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भक्तिकाल में प्रभावी रही संत काव्य परंपरा : प्रो. लोहनी

Tue, 10 Mar 2026 09:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 09:15 PM IST
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Saint poetic tradition remained effective during the devotional period: Prof. Lohani
- सीसीएसयू में संत काव्य परंपरा और हिंदी साहित्य विषय पर सेमिनार का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में 'संत काव्य परंपरा और हिंदी साहित्य' विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भक्तिकाल की ज्ञानाश्रयी शाखा संत काव्य की समृद्ध विरासत को नए संदर्भों में रेखांकित किया गया। इसके साथ ही इसकी वर्तमान सामाजिक-आध्यात्मिक प्रासंगिकता पर गहन चर्चा की गई।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि संत काव्य को हिंदी साहित्य की जीवंत धरोहर है। उन्होंने मौजूदा समय में इसकी उपयोगिता के बारे में भी बताया। मुख्य वक्ता प्रो नवीन चंद्र लोहनी ने संतों के लक्षण, वर्तमान महत्व और शोध की नई दिशाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने संत काव्य को भक्तिकाल की सबसे प्रभावशाली एवं जन-उन्मुख शाखा बताया। प्रो. लोहनी ने कहा कि यह परंपरा उत्तरी भारत से आगे बढ़कर अखिल भारतीय स्तर पर फैली। इसमें विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियां और धार्मिक परंपराएं समाहित हुईं। संत काव्य ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम सद्भाव, लोक कल्याण, मानव धर्म सर्वव्यापी प्रेम, करुणा और समानता की भावना को मजबूत किया।
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इस अवसर पर डॉ. ईश्वर चंद्र गंभीर की पुस्तक 'आओ सीखें हिंदी' का विमोचन भी किया गया। गंभीर ने पुस्तक के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि हम अपनी हिंदी को नहीं छोड़ने वाले, चाहे जितने आ जाएं मैकाले। उन्होंने परिवारों और संस्थाओं में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित किया। वहीं, प्रो. बजरंग बिहारी तिवारी ने भक्ति काल के कवियों के सुधारवादी दृष्टिकोण को आधुनिक मुद्दों से जोड़कर विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रो. जीत सिंह ने संत साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर जोर दिया। डॉ. श्रीधर ने भक्ति काल की विशेषताओं, शाखाओं के समन्वयवादी स्वरूप और मौजूदा समय में इसकी उपयोगिता का उल्लेख किया।
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