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सरकारी धर्म कांटे में सेटिंग का ‘अधर्म’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:33 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नवीन मंडी में सरकारी सिस्टम सेटिंग कर व्यापारी और किसान दोनों को चूना लगा रहा है। यहां सरकारी कंप्यूटराइज्ड धर्मकांटा कभी सही रहता ही नहीं। मजबूर होकर व्यापारियों और किसानों को पास के ही निजी धर्म कांटों का रुख करना पड़ता है। इससे जहां लाखों रुपये का फटका कारोबारियों और किसानों को लग रहा है तो वहीं दूसरी तरफ मंडी शुल्क की भी चोरी हो रही है।
मंडी शुल्क चोरी रोकने को लगवाया था धर्मकांटा
मेरठ। वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार ने मंडियों में वजन के आधार पर मंडी शुल्क लगाने के लिये सभी बड़ी मंडियों में मुख्य मार्ग पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटे लगवाए थे। जिसपर लाखों रुपया खर्च किया गया था। मुख्य मार्ग पर धर्मकांटा लगाने के पीछे तर्क था कि मंडी में आने वाला कोई भी वाहन वजन कराकर ही मंडी में जायेगा। यह व्यवस्था निशुल्क की गई थी। कुछ दिन तक तो धर्मकांटा ठीक चला, लेकिन उसके बाद से धर्मकांटा लगातार खराब रहता है।
किसान और व्यापारी की जेब पर अतिरिक्त खर्च
मेरठ। मंडी में प्रतिदिन सौ से दौ सौ ट्रक माल की आवक होती है। सरकारी धर्मकांटा खराब होने से व्यापारियों और किसानों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है वहीं मंडी शुल्क चोरी की बात भी सामने आ रही है। दरअसल सारा खेल सेटिंग का है। बाहर धर्मकांटे पर एक वाहन के वजन पर डेढ़ सौ से दो सौ रुपये तक का शुल्क अदा करना पड़ता है। चूंकि मंडी में कांटा खराब है तो बाहर से आने वाला खाद्यान, अनाज, सब्जी और फल बाहर के कांटों पर तुलवाना कारोबारियों की मजबूरी है। इसका सीधा लाभ निजी धर्म कांटा संचालकों को हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि जानबूझकर मंडी का कांटा खराब किया जाता है। ताकि कारोबारियों को माल तुलवाने के लिए निजी धर्मकांटे पर भेजा जा सके। निजी धर्मकांटे की पर्ची पर ही मंडी शुल्क लगता है तो तोल में गड़बड़ी की भी आशंका रहती है। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को धर्म कांटे की व्यवस्था देखी तो यहां पर कर्मचारी तो बैठा मिला, लेकिन धर्म कांटे पर तौल नहीं हो रही थी। बताया गया कि धर्मकांटा खराब है।
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धर्म कांटों के कारण दिल्ली रोड रहती है जाम
मेरठ। नवीन मंडी में माल न तुलने के कारण कारोबारियों को दिल्ली रोड स्थित अन्य कांटों पर जाना पड़ता है, जिससे इस रोड पर अक्सर जाम लगता है। डिवाइडर के कट पार कर ट्रक इधर उधर जाते हैं और जाम का सबब बनते हैं। स्थानीय जनता अनेक बार विरोध प्रकट कर चुकी है पर नतीजा नहीं निकल रहा है। हालांकि नवीन मंडी में मुख्य मार्ग पर धर्मकांटा लगाए जाते समय मंडी के व्यापारियों ने विरोध भी किया था, लेकिन निशुल्क माल तोलने की बात कहकर व्यापारियों को चुप करा दिया गया था। लेकिन सरकारी धर्मकांटा खराब होने के बाद निजी धर्मकांटा संचालकों को ये फायदे का धंधा लगा और अब कई धर्मकांटे निजी तौर पर लग गये हैं।
- नवीन मंडी में मुख्य मार्ग पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा लगा है। सभी हलके भारी वाहन धर्म कांटे से गुजरते हैं। मंडी में खाद के भी गोदाम हैं। भारी ट्रकों के कारण धर्मकांटे में दिक्कत आती रहती है। शिकायत मिलने पर रखरखाव करने वाली कंपनी को बताया जाता है। ठीक करने एक-दो दिन लग जाते हैं। धर्मकांटा पर्ची बगैर माल मंडी में प्रवेश नहीं होने दिया जाता है। माल की तोल पर शक होने पर हम अपने स्तर से भी सामान की तोल कराते हैँ।
