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सामुदायिक रसोई की अनियमितता की आडियो वायरल
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ऑडियो में दावा: खाने के 1000 पैकेट बन रहे, दिखाए जा रहे 10000
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सामुदायिक रसोई में अनियमितताओं और घोटाले के आरोपों को लेकर सोमवार को एक ऑडियो वायरल हो गई। ऑडियो में खुद को एक डॉक्टर बताने वाले शख्स ने रसोई चलाने वाले एक व्यक्ति से श्रमिकों को बांटने के लिए मीठी पूरी के रोजाना 200 पैकेट बनाने को कहा। रेट की बात पर बातचीत सामुदायिक रसोई की तरफ मुड़ गया। जिसमें रसोई चलाने वाले ने आरोप लगाया कि सामुदायिक रसोई में खूब घोटाला किया जा रहा है।
इस शख्स का दावा है कि वह खुद सामुदायिक रसोई में रहा है। उसे सारा सच पता है। प्रशासन जो दावा कर रहा है उसके विपरीत रात की सब्जी को सुबह और अगले दिन तक पैक किया जा रहा है। एक पैकेट का 29 रुपये के हिसाब से भुगतान होगा। लेकिन जब 14 रुपए की थाली ही है तो 15 रुपये में सब सामान कैसे पैक हो सकता है। ऑडियो में कहा गया कि प्रशासन दावे कर रहा है कि 10000 पैकेट सामुदायिक रसोई में बनवाकर मजदूर और गरीब लोगों को बांटे जा रहे हैं, जबकि केवल 1000 पैकेट सुबह से शाम तक बनते हैं। इसमें प्रशासन के इशारे पर पूरा खेल है। ठेकेदार और अन्य लोगों की मिलीभगत से यह सब चल रहा है। हकीकत में पैकेट 1000 ही बांटे जा रहे हैं और उन्हें कागजों में 10000 दिखाया जा रहा है। ऐसे में भुगतान तो 10 हजार पैकेट का होगा। जबकि सभी जानते हैं खाना कैसा मिल रहा है। नेता और जनता भी शिकायत कर चुकी है। लेकिन उसके बाद भी खेल चल रहा है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सामुदायिक रसोई में अनियमितताओं और घोटाले के आरोपों को लेकर सोमवार को एक ऑडियो वायरल हो गई। ऑडियो में खुद को एक डॉक्टर बताने वाले शख्स ने रसोई चलाने वाले एक व्यक्ति से श्रमिकों को बांटने के लिए मीठी पूरी के रोजाना 200 पैकेट बनाने को कहा। रेट की बात पर बातचीत सामुदायिक रसोई की तरफ मुड़ गया। जिसमें रसोई चलाने वाले ने आरोप लगाया कि सामुदायिक रसोई में खूब घोटाला किया जा रहा है।
इस शख्स का दावा है कि वह खुद सामुदायिक रसोई में रहा है। उसे सारा सच पता है। प्रशासन जो दावा कर रहा है उसके विपरीत रात की सब्जी को सुबह और अगले दिन तक पैक किया जा रहा है। एक पैकेट का 29 रुपये के हिसाब से भुगतान होगा। लेकिन जब 14 रुपए की थाली ही है तो 15 रुपये में सब सामान कैसे पैक हो सकता है। ऑडियो में कहा गया कि प्रशासन दावे कर रहा है कि 10000 पैकेट सामुदायिक रसोई में बनवाकर मजदूर और गरीब लोगों को बांटे जा रहे हैं, जबकि केवल 1000 पैकेट सुबह से शाम तक बनते हैं। इसमें प्रशासन के इशारे पर पूरा खेल है। ठेकेदार और अन्य लोगों की मिलीभगत से यह सब चल रहा है। हकीकत में पैकेट 1000 ही बांटे जा रहे हैं और उन्हें कागजों में 10000 दिखाया जा रहा है। ऐसे में भुगतान तो 10 हजार पैकेट का होगा। जबकि सभी जानते हैं खाना कैसा मिल रहा है। नेता और जनता भी शिकायत कर चुकी है। लेकिन उसके बाद भी खेल चल रहा है।
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