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Meerut News: सचिवालयों के नहीं खुले ताले, रोस्टर न होने से ग्रामीण परेशान

Fri, 03 Jul 2026 08:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 08:46 PM IST
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Secretariat offices remain locked; villagers inconvenienced due to lack of duty roster.
खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद
- पड़ताल में सचिवालयों में लेखपाल की उपस्थिति का सच आया सामने
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संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। शासन की ओर से ग्राम पंचायत सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है। क्षेत्र के तीन ग्राम सचिवालयों की पड़ताल में शासन के दावों की पोल खुल गई। गांव भैंसा व राफन में सचिवालयों पर ताला लटका मिला। लेखपालों के बैठने का दिन या समय का कोई रोस्टर यहां लगा नहीं मिला।
ग्राम पंचायत भैंसा के सचिवालय में सुबह 11:05 बजे तक ताला लटका हुआ था। यहां ऐसा कोई सूचना बोर्ड भी नहीं था जिससे पता चल सके कि सचिवालय कब खुलेगा। पास ही स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ नंदिता ने बताया कि सचिवालय नहीं खुला है। ग्राम प्रधान उमेश देवी का कहना है कि सचिवालय रोज खुलता है। ग्राम सचिव व लेखपाल भी आते हैं, लेकिन समय और दिन तय नहीं है। शुक्रवार को डाटा ऑपरेटर के मवाना जाने के कारण ताला नहीं खुल सका।
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ग्राम पंचायत राफन का सचिवालय भी बंद पाया गया। ग्राम प्रधान योगेश कुमार ने बताया कि दो-तीन दिन पहले लेखपाल आए थे लेकिन वे नियमित बैठेंगे या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। पंचायत सहायक विनय कुमार ने सफाई दी कि मवाना खुर्द में पंचायत चौपाल होने के कारण वे वहां थे, इसलिए सचिवालय बंद रहा। गांव मवाना खुर्द का सचिवालय खुला मिला। यहां ग्राम सचिव देवेंद्र कुमार कार्य करते मिले। उन्होंने बताया कि लेखपाल का कोई दिन निर्धारित नहीं है। सचिवालयों के बंद रहने और लेखपालों का रोस्टर तय न होने से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र आदि बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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पंचायत सचिवालयों में लेखपाल-सचिव नदारद
हस्तिनापुर। ग्राम पंचायत सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के शासन के निर्देश के बाद हस्तिनापुर ब्लॉक की 46 ग्राम पंचायतों में जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। सभी दावे बेअसर नजर आए।
सुबह 10:15 बजे ग्राम पंचायत झड़का के पंचायत भवन पर ताला लटका मिला। यहां कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। सुबह 11 बजे ग्राम पंचायत सैफपुर कर्मचंदपुर में ग्राम सचिव रोहित कुमार और प्रधान पति अनुज भाटी मौजूद मिले, लेकिन लेखपाल अनुपस्थित रहे। सुबह 11:18 बजे ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन खुला था, मगर पूरा परिसर खाली मिला। सुबह 11:30 बजे ग्राम पंचायत पाली के पंचायत भवन पर ताला लटका मिला। यहां पहुंचे ग्रामीण इंतजार के बाद लौट गए। सुबह 11:50 बजे ग्राम पंचायत दरियापुर में पंचायत भवन बंद मिला। दोपहर 12:05 बजे ग्राम पंचायत पलड़ा में भी पंचायत भवन बंद मिला। पंचायत भवन के बाहर एक ग्रामीण उसके खुलने का इंतजार करता मिला।
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फलावदा। शासन की तरफ से ग्राम पंचायत सचिवालय में लेखपालों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए गए थे। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीणों के समय पर कार्य हो सकें और उन्हें इधर-उधर न भटकना पड़े। लेकिन सचिवालय पर न तो लेखपाल ही पहुंच रहे और न ही सचिव ही पहुंच रहे।
विकास खंड दौराला के गांव महलका निवासी सलमान, शौकीन, सतपाल, ओमपाल का कहना है कि गांव बने सचिवालय पर लेखपाल नहीं आते हैं। यहां ताला लटका रहता है। समसपुर निवासी सुधीर, करणबीर ने बताया कि सचिवालय पर ताला लगा रहता है। गांव बातनौर के सचिवालय पर ताला लटका मिला। लेखपाल का कोई नंबर कहीं लिखा नहीं मिला। सचिव को कॉल की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। ग्रामीण सुदेश, अमरीश व राजपाल आदि ने बताया सचिवालय पर लेखपाल नहीं बैठ रहे हैं। ग्रामीणों को आय, जाति, मूल निवास आदि प्रमाणपत्र के लिए तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। महलका सचिवालय पर पहुंचे नितिन कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो गई थी। मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसे चक्कर काटने पड़ रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। गांव बातनौर की प्रधान शमा परवीन का कहना है कि ग्रामीणों की समस्याओं को देखते लेखपाल नहीं आने की जानकारी अधिकारियों को दी गई है।
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रोजाना समय से नहीं पहुंच रहे लेखपाल
माछरा। माछरा सचिवालय पर शुक्रवार को पंचायत सहायक आकाश सैनी और ग्राम पंचायत सचिव जितेंद्र सिंह मौजूद मिले। फोन पर लेखपाल प्रियांशु शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास इस समय छह गांवों का कार्यभार है, जिसको रोस्टर के अनुसार करना पड़ता है। माछरा सचिवालय पर वह प्रत्येक सोमवार को आते हैं और ग्रामीणों की समस्याओं का निवारण करते हैं। इसी प्रकार से बाकी दिनों में अन्य गांवों के सचिवालयों पर जाना पड़ता है। वहीं ब्लॉक क्षेत्र के हसनपुर कलां सचिवालय पर ताला लटका मिला। गांव की लेखपाल रूपाली वर्मा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उन पर चार गांवों की जिम्मेदारी मिली हुई है। हसनपुर कलां सचिवालय पर वह बुधवार को रहती हैं। उन्होंने बताया कि भौगोलिक दूरी और काम की अधिकता के कारण प्रत्येक गांव में पूरा समय देना बड़ी चुनौती है।


जनता और लेखपाल दोनों परेशान
इस व्यस्त रोस्टर का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। जब पटवारी फील्ड में होते हैं तो सचिवालय में उनसे मिलने आए ग्रामीणों को मायूस लौटना पड़ता है। वहीं जब लेखपाल तहसील में होते हैं तो जमीनी विवाद, पैमाइश आदि के मामले लटक जाते हैं। ग्रामीणों दिनेश, राकेश त्यागी, बबलू, जितेंद्र, मनीष आदि का कहना है कि सरकार को लेखपालों के अतिरिक्त पदों को भरना चाहिए ताकि प्रत्येक ग्राम पंचायत पर जनता के काम समय पर हो सकें।

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

खाली पड़ा ग्राम पंचायत नगला चांद का पंचायत भवन स्रोत संवाद

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