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भारत की आत्मा है संस्कृत : प्रो. हरे कृष्णा
Sat, 25 Oct 2025 10:16 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 25 Oct 2025 10:16 PM IST
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सीसीएसयू में चल रहे व्यास समारोह में दस विद्वानों के बीच हुए तर्क, वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि परिसर में चल रहे व्यास समारोह के दौरान शनिवार को संस्कृत की विलक्षण विधा दशावधान में दस विद्वानों के बीच तर्क हुए। बंगलूरू से पहुंचे डॉ.उमा माहेश्वर एन ने अपनी मेधा दर्शाते हुए विद्वानों द्वारा पूछे सवालों का समाधान किया। प्रभारी कुलपति प्रो. हरे कृष्ण ने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है। संस्कृत के समान वैज्ञानिकता अन्य दूसरी किसी भाषा में नहीं है।
मुख्य अतिथि प्रो. मधुकेश्वर भट्ट ने कहा कि अवधान कला बुद्धि की पराकाष्ठा है। पद्मश्री अभिराज राजेंद्र मिश्र ने कहा कि अवधान में प्रश्न कर्ता की बौद्धिक समस्या का समाधान अवधानी को तुरंत करना होता है। समारोह में वाद-विवाद प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने फल कर्म करने से प्राप्त होता है या भाग्य से विषय पर अपने विचार रखे।
प्रो. चंद्रशेखर मिश्र एवं डॉ. कान्हु चरण पंडा ने विजेताओं की घोषणा की। दीवान पब्लिक स्कूल जागृति विहार से पावनी कौशिक प्रथम, दयावती मोदी एकेडमी से अर्णव मिश्र द्वितीय और इसी स्कूल से अक्षित डागर तृतीय रहे। दयावती मोदी एकेडमी ने ही चल वैजयंती ने हासिल की। डेजी ने मुचुकुंद कथा और सृष्टि ने आध्यात्मिकता, भक्तिवाद एवं प्रतीकवाद के संगम महारास की प्रस्तुति दी। प्रो. वाचस्पति मिश्र, प्रो.छाया रानी, डॉ.आभा कंसल, डॉ.राजबीर, प्रो.पूनम लखनपाल, डॉ. प्रशांत शर्मा, डॉ. नरेंद्र कुमार एवं तुषार गोयल सहित सभी विद्यार्थी मौजूद रहे।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि परिसर में चल रहे व्यास समारोह के दौरान शनिवार को संस्कृत की विलक्षण विधा दशावधान में दस विद्वानों के बीच तर्क हुए। बंगलूरू से पहुंचे डॉ.उमा माहेश्वर एन ने अपनी मेधा दर्शाते हुए विद्वानों द्वारा पूछे सवालों का समाधान किया। प्रभारी कुलपति प्रो. हरे कृष्ण ने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है। संस्कृत के समान वैज्ञानिकता अन्य दूसरी किसी भाषा में नहीं है।
मुख्य अतिथि प्रो. मधुकेश्वर भट्ट ने कहा कि अवधान कला बुद्धि की पराकाष्ठा है। पद्मश्री अभिराज राजेंद्र मिश्र ने कहा कि अवधान में प्रश्न कर्ता की बौद्धिक समस्या का समाधान अवधानी को तुरंत करना होता है। समारोह में वाद-विवाद प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने फल कर्म करने से प्राप्त होता है या भाग्य से विषय पर अपने विचार रखे।
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प्रो. चंद्रशेखर मिश्र एवं डॉ. कान्हु चरण पंडा ने विजेताओं की घोषणा की। दीवान पब्लिक स्कूल जागृति विहार से पावनी कौशिक प्रथम, दयावती मोदी एकेडमी से अर्णव मिश्र द्वितीय और इसी स्कूल से अक्षित डागर तृतीय रहे। दयावती मोदी एकेडमी ने ही चल वैजयंती ने हासिल की। डेजी ने मुचुकुंद कथा और सृष्टि ने आध्यात्मिकता, भक्तिवाद एवं प्रतीकवाद के संगम महारास की प्रस्तुति दी। प्रो. वाचस्पति मिश्र, प्रो.छाया रानी, डॉ.आभा कंसल, डॉ.राजबीर, प्रो.पूनम लखनपाल, डॉ. प्रशांत शर्मा, डॉ. नरेंद्र कुमार एवं तुषार गोयल सहित सभी विद्यार्थी मौजूद रहे।
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