाते हैं। माता-पिता ही हमारे प्रथम गुरु हैं। तरक्की की राह पर बढ़ना हो तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करो। गुरु ही हमें अज्ञान के अंधेरे से हटाकर ज्ञान के उजाले की ओर ले जाते हैं। हनुमान शब्द का अर्थ हमें मान-अभिमान का हनन करने की प्रेरणा देता है। विनयवान के हृदय में ही राम का निवास होता है। हनुमान जी की वेशभूषा हमें रहन-सहन और ड्रेसअप अच्छा रखने की प्रेरणा देती है। सिर्फ डिग्री होने से हम सफल नहीं हो सकते हैं। विद्या हासिल करने के साथ हमें अपने गुणों को भी बढ़ाना चाहिए और बुद्धि में चातुरता होना चाहिए। यदि सुनने की कला नहीं तो हम कभी भी अच्छे लीडर नहीं बन सकते हैं। कब, कहां किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है। ये कला हनुमान जी से सीख सकते हैं। सही समय पर सही इंसान को दी गई सही सलाह सिर्फ उसका ही फायदा नहीं करती बल्कि सलाहकार को भी कहीं न कहीं फायदा पहुंचाती है। यदि हमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है, तो मुश्किल से मुश्किल समस्या को आसानी से पूरा कर सकते हैं। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है। राम और महावीर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, क्योंकि दोनों की आध्यात्मिक उपलब्धि एक है। प्रवचन के पश्चात पालीवाल परिवार की ओर से प्रभु प्रसादी रखी गई। इस अवसर पर मुनिश्री के सांसारिक पिता नंदलाल जी चौरड़िया का बहुमान किया गया। सोमवार को मुनि श्री संयमरत्न विजय जी के वर्द्धमान तप की 38वीं ओली का पारणा बस स्टैंड के समीप कमलेश जी पालीवाल के गृह निवास पर होगा। इस मौके पर सतेंद्र जैन, नीरज गुप्ता, मुकुल चंदेल, जयभगवान आदि भी मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
सरधना। पुलिस चौकी बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर में रविवार को जैन समाज द्वारा पहली बार धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्री सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर श्री संघ सरधना में चातुर्मास के दौरान आचार्यश्री मुनि संयम रत्न विजय जी एवं मुनिश्री भुवनरत्न विजय जी शनिवार सुबह मंदिर पहुंचे। इस दौरान मुनिश्री ने महावीर बजरंग बली की अजर अमर गाथा के बारे में बताया। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
चौक बाजार स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में चतुर्मास के दौरान धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जैन मंदिर की जगह शनिवार को पुलिस चौकी बस स्टैंड के निकट हनुमान मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आचार्य श्री जयंतसेन सूरिजी के सुशिष्य मुनिश्री संयम रत्न विजय जी एवं मुनिश्री भुवनरत्न विजय जी का मंगल प्रवचन दिए। यहां डॉ. महेश पालीवाल एवं कमलेश पालीवाल परिवार ने भी धर्मलाभ लिया। प्रवचन के पूर्व मुनि श्री भुवनरत्न विजय जी के 33वें जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। श्री संघ अध्यक्ष सतेंद्र जी के साथ समस्त श्रद्धालुओं ने दी। महिला मंडल, बालिका मंडल ने बधाई गीत प्रस्तुत किया। हनुमान चालीसा पर आधारित मार्मिक प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन में गुरु नहीं तो जीवन शुरू नहीं। गुरु ही हमें सही रास्ता दिखाते हैं। माता-पिता ही हमारे प्रथम गुरु हैं। तरक्की की राह पर बढ़ना हो तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करो। गुरु ही हमें अज्ञान के अंधेरे से हटाकर ज्ञान के उजाले की ओर ले जाते हैं। हनुमान शब्द का अर्थ हमें मान-अभिमान का हनन करने की प्रेरणा देता है। विनयवान के हृदय में ही राम का निवास होता है। हनुमान जी की वेशभूषा हमें रहन-सहन और ड्रेसअप अच्छा रखने की प्रेरणा देती है। सिर्फ डिग्री होने से हम सफल नहीं हो सकते हैं। विद्या हासिल करने के साथ हमें अपने गुणों को भी बढ़ाना चाहिए और बुद्धि में चातुरता होना चाहिए। यदि सुनने की कला नहीं तो हम कभी भी अच्छे लीडर नहीं बन सकते हैं। कब, कहां किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है। ये कला हनुमान जी से सीख सकते हैं। सही समय पर सही इंसान को दी गई सही सलाह सिर्फ उसका ही फायदा नहीं करती बल्कि सलाहकार को भी कहीं न कहीं फायदा पहुंचाती है। यदि हमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है, तो मुश्किल से मुश्किल समस्या को आसानी से पूरा कर सकते हैं। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है। राम और महावीर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, क्योंकि दोनों की आध्यात्मिक उपलब्धि एक है। प्रवचन के पश्चात पालीवाल परिवार की ओर से प्रभु प्रसादी रखी गई। इस अवसर पर मुनिश्री के सांसारिक पिता नंदलाल जी चौरड़िया का बहुमान किया गया। सोमवार को मुनि श्री संयमरत्न विजय जी के वर्द्धमान तप की 38वीं ओली का पारणा बस स्टैंड के समीप कमलेश जी पालीवाल के गृह निवास पर होगा। इस मौके पर सतेंद्र जैन, नीरज गुप्ता, मुकुल चंदेल, जयभगवान आदि भी मौजूद रहे।
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