नरेन्द्र सिंह, मंडी समिति सचिव मेरठ,
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मंडी शुल्क चोरी रोकने को लगवाया था धर्मकांटा
मेरठ। वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार ने मंडियों में वजन के आधार पर मंडी शुल्क लगाने के लिये सभी बड़ी मंडियों में मुख्य मार्ग पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटे लगवाए थे। जिसपर लाखों रुपया खर्च किया गया था। मुख्य मार्ग पर धर्मकांटा लगाने के पीछे तर्क था कि मंडी में आने वाला कोई भी वाहन वजन कराकर ही मंडी में जायेगा। यह व्यवस्था निशुल्क की गई थी। कुछ दिन तक तो धर्मकांटा ठीक चला, लेकिन उसके बाद से धर्मकांटा लगातार खराब रहता है।
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किसान और व्यापारी की जेब पर अतिरिक्त खर्च
मेरठ। मंडी में प्रतिदिन सौ से दौ सौ ट्रक माल की आवक होती है। सरकारी धर्मकांटा खराब होने से व्यापारियों और किसानों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है वहीं मंडी शुल्क चोरी की बात भी सामने आ रही है। दरअसल सारा खेल सेटिंग का है। बाहर धर्मकांटे पर एक वाहन के वजन पर डेढ़ सौ से दो सौ रुपये तक का शुल्क अदा करना पड़ता है। चूंकि मंडी में कांटा खराब है तो बाहर से आने वाला खाद्यान, अनाज, सब्जी और फल बाहर के कांटों पर तुलवाना कारोबारियों की मजबूरी है। इसका सीधा लाभ निजी धर्म कांटा संचालकों को हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि जानबूझकर मंडी का कांटा खराब किया जाता है। ताकि कारोबारियों को माल तुलवाने के लिए निजी धर्मकांटे पर भेजा जा सके। निजी धर्मकांटे की पर्ची पर ही मंडी शुल्क लगता है तो तोल में गड़बड़ी की भी आशंका रहती है। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को धर्म कांटे की व्यवस्था देखी तो यहां पर कर्मचारी तो बैठा मिला, लेकिन धर्म कांटे पर तौल नहीं हो रही थी। बताया गया कि धर्मकांटा खराब है।
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धर्म कांटों के कारण दिल्ली रोड रहती है जाम
मेरठ। नवीन मंडी में माल न तुलने के कारण कारोबारियों को दिल्ली रोड स्थित अन्य कांटों पर जाना पड़ता है, जिससे इस रोड पर अक्सर जाम लगता है। डिवाइडर के कट पार कर ट्रक इधर उधर जाते हैं और जाम का सबब बनते हैं। स्थानीय जनता अनेक बार विरोध प्रकट कर चुकी है पर नतीजा नहीं निकल रहा है। हालांकि नवीन मंडी में मुख्य मार्ग पर धर्मकांटा लगाए जाते समय मंडी के व्यापारियों ने विरोध भी किया था, लेकिन निशुल्क माल तोलने की बात कहकर व्यापारियों को चुप करा दिया गया था। लेकिन सरकारी धर्मकांटा खराब होने के बाद निजी धर्मकांटा संचालकों को ये फायदे का धंधा लगा और अब कई धर्मकांटे निजी तौर पर लग गये हैं।
- नवीन मंडी में मुख्य मार्ग पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा लगा है। सभी हलके भारी वाहन धर्म कांटे से गुजरते हैं। मंडी में खाद के भी गोदाम हैं। भारी ट्रकों के कारण धर्मकांटे में दिक्कत आती रहती है। शिकायत मिलने पर रखरखाव करने वाली कंपनी को बताया जाता है। ठीक करने एक-दो दिन लग जाते हैं। धर्मकांटा पर्ची बगैर माल मंडी में प्रवेश नहीं होने दिया जाता है। माल की तोल पर शक होने पर हम अपने स्तर से भी सामान की तोल कराते हैँ।
नरेन्द्र सिंह, मंडी समिति सचिव मेरठ,